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चीन में वैक्सीन की मची है मारामारी

चीन की कंपनियों ने कोरोना की वैक्सीन बना लेने का न सिर्फ दावा किया है बल्कि इन वैक्सीन को खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा अभी जा रहा है। इन वैक्सीनों की प्रमाणिकता, सुरक्षा और प्रभाविता के बारे में संदेह हैं।

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NewstrackBy Newstrack

Published on 27 Oct 2020 6:09 AM GMT

चीन में वैक्सीन की मची है मारामारी
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चीन में वैक्सीन की मची है मारामारी (Photo by social media)
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लखनऊ: कोरोना वायरस दुनिया भर में फैलाने वाला चीन अब अपने यहाँ के बारे में झूठ प्रचार कर रहा है कि उसके यहाँ कोरोना वायरस पर पूरा कंट्रोल हो गया है। असलियत ये है कि चीनी लोग कोरोना से बुरी तरह आतंकित हैं। और इसी वजह से बिना अप्रूवल वाली वैक्सीनों के लिए मारामारी मची हुई है।

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वैक्सीन को खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा अभी जा रहा है

चीन की कंपनियों ने कोरोना की वैक्सीन बना लेने का न सिर्फ दावा किया है बल्कि इन वैक्सीन को खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा अभी जा रहा है। इन वैक्सीनों की प्रमाणिकता, सुरक्षा और प्रभाविता के बारे में संदेह हैं। इसीलिए तमाम देश इन वैक्सीनों को लेने से साफ़ इनकार कर चुके हैं।

चीन में लोगों में कोरोना का इतना भय है कि अप्रमाणिक वैक्सीनों को खरीदने और लगवाने के लिए लोग एक शहर से दूसरे शहर तक की दौड़ लगा रहे हैं।

सीएनएन की एक खबर में बताया गया है कि किस तरह एनी कू नाम की एक महिला को जब पता चला कि चीन के पूरब में स्थित झेजियांग प्रान्त के यीवू शहर में कोरोना की वैक्सीन बिक रही है तो वो 655 किलोमीटर की दूरी तय करके वैक्सीन लगवाने चली गयी। यीवू शहर में वैक्सीन मिल रही है इसके बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गयी थी बल्कि लोकल मीडिया में प्रकाशित लेखों में ऐसी बात बताई गयी थी।

corona corona (Photo by social media)

अर्जेंट जरूरत वालों के लिए वैक्सीन

चीन में यीवू जैसे कई शहरों में कोरोना की वैक्सीन बेची जा रहीं हैं जबकि इन वैक्सीनों का अभी क्लिनिकल ट्रायल चल ही रहा है। जियाशिंग शहर में 15 अक्टूबर को घोषणा की गयी कि जिन नागरिकों को अर्जेंट जरूरत है उनको वैक्सीन बेची जायेगी। जियाशिंग सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ने अपने आधिकारिक वी चैट अकाउंट में 15 अक्टूबर को पोस्ट किया कि स्कोरोना वैक्सीन की दो खुराक के लिए 60 डालर की कीमत ली जायेगी।

यीवू के अस्पतालों का अकहना है कि वे प्रायोगिक वैक्सीन उन लोगों को दे रहे हैं जिनको अर्जेंट विदेश यात्रा करनी है। वैसे यीवू सरकार ने प्रायोगिक वैक्सीन लांच करने के बारे में कोई अधिकारिक घोषणा नहीं की है। जिन्शियांग और यीवू के अधिकारियों ने ये भी स्पष्ट नहीं किया है कि एक प्रायोगिक वैक्सीन के लिए अर्जेंट जरूरत के दायरे में आखिर क्या आता है? वैक्सीन की जरूरत के लिए क्या सबूत देना होगा और बीजिंग या शंघाई जैसे बड़े महानगरों की बजाय जिन्शियंग और यीवू जैसे छोटे शहरों में इमरजेंसी डोज़ उपलब्ध करने की इजाजत क्यों दी गयी है?

सरकारी मीडिया कर रहा इनकार

एक ओर जनता को वैक्सीन मिल रही है दूसरी तरह चीन का मीडिया इस बात से इनकार कर रहा है। सरकारी टेबलायड ‘ग्लोबल टाइम्स’ में प्रकाशित एक लेख में इस बात से इनकार किया गया है कि कोरोना वैक्सीन सबके लिए उपलब्ध है। लेकिन लोगों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। लोग ट्रेनों और फ्लाइट्स से यीवू और जिन्शियांग पहुँच रहे हैं। झेजियांग प्रान्त में कई अन्य शहर कोरोना वैक्सीन की उपलब्धता की घोषणा कर रहे हैं और इस कड़ी में शाओशिंग शहर ने ऐलान किया है कि इन सर्दियों में कोरोना की वैक्सीन लोगों को मिलने लगेगी।

