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भरतनाट्यम में पोस्ट ग्रेजुएशट हैं लक्ष्मी, ऐसे बनी थीं किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर

लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी का जन्म 13 दिसंबर 1978 को महाराष्ट्र के ठाणे में मारुति बाई हॉस्पिटल में ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उन्होंने बचपन में ही डांस की प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली थी।

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 14 Feb 2019 11:26 AM GMT

भरतनाट्यम में पोस्ट ग्रेजुएशट हैं लक्ष्मी, ऐसे बनी थीं किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर
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आशीष पाण्डेय

प्रयागराज: कुंभ 2019 में प्रथम बार अखाड़े के रूप में शामिल हुआ किन्नर अखाड़ा लोगों को खूब आकर्षित कर रहा है। इस अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी हैं । अखाड़ा परिषद से मान्यता न मिलने के बावजूद ऋषि अजयदास ने किन्नर अखाड़े का 13 अक्टूबर 2015 को गठन किया था। इसके बाद बिग बॉस-5 फेम आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को 2 मई 2016 में किन्नर अखाड़े की पहली महामंडलेश्वर बनाया गया। आइए जानते हैं कौन हैं लक्ष्मी।

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भरतनाट्यम में पोस्ट ग्रेजुएशन

- लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी का जन्म 13 दिसंबर 1978 को महाराष्ट्र के ठाणे में मारुति बाई हॉस्पिटल में ब्राह्मण परिवार में हुआ था।

- वह बचपन में डांस की प्रोफेशनल ट्रेनिंग ली थी। उन्होंने भरतनाट्यम में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।

- वह सलमान खान के टीवी शो बिग बॉस के 5वें सीजन में कंटेस्टेंट भी रह चुकी हैं। वे टीवी शो सच का सामना, दस का दम और राज पिछले जनम का में भी दिखाई दे चुकी हैं।

- वह सामाजिक कार्यकर्ता और किन्नर समाज को समानता का अधिकार दिलाने के लिए भी काम करती हैं। उनकी लिखी किताब 'मी हिजड़ा, मी लक्ष्मी' चर्चा का विषय रही थी।

-उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें कबड्डी, खो-खो और टीम इंडिया का क्रिकेट मैच देखना पसंद है। ये भी कहा था कि उनका परिवार ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। परिवार के प्रेम के कारण ही वे आज जिंदगी के हर मोड़ पर संघर्ष कर आगे बढ़ती आई हैं।

ऐसे महामंडलेश्वर बनी थीं

-आमतौर पर महामंडलेश्वर की उपाधि लेने वाले साधु-संत भगवा वस्त्रों में महामंडलेश्वर का पद ग्रहण करते हैं, लेकिन लक्ष्मी हमेशा की तरह सज संवरकर सबके सामने आती हैं।

-भगवा कपड़ों की जगह वह आकर्षक जरी की बार्डर वाली साड़ी पहनती हैं, माथे पर त्रिपुण्ड, जबकि दोनों हाथ चूड़ियों से भरे रहते हैं। उन्हें सभी किन्नरों ने मिलकर महामंडलेश्वर की उपाधि दी थी।

- किन्नर अखाड़े के संस्थापक अजयदास ने बताया था कि गणेश, अंबिका और बहुचरा माता के पूजन के बाद लक्ष्मी के आसन की पूजा की गई थी। फिर उनके पैर धोकर पट्टाभिषेक किया गया था।

- इसके बाद उन्हें किन्नर अखाड़े का तिलक लगाया गया था फिर तीनमुखी रुद्राक्ष की कंठी और वैजयंती माला पहनाकर महामंडलेश्वर घोषित किया गया था।

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बनाए थे 5 पीठाधीश्वर

-महामंडलेश्वर बनने के बाद 5 शहरों से आए किन्नरों को पीठाधीश्वर बनाया गया था। उन्होंने जयपुर की पुष्पा गुरु, बड़ौदा की पायल गुरु, नलखेड़ा की पीतांबरा, नासिक की पायल गुरु और दिल्ली की किन्नर गुरु को पीठाधीश की उपाधी दी थी।

- इनके अलावा 5 किन्नरों को महंत भी बनाया गया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि हमें किसी अखाड़े से मान्यता की जरूरत नहीं, किन्नरों को प्रकृति ने मान्यता दी है। उन्होंने कहा था कि महामंडलेश्वर बनने के बाद भी मैं जैसी थी वैसी ही रहूंगी। कोई ढकोसला नहीं करूंगी।

