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बाहर खेल रहा था 5 साल का मासूम, कुत्तों ने दौड़ाया और नोंचकर खा डाला

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AdminBy Admin

Published on 19 April 2016 3:43 AM GMT

बाहर खेल रहा था 5 साल का मासूम, कुत्तों ने दौड़ाया और नोंचकर खा डाला
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बरेली: बहेड़ी के सकलैनी इलाके में एक और मासूम को आदमखोर कुत्ते नोंच-नोंच कर खा गए। इस बार इन कु्त्तों का शिकार टैक्सी ड्राइवर जुबैर का पांच साल का बेटा आमिर बना। वह घर के बाहर खाली प्लॉट में खेल रहा था, तभी कुत्तों ने उसे दौड़ा लिया। जान बचाने के लिए आमिर खेतों की तरफ भागा और फिसलकर वहीं गिर पड़ा। उसी वक्त एक साथ कई कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया और नोंचकर खा गए। पिछले दो साल में बहेड़ी में दस बच्चों इसी तरह अपनी जान गंवा चुके हैं।

क्या है पूरा मामला ?

-सकलैनीनगर का रहने वाला जुबैर टैक्सी ड्राइवर है।

-रविवार को वह बुकिंग पर बाहर गया था।

-घर में पत्नी फरजाना, बेटा आमिर और बेटी आयशा थी।

-फरजाना ने पडो़स लड़की को घर पर सोने के लिए बुलाया था।

-सुबह लड़की जब अपने घर लौटी तो पीछे-पीछे आमिर भी चला गया

-घर के बाहर खाली प्लॉट में खेलते वक्त आमिर को कुत्तों ने दौड़ा लिया।

-कुत्तों से डरकर आमिर खेत की ओर भागा और फिसलकर गिर पड़ा।

-कुत्ते आमिर को नोंचते रहे, लेकिन उसे बचाने वहां कोई नहीं आया।

-आमिर के घर न लौटने पर फरजाना ने तलाश शुरू की।

-आमिर का शव बुरी हालत में खेत में पड़ा मिला।

-फरजाना की चीख-पुकार सुनकर लोग लाठी-डंडे लेकर कुत्तों के पीछे दौड़े।

-कुत्ते खेतों से निकलकर जंगल की ओर भाग निकले।

अफसरों ने नहीं लिया संज्ञान

-घटना के बाद लोगों ने फोन पर एसडीएम और तहसीलदार को इसकी जानकारी दी।

-किसी अफसर ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।

-दोनों अधिकारियों का एक ही जवाब था कि वो सरकारी काम में बिजी हैं।

कुत्तों के आतंक से दहशत में हैं लोग

-कुत्तों का आतंक पूरे जिले में मंडरा रहा है।

-जिला अस्पताल में ही रोजाना करीब 300 लोग कुत्ता काटने का इंजेक्शन लगवाने पहुंचते हैं।

-पीएचसी, सीएचसी, निजी अस्पताल का आंकड़ा अलग है।

-उनके मुताबिक, रोजाना कुत्तों का शिकार बनने वालों की तादाद 500 से 700 तक पहुंच जाती है

कुत्ते क्यों बन जाते हैं आदमखोर ?

-भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान में सर्जरी विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मुजम्मिल हक के मुताबिक, कुत्ता जंगली जानवर की श्रेणी में आता है।

-आबादी क्षेत्र में रहने वाले कुत्ते इंसानों के बीच रहकर काफी हद तक इंसानों से फ्रेंडली हो जाते हैं।

-यहां पर उन्हें भोजन भी आसानी से उपलब्ध हो जाता है।

-जो कुत्ते जंगलो में रहते हैं, वो इंसानो से फ्रेंडली नहीं हो पाते हैं।

-शिकार करके खाना उनकी आदत में है। ऐसे में जब कभी वो आबादी वाले इलाके में आते हैं तो लोगों पर हमला कर देते हैं।

-एकबार इंसानी खून उनके मुंह लग जाता है तो वो आदमखोर प्रवृत्ति के हो जाते हैं।

-जानवरों की याददाश्त काफी तेज होती है। वो खुद पर हुए हमले को कभी नहीं भूलते हैं।

कुत्तों की जनसंख्या बढ़ना भी है समस्या

-आइवीआरआइ के निदेशक डॉ. आरके सिंह के मुताबिक, कुत्तों की जनसंख्या बढ़ना भी एक बड़ी समस्या है।

-उन पर नियंत्रण के लिए राज्य सरकार कार्यक्रम चलाती है।

-अगर इस मामले में हमसे कोई टेक्निकल मदद मांगी जाएगी तो हम तैयार हैं।

दो साल में गई 10 की जान

- 20 जनवरी 2014 :- बंजरिया गांव के पास मासूम को मार डाला

- 20 जनवरी 2014 :- फरीदपुर टाऊन इलाके के मजदूर के बेटे को बनाया निवाला

- 25 जनवरी 2014 :- अर्सियाबोझ में मासूम को बनाया शिकार

- 2 मई 2014 :- नरायननगला के पास मोहम्मदपुर गांव के मासूम को मार डाला

- 2 मई 2014 :- उनई गांव में बच्ची पर झपटे कुत्ते

- 12 जुलाई 2014 :- भाटिया फार्म में मासूम को मार डाला

- 7 अगस्त 2014 :- नवायल गांव में अशोक बना शिकार

- 3 सितंबर 2014 :- आदलपुर गांव में मासूम को नोंच डाला

- 27 दिसंबर 2015 :- सियाठेरी गांव में 10 साल के बच्चे को बनाया शिकार

- 18 अप्रैल 2016 :- सकलैनी नगर मोहल्ले में पांच साल के बच्चे को मार डाला।

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