मदरसा और संस्कृत विद्यालय की खुली पोल, राष्ट्रगान नहीं सिखाते भारत के यह संस्थान ?

जिस जन गण मन और वन्देमातरम गान के लिए लाखों क्रन्तिकारी देश के नाम पर अपने प्राण न्यौछावर कर दिए, उसी भारत देश में कुछ ऐसे शिक्षण संस्थान भी है जो शायद अपने विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को न ‘जन गण मन’ सिखाते हैं और न ही ‘वन्देमातरम’।

बाराबंकी : जिस जन गण मन और वन्देमातरम गान के लिए लाखों क्रन्तिकारी देश के नाम पर अपने प्राण न्यौछावर कर दिए, उसी भारत देश में कुछ ऐसे शिक्षण संस्थान भी है जो शायद अपने विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को न ‘जन गण मन’ सिखाते हैं और न ही ‘वन्देमातरम’।

यह हम इस लिए कह रहे हैं क्योंकि इन शिक्षण संस्थाओं के गुरुओं को ही यह सब नहीं आता। यह हाल जहाँ मदरसे के शिक्षकों का है वहीँ संस्कृति का दम्भ भरने वाले संस्कृत विद्यालओं के गुरुओं का भी है। नयी पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति की जिम्मेदारी समझाने का दायित्व निभाने वाले शिक्षकों का सामान्य ज्ञान और राष्ट्रप्रेम जानने हम स्वतत्रता दिवस के दिन इन शिक्षण संस्थानों पर पहुँचे।

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कहा जाता है कि एक गुरु बच्चों को शिक्षित कर इस प्रकार का अच्छा नागरिक तैयार करता है जैसे एक कुम्हार गीली कच्ची मिटटी से एक उपयोगी घड़ा तैयार कर देता है। मगर उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद के गुरुओं का हाल सबसे जुदा है यह अपने शिक्षण संस्थानों में अपने प्रथम कर्तव्य का दायित्व ही नहीं निभाते। गुरुओं का प्रथम कर्तव्य अपने शिक्षार्थियों के ऐसे चरित्र का निर्माण कर ऐसा नागरिक बनाना होता है जो देश के प्रति अपने दायित्यों का बोध करा सके। ऐसे ही शिक्षण संस्थानों का रियल्टी चेक करने का हमने बीड़ा उठाया स्वतन्त्रता दिवस के दिन। जो सच्चाई सामने आयी वह हमारे साथ -साथ किसी का भी होश उड़ाने के लिए काफी है।

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सबसे पहले हम जनपद की सिरौली गौस पुर तहसील के तीन मदरसों में जहाँ उनके शिक्षकों के देश प्रेम का सामान्य ज्ञान जानने पहुँचे यहाँ उनसे जन गण मन और वन्देमातरम के गायन का अनुरोध किया गया मगर वन्देमातरम तो छोड़िये ठीक से जन गण मन भी नहीं सुना पाए। जब पूँछा गया कि ठीक से सुना क्यों नहीं पाए तो उन्होंने अपनी साफगोई दिखाते हुए कहा कि उन्हें नहीं आता। एक शिक्षक जब जन गण मन ठीकसे नहीं सुना पाया तो बगल में कड़ी एक छात्रा ने सही सुना कर उनकी गलती का अहसास कराया। कई शिक्षकों ने कहा कि वह कैमरे के सामने घबराहट की वजह से ठीक से सुना नहीं पाते। एक मदरसे में तो झण्डारोहण इतनी देर से हुआ कि यहाँ के शिक्षक भी आगे से ऐसा न होने की बात कहने लगे।

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मामला एकपक्षीय न हो इसके लिए हम पहुँचे श्री सनातन धर्म संस्कृत उच्तर माध्यमिक विद्यालय शिक्षार्थी का कार्य करने वाले पूर्व मध्यमा के छात्र मकरध्वज से जब हमने जन गण मन सुनाने का आग्रह किया तो उनका जवाब सुनकर हम हैरान हो गये। मकरध्वज ने बताया कि वह जन गण मन नहीं गाएंगे क्योंकि इसमें अँग्रेजों का महिमा मण्डन किया गया है। जब उनसे पूंछा गया कि यह उन्हें किसने बताया तो उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर उन्होंने वीडियो देखा है। इसी संस्थान के गुरु शैलेन्द्र से जब वन्देमातरम के गान का अनुरोध किया गया तो उन्होंने बताया इधर-उधर की बात करते हुए गाने से बहाना बना कर चलते बने।

क्लास के सभी बच्चों से जब एक साथ वन्देमातरम का अनुरोध किया गया तो किसी भी बच्चे के अन्दर पूरा वन्देमातरम सुनाने की हिम्मत नहीं हुयी एक आध बच्चों ने हिम्मत भी दिखाई तो वह भी पूरा नहीं सुना सके। संस्कृत विद्यालय की इस दशा के बारे में यहाँ की उप प्रधानाचार्य अनीता कुमारी से जब बात की तो उन्होंने बताया कि हर रोज यहाँ वन्देमातरम सिखाया जाता है मगर कुछ नए लड़के पढ़ने आये हैं उन्ही को नहीं आता। जब उनसे बच्चों की संख्या पूँछी गयी तो उन्होंने बताया कि 130 संख्या है मगर त्यौहार की वजह से बहुतसे लोग आये नहीं हैं।

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इस बारे में जब हमने बाराबंकी के अपर जिलाधिकारी संदीप गुप्ता से पूंछा गया तो उन्होंने कहा कि यह बात अभी -अभी मेरे संज्ञान में आयी है। इसके लिए जिला विद्यालय निरीक्षक को ममले की जाँच दी जाएगी और रिपोर्ट आने पर नियमसंगत कार्यवाई की जायेगी। विद्यालयों का प्रथम कर्तव्य है कि बच्चों के अन्दर राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को सिखाएं और बताएं भी। जिस मदरसे और संस्कृत विद्यालय में ऐसा किया गया है उनके विरुद्ध कार्यवाई की जायेगी।