-अन्य अखाड़ों की अपेक्षा किन्नर अखाड़े में रहती है भारी भीड़ पहली बार अखाड़े के रूप में कुंभ में पहुंचा किन्नर अखाड़ा श्रद्धालुओं की पहली पसंद है। यहां न तो श्रद्धालुओं को कोई रोकने वाला है न ही टोकने वाला है। सभी सहज भाव से जाकर महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और उनके पीठाधीशों से मिलकर आर्शीवाद लेते हैं।

किन्नर अखाड़े में वीआईपी लोगों की भी रहती है भीड़

आम तौर पर मुख्य 13 अखाड़ों में ही वीआईपी लोगों व अधिकारियों का आकर्षण होता था लेकिन पौराणिक मान्यताओं में किन्नर का आर्शीवाद और वर्तमान में नये अखाड़े के रूप में मान्यता के बाद श्रद्धालुओं के प्रति इस अखाड़े के महामंडलेश्वर व पीठाधीशों का सौम्य रवैया आकर्षण का केंद्र है।

किन्नर अखाड़े में सेल्फी का भी है क्रेज

वैसे तो अधिकांश अखाड़ों में धूनी रमाए नागा, तरह तरह के हठ करते साधू दिखते हैं लेकिन किन्न अखाड़े में घुसते ही वहां न तो भगवा रंग की साड़ियां दिखती हैं न ही कोई धूनि रमाए मिलता है।

-वहां आकर्षक श्रृंगार में पूरी साज सज्जा के साथ महामंडलेश्वर व उनके पीठाधीश अपने निर्धारित स्थानों पर बैठे होते हैं जहां भक्त लाइन लगाकर उनसे आर्शीवाद लेने जाते हें और भक्तों की इच्छा पर वहां सेल्फी भी ली जाती है लेकिन भक्तों के मोबाइल पर सेल्फी भक्त नहीं बल्कि महामंडलेश्वर लक्ष्मीण नारायण त्रिपाठी व उनके पीठाधीश खुद लेते हें।

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आर्शीवाद देने के साथ साथ डपट भी लगाती हैं लक्ष्मी

-आम तौर पर शांत, सौम्य किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर सुबह अपने कैम्प में ही चुनिंदा श्रद्धालुओं को आर्शीवाद देती हैं। वहां भक्तों को लाइन में बैठना होता है और यदि किसी ने आगे पीछे किया तो महामंडलेश्वर बिना देरी उसे फटकार कर पीछे जाने का इशारा कर देती हैं।

आर्शीवाद लेने के बाद वीआईपी उन्हें करते हें इनवाइट

किन्नर अखाड़े के महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी का दर्शन कर उनसे आर्शीवाद लेने के बाद श्रद्धालु उन्हें आमंत्रित भी करते हैं जिस पर वह उन्हें आतिथ्य का अवसर देने का आश्वासन देती हैं तो कुछ से खुद ही कह बैठती हें मैं तेरे घर आऊंगी बेटा।

किन्नर अखाड़े में है बाउसंरों का सुरक्षा घेरा

-कुंभ नगरी में पहली बार धर्म और आस्था के संगम का साक्षी बने किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी के शिविर में बाउंसरों की बौछार है। पहली बार किन्नर अखाड़े द्वारा देवत्व यात्रा निकाली गई। ऐसे में इस बार मेले में सबसे ज्यादा क्रेज किन्नर अखाड़े का ही दिखा।

किन्नर अखाड़ा भी राम मंदिर को लेकर तल्ख है

किन्नर अखाड़े की चर्चा इसलिए भी है, क्योंकि वह भी राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में राम मंदिर का समर्थन करने वालों में शामिल हो गया है। बस उसकी एक सीधी सी धारणा है कि राम हमारे ओर सवा सौ करोड़ लोगों के आराध्य हैं उन्हें राजनीति में उलझाएं। सभी को एक होकर राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त करना होगा। किन्नर अखाड़ा ने राम मंदिर का समर्थन करते हुए मोदी सरकार को सत्ता में वापस लाने की अपील की है। किन्नर अखाड़ा की प्रमुख आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी कहते हैं कि कुंभ में हमें मान्यता देना वैदिक-सनातन धर्म के खुलेपन और ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रति इसकी उदारता दिखाता है।

किन्नरों की छवि बदलना है मकसद

महाराष्ट्र के पीठाधीश्वर पायल गुरु का कहना है अखाड़ा इसलिए नहीं बनाया गया है कि हम धर्म के क्षेत्र में कोई दखल चाहते हैं, दरअसल इस अखाड़े का मकसद है किन्नरों की छवि को बदलना। शादी व जन्म के मौके पर जो किन्नरों की बधाई टोली चलती है उनको छोड़कर शेष जो किन्नर रेल या अन्य जगहों पर पैसा मांगते हैं। जिससे छवि खराब होती है, उनको बदलने के लिए प्रेरित करना अखाड़े का मूल उद्देश्य है।

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