अप्रूवल मिला ही नहीं

दिसंबर 2019 में कोरोना का प्रकोप शुरू होने के बाद से चीन ने लॉकडाउन, व्यापक टेस्टिंग और लोगों की सघन ट्रैकिंग-ट्रेसिंग से संक्रमण को कंट्रोल कर लिया है। कम से कम ऐलानिया तौर पर यही कहा जाता है। अब चीन दुनिया में अपनी धमक बनाने और अमेरिका को नीचा दिखाने के लिए कोरोना की वैक्सीन लांच करने की जीतोड़ कोशिश में लगा हुआ है। चीनी प्रेसिडेंट शि जिनपिंग देश के वैज्ञानिकों को लगातार पुश कर रहे हैं कि वे जल्दी से जल्दी वैक्सीन बना दें।

20 अक्टूबर को विज्ञानं और टेक्नोलॉजी मंत्रालय के एक अधिकारी तियन बोगुओ ने कहा था कि ट्रायल के तहत 60 हजार लोगों को वैक्सीन लगी जा चुकी है और कोई गंभीर साइड एफेक्ट सामने नहीं आया है। वैसे किसी भी तरह का अप्रूवल मिलने से पहले ही चीनी सरकार हाई प्रोफाइल पोजीशन के लोगों या जोखिम के दायरे वाले लोगों को वैक्सीन लगाने के काम में तेजी से लगी हुई है।

जून में ही सरकार ने कैन सीनो बायोलोजिक्स की प्रायोगिक वैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी दे दी थी

एक तरफ अमेरिका जैसे देशों में दवा निर्माता कम्पनियाँ और सरकारें वैक्सीन के मामले में बहुत सावधानी से आगे बढ़ रही हैं वहीं चीन कोई सावधानी नहीं बरत रहा है। जून में ही सरकार ने कैन सीनो बायोलोजिक्स की प्रायोगिक वैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी दे दी थी। इसके तीन महीने बाद ही सीनोफार्म कम्पनी की वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी दे दी गयी। इसी महीने चाइना नेशनल बायोटेक ग्रुप के अध्यक्ष यांग शिओमिंग ने कहा था कि उनकी वैक्सीन साढ़े तीन लाख लोगों को लगाई जा चुकी है। ध्यान देने वाली बात है कि ये सभी वैक्सीन किसी ट्रायल के तहत नहीं लगाई गयी है।

पूरी आबादी का टेस्ट

शिनजियांग प्रांत में कोरोना वायरस के कुछ नए मामले सामने आने के बाद चीन ने 47 लाख की आबादी वाले पूरे शहर का टेस्ट किया है। अब तक 138 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन इनमें कोरोना वायरस के कोई लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं। दरअसल, काश्गर में कपड़े की फैक्ट्री में काम करने वाली एक महिला में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी।

महिला में महामारी के कोई लक्षण नहीं था, लेकिन नियमित जांच के दौरान पाया गया कि वह कोरोना वायरस से संक्रमित है। यह चीन में पिछले 10 दिनों में सामने आया पहला मामला था। उसके बाद पूरे शहर की टेस्टिंग का सिलसिला शुरू हुआ। ऐहतियात के तौर पर काश्गर शहर में स्कूलों को बंद कर दिया गया है। साथ ही कोरोना टेस्ट में नेगेटिव होने की रिपोर्ट लिए बिना किसी को भी शहर छोड़ने की इजाजत नहीं है।

corona corona (Photo by social media)

चीन कोरोना वायरस संक्रमण को काबू करने में अभी तक सफल नजर आ रहा है, लेकिन नियमित अंतराल पर कुछ मामले सामने आते रहते हैं। यहां बिना लक्षण वाले संक्रमितों को आधिकारिक सूची में शामिल नहीं किया जाता। आधिकारिक तौर पर चीन में 85,810 लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है और 4,634 लोगों को महामारी के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी है।

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इससे पहले इसी महीने चीन ने पांच दिनों के भीतर 90 लाख लोगों का कोरोना वायरस टेस्ट किया था। किंगडाओ शहर में विदेश से आने वाले कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करने वाले अस्पताल से जुड़े लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। इस अस्पताल से जुड़े 12 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए थे, जिनमें से छह में कोई लक्षण नहीं थे। इसके बाद प्रशासन ने पूरे शहर का टेस्ट करने का फैसला किया।

इससे पहले मई में 10 दिनों में पूरे वुहान शहर की आबादी का टेस्ट किया था। इन 10 दिनों के भीतर लगभग 90 लाख लोगों का कोरोना वायरस टेस्ट किया गया था।

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