आंबेडकर जयंती: आपको भी नहीं मालूम होंगी अंबेडकर के बारे में ये अनसुनी बातें

आंबेडकर ने सातारा शहर में राजवाड़ा चौक पर स्थित गवर्न्मेण्ट हाईस्कूल (अब प्रतापसिंह हाईस्कूल) में 7 नवंबर 1900 को अंग्रेजी की पहली कक्षा में प्रवेश लिया। इसी दिन से उनके शैक्षिक जीवन का आरम्भ हुआ था, इसलिए 7 नवंबर को महाराष्ट्र में विद्यार्थी दिवस के रूप में मनाया जाता हैं।

Published by SK Gautam Published: April 14, 2019 | 12:54 pm
Modified: April 14, 2019 | 12:59 pm

फाइल फोटो

शाश्वत मिश्रा

लखनऊ: भारतीय संविधान के जन्मदाता डॉ॰ भीमराव अंबेडकर, जो कि दलित समाज से तालुक्क रखते थे उन्होंने अपने जीवन में तमाम तरीकों की परेशानियां झेलते हुए पढ़ाई की और दलितों, पिछड़ों के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

आंबेडकर ने सातारा शहर में राजवाड़ा चौक पर स्थित गवर्न्मेण्ट हाईस्कूल (अब प्रतापसिंह हाईस्कूल) में 7 नवंबर 1900 को अंग्रेजी की पहली कक्षा में प्रवेश लिया। इसी दिन से उनके शैक्षिक जीवन का आरम्भ हुआ था, इसलिए 7 नवंबर को महाराष्ट्र में विद्यार्थी दिवस के रूप में मनाया जाता हैं। उस समय उन्हें ‘भिवा’ कहकर बुलाया जाता था। स्कूल में उस समय ‘भिवा रामजी आंबेडकर’ यह उनका नाम उपस्थिति पंजिका में क्रमांक – 1914 पर अंकित था।

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इनके बारे में कुछ और भी ऐसी ही बातें हैं, जिन्हें जानकार लोग हैरान हो जायेंगे।

1॰ बाबा साहेब अंबेडकर का परिवार महार जाति से संबंध रखता था, जिसे अछूत माना जाता था बचपन से ही आर्थिक और सामाजिक भेदभाव देखने वाले अंबेडकर ने विषम परिस्थितियों में पढ़ाई शुरू की।

2. अंबेडकर ने प्रतिदिन 21 घंटे की पढ़ाई करके लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स में 8 वर्ष में समाप्त होने वाली पढाई केवल 2 वर्ष 3 महीने में पूरी की थी।

3॰ बाल विवाह प्रचलित होने के कारण 1906 में उनकी शादी नौ साल की लड़की रमाबाई से हो गयी।

4॰ ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा किए गए “The Makers of the Universe” नामक जागतिक सर्वेक्षण के आधार पर पिछले 10 हजार वर्षो के शीर्ष 100 मानवतावादी विश्वमानवों की सूची बनाई गई थी जिसमें चौथा नाम डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का था।

5॰ 1908 में उन्होंने एलफिंस्टन कॉलेज में प्रवेश लिया, इस कॉलेज में प्रवेश लेने वाले वे पहले दलित जाति के बच्चे थे। तो 1921 में लंदन स्कूल ऑफ इकॉनोमिक्स से उन्हें एमए की डिग्री मिली।

6॰ इनकी किताब “दि बुद्ध अण्ड हिज् धम्म” भारतीय बौद्धों का “धर्मग्रंथ” है।

7॰ 1925 में बाबा साहेब को बॉम्बे प्रेसिडेंसी समिति ने साइमन आयोग में काम करने के लिए नियुक्त किया, इस आयोग का विरोध पूरे भारत में किया गया था।

8॰ अंबेडकर का पहला स्टेच्यु 1950 में कोल्हापुर में उनके जीवित रहते ही बनाया गया था।

9॰ अंबेडकर एक अछे चित्रकार भी थे उन्होने बुद्ध की आँखें खुली रहने वाली पहली तस्वीर बनाई।

10॰ उन्होने अपनी एक किताब “The Problem of Rupee-Its Origin & its solution” में कालेधन को खत्म करने के लिए हर 10 साल बाद नोट बदलने का सुझाव दिया था।

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11॰ डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर विदेश जाकर अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट (PhD) की डिग्री हासिल करने वाले पहले भारतीय थे।

12॰ डॉ. अम्बेडकर ही एकमात्र भारतीय हैं जिनकी प्रतिमा लन्दन संग्रहालय में कार्ल मार्क्स के साथ लगी हुई है।

13॰ भारतीय तिरंगे में “अशोक चक्र” को जगह देने का श्रेय भी डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को जाता है।

14॰ भारत की आजादी के बाद उन्हें कानून मंत्री बनाया गया। 29 अगस्त, 1947 को स्वतंत्र भारत के संविधान रचना के लिए संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया।

15॰ 1951 में संसद में अपने हिन्दू कोड बिल मसौदे को रोके जाने के बाद अंबेडकर ने मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे दिया इस मसौदे में उत्तराधिकार, विवाह और अर्थव्यवस्था के कानूनों में लैंगिक समानता की बात कही गई थी।

16॰ पीने के पानी के लिए सत्याग्रह करनेवाले बाबासाहेब विश्व के प्रथम और एकमात्र सत्याग्रही थे।

17॰ 14 अक्टूबर 1956 को अंबेडकर और उनके समर्थकों ने पंचशील को अपनाते हुए बौद्ध धर्म ग्रहण किया. अंबेडकर का मानना था कि हिंदू धर्म के अंदर दलितों को कभी भी उनका अधिकार नहीं मिल सकता है. 6 दिसंबर, 1956 को अंबेडकर की मृत्यु हो गई।

18॰ डॉ. बाबासाहब अम्बेडकर पर सबसे अधिक गाने और किताबें लिखी गई है।

19॰ डॉ. बाबासाहब अम्बेडकर का अपने 8,50,000 समर्थको के साथ बौद्ध धर्म अपनाना विश्व में ऐतिहासिक था क्योंकि यह विश्व का सबसे बडा धर्मांतरण था।

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20॰ बाबासाहेब पिछड़ी जाति के पहले वकील थे।

21॰ दुनिया में सबसे अधिक स्टेच्यु (Statue) बाबासाहेब के ही हैं।

22॰ डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने भगवान बुद्ध, संत कबीर और महात्मा फुले इन तीनों महापुरूषों को अपना गुरू माना है।

23॰ मध्य प्रदेश और बिहार के बेहतर विकास के लिए बाबासाहेब ने 50 के दशक में ही विभाजन का प्रस्ताव रखा था, लेकिन इसे सन 2000 में जाकर माना गया और इनका विभाजन कर छत्तीसगढ़ और झारखण्ड का गठन किया गया।

24॰ डॉ. बाबासाहब अम्बेडकर अपने माता-पिता की चौदहवीं और आखिरी संतान थे।