Sonbhadra News: सोनभद्र में बिजली कर्मचारियों का फूटा गुस्सा, प्रबंधन को चेतावनी

Sonbhadra News:संघर्ष समिति ने ऊर्जा निगम प्रबंधन पर संवादहीनता, समझौतों की अनदेखी और दमनात्मक कार्रवाई के आरोप लगाए, जेएमसी गठन की मांग उठाई।

Mithilesh Dev Pandey
Published on: 9 Jun 2026 9:25 PM IST
Electricity workers break in Sonbhadra, management warns
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सोनभद्र में बिजली कर्मचारियों का फूटा गुस्सा, प्रबंधन को चेतावनी (Photo- Newstrack)

Sonbhadra News: सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के ऊर्जा निगमों में कर्मचारियों और अभियंताओं के बीच बढ़ता असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पावर कॉरपोरेशन और ऊर्जा निगमों के प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि संवादहीनता, लंबित समझौतों की अनदेखी और कर्मचारियों के खिलाफ जारी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों ने पूरे बिजली महकमे का माहौल खराब कर दिया है। समिति का कहना है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो इसका असर प्रदेश की विद्युत व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि प्रदेश इस समय भीषण गर्मी के दौर से गुजर रहा है और बिजली की मांग लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। ऐसे समय में कर्मचारियों और अभियंताओं का मनोबल बढ़ाने तथा उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इससे कार्यस्थलों पर असंतोष बढ़ रहा है और व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है।

जॉइंट मैनेजमेंट काउंसिल (जेएमसी) के गठन की मांग

समिति ने ऊर्जा निगमों में तत्काल जॉइंट मैनेजमेंट काउंसिल (जेएमसी) के गठन की मांग करते हुए कहा कि प्रबंधन और कर्मचारी संगठनों के बीच संवाद स्थापित करने के लिए यह सबसे प्रभावी मंच है। संघर्ष समिति के अनुसार उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद के दौर में जेएमसी एक मजबूत व्यवस्था के रूप में काम करती थी, जहां कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच बैठकर समस्याओं का समाधान निकाला जाता था। वर्ष 2000 में परिषद के पुनर्गठन के समय हुए लिखित समझौते में भी इसके गठन और संचालन का स्पष्ट प्रावधान किया गया था।

समिति का आरोप है कि समय के साथ इस व्यवस्था को कमजोर कर दिया गया और अब स्थिति यह है कि कर्मचारी संगठनों के साथ नियमित वार्ता तक नहीं हो रही है। संघर्ष समिति ने दावा किया कि पिछले लगभग एक वर्ष से पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने संगठन के साथ कोई औपचारिक बैठक नहीं की है, जबकि कर्मचारियों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मुद्दे लंबित पड़े हैं।

संघर्ष समिति ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों और मुख्य सचिव द्वारा जारी शासनादेश में कर्मचारी संगठनों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने की बात कही गई है, लेकिन ऊर्जा निगमों में इन निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है। कई लिखित समझौते आज भी अमल की प्रतीक्षा कर रहे हैं और कर्मचारियों व अभियंताओं के खिलाफ विभिन्न स्तरों पर दमनात्मक कार्रवाइयां जारी हैं। इससे कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हुआ है और स्वस्थ कार्य संस्कृति को नुकसान पहुंचा है।

समिति ने दी चेतावनी

समिति ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि संवाद और समाधान की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल नहीं किया गया तथा कर्मचारियों के खिलाफ जारी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को वापस नहीं लिया गया तो असंतोष और अधिक गहरा सकता है। संगठन ने प्रबंधन से टकराव की नीति छोड़कर विश्वास, सहयोग और सहभागिता का रास्ता अपनाने की अपील की है।

संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए केवल तकनीकी संसाधन पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच विश्वास और संवाद भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि जॉइंट मैनेजमेंट काउंसिल का तत्काल गठन कर समस्याओं के समाधान का स्थायी और संस्थागत रास्ता तैयार किया जाए, ताकि कर्मचारियों के हितों की रक्षा के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी बेहतर और निर्बाध विद्युत आपूर्ति मिल सके।

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