अटल जी जैसा बड़ा नेता मुश्किल से मिलता है- गवर्नर रामनाईक

यह सुखद संयोग है कि ईसाई धर्म के संस्थापक प्रभु ईशा मसीह, महामना मदन मोहन मालवीय और अटल बिहारी वाजपेयी की जन्मतिथि एक ही है। वाजपेयी राजनीति के महानायक तथा देश के सर्वमान्य नेता थे। दल के लोग उनकी प्रशंसा करें तो स्वाभाविक है पर अटल जी की स्तुति विपक्षी दल के नेता भी करते हैं।

अटल जी जैसा बड़ा नेता मुश्किल से मिलता है- गवर्नर रामनाईक

लखनऊ: यह सुखद संयोग है कि ईसाई धर्म के संस्थापक प्रभु ईशा मसीह, महामना मदन मोहन मालवीय और अटल बिहारी वाजपेयी की जन्मतिथि एक ही है। वाजपेयी राजनीति के महानायक तथा देश के सर्वमान्य नेता थे। दल के लोग उनकी प्रशंसा करें तो स्वाभाविक है पर अटल जी की स्तुति विपक्षी दल के नेता भी करते हैं। अटल जी में सबको साथ लेकर चलने की विशेषता थी तथा उन्होंने देश को नई ऊंचाईयों पर पहुंचाया। अटल ऐसे पूर्व प्रधानमंत्री थे जिन्होंने लखनऊ से सांसद रहते हुए भी अपना निजी आवास नहीं बनाया।

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गवर्नर रामनाईक ने कहा कि अटल विलक्षण प्रतिभा के मालिक थे। उनके साथ संगठन और सरकार में काम करने का अवसर मिला। अटल भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे तो वे मुंबई के अध्यक्ष थे। सन् 1980 में मुंबई में आयोजित पहले पार्टी अधिवेशन में न्यायमूर्ति छागला ने अपने संबोधन में कहा था कि ‘मैं मिनी इण्डिया देख रहा हूँ और मेरे दाहिने हाथ पर देश के भावी प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बैठे हैं।‘ आगे जाकर न्यायमूर्ति छागला की भविष्यवाणी सही साबित हुई और अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री बने।

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अटल कार्यकर्ताओं से बड़ी आत्मियता और स्नेह से मिलते थे। 1994 में जब उन्हें कैंसर हुआ तब वे लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक थे, उन्होंने त्यागपत्र देने की बात कही तो अटल ने कहा कि ‘त्यागपत्र मैं अपने पास रखता हूँ पर आप जल्दी ही वापस आने वाले हैं।’ यह कहकर उन्होंने उत्साहवर्द्धन किया तथा स्वास्थ्य की जानकारी लेने वे स्वयं बिना किसी को बताये मेरे निवास पर आये। कारगिल युद्ध में शहीदों के परिजनों को पेट्रोल पम्प और गैस एजेन्सी देने के प्रस्ताव को अटल ने सहजता से स्वीकार किया। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर उनके रास्ते पर चलने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अटल जैसा बड़ा नेता मुश्किल से मिलता है। केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अटल भारत के विलक्षण व्यक्ति थे।

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विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि अटल प्रिय और अप्रिय से सर्वथा मुक्त व्यक्तित्व के मालिक थे। अपने हास्य और विनोद के माध्यम से माहौल बनाना उनकी कुशलता थी। उन्होंने कहा कि अटल जी के डांट मेें भी प्रेम होता था।