वह कोई फरिश्ता नहीं, फिर भी पेश की है मानवता और संवेदनशीलता की मिसाल

वाराणसी: बड़े ओहदे पर होने के बावजूद उनके जीने का अंदाज काफी सरल है। समाज में उनका छवि सख्त नहीं , बल्कि सौम्य है। उनके छोटे-छोटे काम लोगों के दिलों में उतर जाते हैं। बीच रास्ते में तड़प रहे बुजुर्ग दंपति के लिए कभी वे भगवान बनकर आते हैं तो कभी ईद की खुशियों के बीच मायूस शबाना के लिए फरिश्ता बन जाते हैं। कुछ ऐसे ही हैं वाराणसी के डीएम योगेश्वर राम मिश्रा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र भी इन दिनों कुछ ऐसा ही कर रहे हैं जो बेहद खास और प्रेरक है। उन्होंने काशीवासियों के सामने मानवता और संवेदनशीलता की ऐसी नजीर पेश की है, जिसे लोग बरसों तक याद करेंगे। अपने काम से उन्होंने दिखा दिया कि आखिर वो क्यों दूसरों से डिफरेंट हैं। अब नए रोल में उन्होंने शिक्षा के स्तर को सुधारने का बीड़ा उठाया है। वे खुद स्कूल में मास्टर साहब बनकर बच्चों की जिंदगी संवारने में जुट गए हैं।
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डीएम ने स्कूल को लिया गोद
पिछले दिनों डीएम योगेश्वर राम ने जिस स्कूल को गोद लिया उसकी हर ओर चर्चा है। डीएम ने जब से अर्दलीबाजार स्थित एलटी कॉलेज परिसर में बने पूर्व माध्यमिक और प्राथमिक स्कूल को गोद लिया, यहां के छात्रों की किस्मत ही पलट गई है। कुछ दिनों में ही स्कूल में रौनक छा गई है। स्कूल की इमारतों को चमकाने का काम शुरू हो गया है।

परिसर को हरा भरा करने के लिए वन विभाग की टीम लग गई है। शिक्षा विभाग से जुड़े अफसर इसका हाल जानने में जुट गए हैं। डीएम प्रत्येक शनिवार को यहां आते हैं और लगभग एक घंटे तक छात्रों को पढ़ाते हैं। बच्चों से लगाव के कारण ही डीएम ने इस स्कूल को गोद लिया है। ऐसा नहीं है कि डीएम सिर्फ एक शिक्षक की भूमिका में रहते हैं, बल्कि बच्चों से जुड़ी हर समस्या को वे समझते हैं। पिछले दिनों जब वे स्कूल पहुंचे तो उन्होंने ड्रेस न मिलने की सूचना का तुरंत संज्ञान लिया और तत्काल प्रधानाचार्य को ड्रेस वितरण कराने का निर्देश दिया।

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बच्चों को दिया अनोखा टास्क
डीएम ने बच्चों से कहा कि आप सभी विद्यालय परिसर में एक-एक पौधे लगाएं और उसकी देखभाल करें। लगाए गए पौधों पर संबंधित छात्र/छात्राओं के नाम की पट्टिका लगाई जाएगी और पौधों के सेवा की जिम्मेदारी संबंधित छात्रों की होगी ताकि ये पौधे वृक्ष बन सकें। उन्होंने विद्यालय परिसर की साफ-सफाई के लिए प्राचार्य को निर्देश दिया। डीएम ने चोलापुर ब्लॉक के कैथी गांव स्थित प्राइमरी पाठशाला का भी शनिवार को औचक निरीक्षण किया। इस दौरान सभी शिक्षक क्लास में मौजूद मिले। शिक्षक जकाउल्लाह ने बताया कि स्कूल में 234 बच्चे हैं। प्राचार्य के बारे में पूछने पर शिक्षक ने बताया कि वे 12 दिन से छुट्टी पर हैं। विद्यालय में नए बच्चों को ड्रेस नहीं बंटने पर नाराजगी जताते हुए डीएम ने तत्काल ड्रेस उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

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स्कूल में छात्रों की संख्या में इजाफा
डीएम के स्कूल गोद लेने से स्कूल के टीचर भी उत्साहित हैं। महिला टीचर अर्चना बताती हैं कि डीएम के स्कूल  गोद लेने के बाद स्कूल में बच्चों का एडमिशन बढ़ा है। पिछले साल प्राथमिक स्कूल में सिर्फ 45 बच्चे थे जो अब बढक़र 60 हो गए हैं। आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और बढऩे की उम्मीद है। टीचरों के मुताबिक स्कूल की बुनियादी समस्याएं भी दूर होने लगी हैं।

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ईद पर शबाना को दीं खुशियां
डीएम योगेश्वर राम मिश्र की दरियादिली की एक नजीर ईद पर भी दिखी थी। ईद के एक दिन पहले वाराणसी के मंडुवाडीह इलाके के शिवदासपुर की रहने वाली शबाना भी और बच्चों के तरह ईद धूमधाम से मानना चाहती थी, लेकिन वह उदास थी क्योंकि उसके मां-बाप का साया 2004 में ही सर से उठ चुका था। उदास शबाना ने डीएम योगेश्वर राम मिश्रा को एक भावुक मेसेज भेजा। मैसेज को पढ़ते ही डीएम योगेश्वर राम ने तुरंत एसडीएम सदर सुशील कुमार गौड़ को बुलाया और उनकी ओर से शबाना, उसकी नानी और छोटे भाई को नए कपड़े, मिठाइयां और ईद की सेवई के लिए तुरंत पैसे पहुंचाने के लिए कहा। इसके पहले भी गंगा घाट से लौटते वक्त डीएम ने रथयात्रा इलाके में घायल पड़े बुजुर्ग दंपति की मदद की थी। बुजुर्ग को अपनी कार से अस्पताल पहुंचवाया और खुद ऑटो से घर गए।