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UP बोर्ड से हटाई गईं दो कविताएं, सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप

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Published on 16 Aug 2016 2:47 PM GMT

UP बोर्ड से हटाई गईं दो कविताएं, सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप
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लखनऊः समाजवादी पार्टी सरकार ने यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम से श्याम नारायण पांडेय की दो कविताओं को हटा दिया है। सरकार के इस फैसले पर अब हंगामा शुरू हो चुका है। पूर्व आईएएस ऑफिसर ने इसे सरकार की तुष्टिकरण की नीति को जिम्मेदार बताया है।

इन दो कविताओं को हटाया गया

"रण बीच चौकड़ी भर-भर कर,

चेतक बन गया निराला था,

राणाप्रताप के घोड़े से

पड़ गया हवा का पाला था ..."

निर्बल बकरों से बाघ लड़े,

भिड़ गए सिंह मृग–छौनों से।

घोड़े गिर पड़े गिरे हाथी,

पैदल बिछ गए बिछौनों से।

साजिश के तहत हटाने का आरोप

मशहूर कवि श्याम नारायण पांडेय की कविता "चेतक की वीरता" को सांप्रदायिकता की नजर लग गई। जिसकी वजह से यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम के पन्नों में दर्ज चेतक की बहादुरी और हल्दी घाटी के किस्से हटा दिए गए हैं। इस बात पर नाराज़गी जाहिर करते हुए सेवानिवृत्त हो चुके प्रशासनिक अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने सूबे की सरकार पर दोनों ही कविताओ को साजिश के तहत हटाने का आरोप लगाया है।

पूर्व शिक्षा मंत्री मेहबूब अली पर भी लगाया आरोप

अपनी फेसबुक वाल पर लिखते हुए सूर्यप्रताप सिंह ने सरकार के इस फैसले को सांप्रदायिक बताया और कहा कि चलो निंदा करते हैं। "newstrack.com" से हुई बातचीत में सूर्यप्रताप ने इस फैसले को गलत ठहराते हुए सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री मेहबूब अली पर इन दोनों कविताओ को पाठ्यक्रम से हटाने का जिम्मेदार बताया है। सूर्यप्रताप सिंह ने कहा कि यह लड़ाई दो वर्गों के बीच नहीं बल्कि राज्यों पर अपना परचम लहराने की थी ऐसे में इन दोनों कविताओ को सांप्रदयिकता से जोड़ कर देखना मात्र एक खास वर्ग को खुश करना है।

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सरकार के इस फैसले को बताया चुनावी स्टंट

यूपी बोर्ड से मशहूर कवि श्याम नारायण पांडेय की दोनों कविताओ को हटाने को समाजवादी पार्टी का चुनावी स्टंट बताते हुए सूर्यप्रताप सिंह का कहना था की सपा सरकार इन कविताओं को जबरदस्ती सांप्रदायिक बता रही है। यही नहीं सपा प्रमुख पर अपना गुस्सा निकालते हुए आरोप भी लगाया कि स्वतंत्रता की 70वीं वर्षगांठ के मौके पर मुलायम सिंह ने मुगल बादशाह अकबर की तारीफ में कसीदे गढ़े। लेकिन मातृभूमि की लाज बचाए रखने के लिए असंख्य युद्ध लड़ने वाले महाराणा प्रताप और भगत सिंह को भूल गए और न ही किसी अन्य वीर शहीद को याद किया। सूर्यप्रताप सिंह का कहना था कि मुलायम सिंह पहले भी 'पाकिस्तान को छोटा भाई बता चुके हैं।

अधिकारियों ने झाड़ा पल्ला

सूर्यप्रताप के आरोप की पुष्टि करने के लिए जब शिक्षा सचिव जीतेंद्र कुमार से बात की तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का अंदाज़ा नहीं है। साथ ही पाठ्यक्रम का मॉड्यूल तय करने के लिए शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में गठित कमेटी को जिम्मेदार बताते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया। वहीं जब हमने शिक्षा निदेशक अमर नाथ वर्मा से बात करने की कोशिश की तो कई बार फोन करने के बावजूद उनका फोन नहीं उठा।

फेसबुक वॉल से जारी रहेगी जंग

सरकार के इस फैसले से नाराज आ रहे सूर्यप्रताप सिंह ने सरकार से अपने इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बिना सरकार की इजाजत के कोई भी अध्यक्ष पाठ्यक्रम से इतिहास की मशहूर ओ मारूफ जंग का बखान करने वाली कविता को हटाने की हिमाकत नहीं कर सकता। यही वजह है की एनसीआरटी की किताबों में यह कविता होने के बावजूद सपा सरकार ने साजिश के तहत सांप्रदायिक करार देते हुए पाठ्यक्रम से बाहर कर दिया है। उन्होंने कहा कि इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखी इन कविताओं को पाठ्यक्रम में वापस लेने तक फेसबुक वॉल से उनकी सरकार के खिलाफ यह जंग जारी रहेगी।

राष्ट्रीय स्तर तक मुद्दा ले जाने की दी धमकी

यूपी बोर्ड और सरकार के खिलाफ अपनी से वॉल से हल्ला बोल रहे सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की बात करते नजर आ रहे हैं। कुछ ही दिनों में सूबे में चुनावी घमासान होने जा रहा है। ऐसे में सभी पार्टियां इस मुद्दे को कैश कराने का मौका शायद ही जाने दे। वहीं सूबे में दोबारा सरकार बनाने का ख्वाब देखने वाली सपा सरकार अब तक फूंक-फूंक कर कदम रख रही थी। लेकिन चुनाव से पहले उठे कविता के इस मुद्दे ने विरोधियो को हमला करने का मौका दे दिया है। अब यह देखने वाली बात होगी कि गले की हड्डी बन चुके इस फैसले को वापस लेती है या फिर विरोधियों का सामना करने के लिए अपने चुनावी पिटारे से कोई नई रणनीति निकलेगी।

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