सिंचाई विभाग में चीफ इंजीनियर पदों पर प्रोन्नति का आदेश निरस्त

याचियों ने विभाग में सुपरिटेंडिंग इंजीनियरों की प्रोन्नति चीफ इंजीनियर पदों पर किये जाने के सम्बंध में डिपार्टमेंटल प्रोमोशन कमेटी के 8 मार्च 2019 के सिफारिश व 9 मार्च 2019 के आदेश द्वारा चीफ इंजीनियर के पदों पर की गई प्रोन्नतियों को चुनौती दी थी।

फाइल फोटो

लखनऊ: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सिंचाई व जल संसाधन विभाग में चीफ इंजीनियर के पदों पर डीपीसी द्वारा की गई सिफारिश व प्रोन्नति आदेश को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को छह सप्ताह में मेरिट के आधार पर नए सिरे से प्रोन्नति करने का आदेश दिया है।

यह आदेश जस्टिस राजेश सिंह चैहान की बेंच ने नवीन कुमार, ओम प्रकाश पाठक व एक अन्य की ओर से दाखिल याचिकाओं पर पारित किया है। याचियों ने विभाग में सुपरिटेंडिंग इंजीनियरों की प्रोन्नति चीफ इंजीनियर पदों पर किये जाने के सम्बंध में डिपार्टमेंटल प्रोमोशन कमेटी के 8 मार्च 2019 के सिफारिश व 9 मार्च 2019 के आदेश द्वारा चीफ इंजीनियर के पदों पर की गई प्रोन्नतियों को चुनौती दी थी।

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कहा गया था कि विभाग के प्रोन्नति सम्बंधी नियमों के अनुसार प्रोन्नति मेरिट के आधार पर की जानी चाहिए थी। दलील दी गई कि वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट व अन्य दस्तावेजों के आधार पर मार्क्स दिये जाने चाहिये व एक तुलनात्मक मेरिट बनाई जानी चाहिये थी व उक्त मेरिट के आधार पर ही चीफ इंजीनियर के पद पर प्रोन्नति दी जानी चाहिए थी। जबकि ऐसा नहीं किया गया।

उनकी मेरिट ऊपर होने के बावजूद उनके स्थान पर विश्राम सिंह, सुरेश कुमार सचान, शैलेंद्र कुमार व प्रदीप झा को चीफ इंजीनियर, लेवल टू (मेकैनिकल) के पदों पर प्रोन्नति दे दी गई जिनके मेरिट याचियों की तुलना में नीचे थी। राज्य सरकार की ओर से जवाब में कहा गया कि प्रोन्नति का मुख्य आधार भले मेरिट है लेकिन वरिष्ठता को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

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कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि प्रोन्नतियां व डीपीसी की सिफारिश प्रावधानों के अनुरूप नहीं की गईं। कोर्ट ने सिफारिश व प्रोन्नति आदेश को निरस्त करते हुए, सरकार को मेरिट के आधार पर नए सिरे से प्रोन्नतिकरने का आदेश दिया।