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बदलती सरकार के साथ एक बार फिर बदला रोडवेज बसों का रंग! इस बार भगवा

प्रदेश में जल्द ही परिवहन निगम की भगवा रंग में रंगी बसें सड़कों पर फर्राटा भरती नजर आएंगी। निगम बसों को नये कलेवर में पेश करने का खाका करीबन तैयार कर चुका है।

tiwarishalini

tiwarishaliniBy tiwarishalini

Published on 26 Sep 2017 12:46 PM GMT

बदलती सरकार के साथ एक बार फिर बदला रोडवेज बसों का रंग! इस बार भगवा
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लखनऊ: प्रदेश में जल्द ही परिवहन निगम की भगवा रंग में रंगी बसें सड़कों पर फर्राटा भरती नजर आएंगी। निगम बसों को नये कलेवर में पेश करने का खाका करीबन तैयार कर चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इन बसों को हरी झंडी दिखाएंगे। हालांकि बसों के रंग बदलने का सियासी चलन नया नहीं है।

यह सिलसिला वर्ष 2007 से शुरू हुआ। तब बसपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में काबिज हुयी थी। उसके बाद सत्ता में आयी अखिलेश सरकार में बसों को समाजवादी चोला नसीब हुआ। अब जब योगी सरकार सत्ता में है तो अब एक बार फिर बसों का रंग बदलना शुरू हो गया है। दिलचस्प यह है कि खटारा बसों की मरम्मत कराने के बजाय सिर्फ उनके खस्ता हाल ढांचे पर रंग रोगन कर उनको नया रूप दे दिया जाता है।

बहुजन पार्टी ने लाया चलन में

उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों का रंग मानक के अनुसार हरा और पीला ही रहता था। लेकिन जब वर्ष 2007 में उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की सरकार बनी तो साधारण बसों को सर्वजन सुखाय का नाम देकर उनको नीले रंग से रंग दिया गया। पार्टी ने बजट का प्रस्ताव केवल बसों को नीले रंग में भरने के लिए कर दिया। 100 करोड़ रुपये का अनुदान मिला। आज भी कभी-कभी सड़कों पर सर्वजन हिताय नाम की नीले बसें दिख जाती हैं।

सपा ने लोहिया नाम से लाल हरे रंग में बसों को दौड़ा दिया

साल 2012 में जब समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो वे भी पूर्व पार्टी सरकार के नक्शे कदम पर चलना प्रारंभ कर देते हैं। ऐसा लगता है कि जैसे रोडवेज बसों के रंग बदलने की होड़ रही हो। समाजवादी सरकार के लोगों ने समाजवादी लोहिया ग्रामीण बस सेवा के नाम से बसों का नया संचालन चालू कर दिया। वर्ष 2014 में करीब 1,500 लोहिया ग्रामीण बसों को यूपी की सड़कों पर उतार दिया गया।

रोडवेज की बसों को पार्टी के झंडे के लाल और हरे रंग में भरा गया। इसके बाद से अभी तक समाजवादी रंग में रंगी बसों को ही परिवहन निगम चला रहा है। समाजवादी सरकार ने अपने महापुरूषों के नाम पर बसों के नाम रख दिए।

फिर उसी सफर पर है नई सरकार

सूबे में पिछले 6 महीने पहले भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनती है। इसके बाद गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया जाता है। लेकिन सरकार के केवल 3 महीने बीतने के बाद ही परिवहन निगम में बसों को भगवा रंग देने की बातें शुरू हो जाती हैं। इसके बाद जाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह बसों को भगवा रंग में रंगने की अनमुति भी दे देते हैं। जल्द ही यूपी की रोडवेज भगवा व पीले रंग की बसों में यात्री सफर करते नजर आएंगे।

आखिर क्यों है तीनों बार से परिवहन विभाग निशाने पर

ये तीसरी बार है जब रोडवेज बसों के रंग बदल रहे हैं। परिवहन निगम के अधिकारियों से लेकर लोगों में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर हर बार सरकार बनते ही पहले इसका असर रोडवेज बसों पर दिखने लगता है। विभागी अधिकारी बसों के रंग बदलने को लेकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।

बजट का गलत इस्तेमाल

आम लोगों के मुताबिक परिवहन निगम की बसों के रंग बार-बार बदलना ठीक नही है। इन बसों को दूसरी रूपरेखा देने में सरकार मोटी-चौड़ी रकम खर्च करती है। इसलिए बस में सफर करने वाले यात्री पंकज सिंह ने बताया कि जनता के पैसे का हर बार गलत प्रयोग हो रहा है। दूसरे यात्री शालिनी का कहना है कि बसों के रंग बदलने की बजाय उनकी मरम्मत करवाना चाहिए।

अभी 50 बसों को सीएम देंगे हरी झंडी

यूपी की सड़कों पर जल्द ही भगवा रंग वाली बसें दौड़ते हुए दिखेंगी। अभी 50 भगवा बसों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके लिए परिवहन निगम ने कमर कस ली है। लोहिया ग्रामीण सेवा की तर्ज पर वर्तमान सरकार यह योजना बना रही है।

पंडित दीन दयाल उपाध्याय का नाम मिल सकता है बसों को

परिवहन के अधिकारियों के मुताबिक, यूपी की रोडवेज बसों के नाम भी बदले जाने की संभावना है। लोहिया ग्रामीण सेवा बस का नाम बदलकर पंडित दीन दयाल उपाध्याय रखा जा सकता है।

परिवहन मंत्री ने जल्द तैयार करने के लिए आदेश दिए हैं

डॉ राम मनोहर लोहिया केंद्रीय कार्यशाला कानपुर में बसों के निर्माण का कार्य चल रहा है। परिहवन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्वतंत्र देव सिंह ने बसों को समय पर तैयार करने के निर्देश दे चुके हैं।

24 लाख में एक भगवा बस तैयार

भगवा बसों में यात्रियों के लिए विशेष इंतजाम हो रहे हैं। सीटों से लेकर बसों की बॉडी पर विभागी तौर से नजर रही है। एक भगवा बस को तैयार करने में 24 लाख रुपये का खर्चा आ रहा है। बसों को आधुनिक मॉडल पर तैयार किया जा रहा है।

केंद्र से मिले निर्देश के अनुसार बन रही है ये बसें

इन भगवा बसों का निर्माण केंद्र से मिले निर्देश के अनुसार हुआ है। जिस मॉडल को हरी झंडी मिली है उसी पर काम किया गया है। बसों में अनावश्यक रूप से कुछ भी नहीं किया गया है।

परिवहन मंत्री बता रहे हैं बेहतर कदम

परिवहन मंत्री( स्वतंत्र प्रभार) स्वतंत्र देव सिंह ने भगवा बसों के निर्माण को बेहतर बताया है। उनका कहना है कि इस योजना के

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Excellent communication and writing skills on various topics. Presently working as Sub-editor at newstrack.com. Ability to work in team and as well as individual.

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