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Uttarakhand: उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए नई नियमावली जारी, नामांकन सीमा बनी बड़ा मुद्दा
Uttarakhand: उत्तराखंड सरकार ने राज्य में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता और नवीनीकरण को लेकर नई नियमावली जारी कर दी है।
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Uttarakhand: उत्तराखंड सरकार ने राज्य में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता और नवीनीकरण को लेकर नई नियमावली जारी कर दी है। इस नए प्रावधान के अंतर्गत अब संस्थानों को मान्यता बनाए रखने के लिए कई सख्त शर्तों का पालन करना होगा। नियमावली में सबसे प्रमुख शर्त यह है कि किसी भी संस्थान में गैर-अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों का नामांकन 15% से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
सरकार के इस फैसले के बाद शिक्षा क्षेत्र में नई बहस शुरू हो गई है, क्योंकि यह नियम मदरसों को छोड़कर अन्य अल्पसंख्यक संस्थानों पर भी लागू होगा। सिख, ईसाई, बौद्ध, पारसी और जैन समुदाय द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों में सामान्यतः गैर-अल्पसंख्यक छात्रों की संख्या पहले से ही अधिक रहती है, ऐसे में यह प्रावधान उनके लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि 1 जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड को समाप्त कर दिया जाएगा। इसके स्थान पर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया है, जो सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की मान्यता और निगरानी करेगा।
नई व्यवस्था के तहत सभी इच्छुक संस्थानों को प्राधिकरण के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन करना अनिवार्य होगा। आवेदन के साथ निर्धारित शुल्क का भुगतान भी ऑनलाइन करना होगा। इसके अलावा मान्यता नवीनीकरण के लिए संस्थानों को एक घोषणा पत्र देना होगा, जिसमें यह प्रमाणित करना होगा कि पिछले तीन शैक्षणिक वर्षों में प्रत्येक वर्ष गैर-अल्पसंख्यक छात्रों का नामांकन 15 प्रतिशत से अधिक नहीं रहा है।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस नियम से अल्पसंख्यक संस्थानों के संचालन और प्रवेश नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वहीं सरकार का कहना है कि यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और मानकीकरण सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
फिलहाल इस नियमावली को लेकर विभिन्न शैक्षणिक संगठनों और समुदायों में चर्चा तेज हो गई है। आने वाले समय में इसके प्रभाव और चुनौतियों को लेकर और स्पष्टता सामने आने की उम्मीद है।


