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SALUTE: बेजुबान खच्चरों के लिए मीडियाकर्मी बने मसीहा, जान पर खेल बचाया

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Published on 21 Jun 2016 1:21 PM GMT

SALUTE: बेजुबान खच्चरों के लिए मीडियाकर्मी बने मसीहा, जान पर खेल बचाया
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लखनऊ: वीवीआईपी हजरतगंज के जागरण चौराहे के पास एक निर्माणाधीन मल्टी स्टोरी बिल्डिंग के बेसमेंट में मंगलवार को 12 खच्चर फंस गए। खच्चरों के मालिक ने काफी देर तक उन्हें निकालने की कोशिश की, लेकिन असफल रहे। वह पुलिस के पास गए, लेकिन उन्होंने खच्चरों की जान बचाना जरूरी नहीं समझा।

जब यह बात मीडिया तक पहुंची तो वहां एक दो मीडियाकर्मी भी पहुंचे। यह मंजर देख वे सकते में आ गए। 6 खच्चर पूरी तरह से मिट्टी में धंस कर तड़प-तड़प के दम तोड़ चुके थे, जबकि बाकी 6 खच्चरों के जीने की आशा हर पल घटती जा रही थी। मौके पर पहुंचे मीडिया कर्मियों ने फोन कर बाकी साथियों को बुला लिया।

जान हथेली पर रख मीडियाकर्मी घुसे दलदल में

मामला बढ़ता देख पुलिस और फायर ब्रिगेड भी मौके पर पहुंच गई, लेकिन संसाधनविहीन फायर ब्रिगेड के जवान वहीं खड़े रहे, तभी एक और खच्चर की सांसे बंधने लगी। अपनी आंखों के सामने एक बेजुबान को दम तोड़ता देख मीडियाकर्मी बिना अपने कैमरों और बाकी सामान की परवाह किए बगैर उस दलदल में घुस गए।

newztrack.com के चीफ फोटो जर्नलिस्ट आशुतोष त्रिपाठी, सीनियर रिपोर्टर वेद प्रकाश के अलावा कई मीडियाकर्मियों ने खच्चरों की जान बचाने के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की, लेकिन अफसोस पूरी जान लगाने के बाद भी वे उसे नहीं बचा पाए। लेकिन बाकी के पांच खच्चरों को इस स्थिति में ला दिया कि उनकी सांसे चलती रहें।

पानी निकलाने के लिए नहीं था मोटर

दूसरी तरफ मीडियाकर्मियों को खुद दलदल में घुसते देख वहां पर मौजूद पुलिसकर्मी और फायर ब्रिगेड के जवान भी हिम्मत करके दलदल में घुस गए। मामला टीवी पर आने के बाद पुलिस भी सक्रिय हुई और वहां से पानी निकलवाने के इंतजाम में जुट गई, लेकिन एक मोटर और पाइप का इंतजाम करने में उन्हें चार घंटे लग गए। इसके बाद नई मोटर आने पर पानी निकालने की प्रक्रिया शुरू हो पाई।

खच्चर दलदल में धंसे थे। उन्हें निकालने में जुटे मीडियाकर्मियों की कोशिशें कामयाब नहीं हो रही थी। पानी निकालने तक खच्चरों को जिंदा रखने का जब और कोई तरीका नहीं सूझा तो उनकी गर्दन को पानी से ऊपर रखने की योजना बनाई गई। सभी मीडियाकर्मियों ने दलदल में खड़े रहकर सभी बेजुबानों की गर्दन उठाए रखी। पानी के कम होने के बाद सभी खच्चरों को निकाला जा सका।

खुल गई इंतजामों की कलई

व्यवस्था के नाम पर करोड़ों अरबों खर्च करने वाले विभाग की कलई इस घटना ने खोल दी। जहां फायर ब्रिगेड कहता रहा कि हमारे पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं हैं जिससे हम नीचे का पानी खींच सकें।

फायर ब्रिगेड के अधिकारियों की मानें तो उन्होंने नगर निगम से जब पानी निकलवाने का प्रबंध करने की बात कही तो उन्होंने भी तुरंत यह काम कर पाने में असमर्थता दिखा दी।

अपने मालिको द्वारा बांधे गए 6 बेजुबान भले ही एक लचर व्यवस्था में मर गए हों, लेकिन उन्होंने तमाम उन सरकारी दावों की कलई खोल दी जिसमें इस बात का दावा किया जाता है कि सरकार, पुलिस और प्रशासन हर आपात स्थिति से निपटने में सक्षम हैं।

आगे की स्लाइड्स में देखें वीडियो और फोटोज ...

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