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Kaushambi News: “कौशांबी में भांग दुकानों की कमाई पर सवाल, 1.64 करोड़ राजस्व को लेकर उठी बहस
Kaushambi News: कौशांबी में भांग दुकानों से 1.64 करोड़ राजस्व को लेकर सवाल, 27 दुकानों की आय-खर्च और आबकारी विभाग की भूमिका पर उठी चर्चा
Kaushambi News: उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में भांग की दुकानों से होने वाली आय और सरकार को जमा किए जाने वाले राजस्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जिले में आबकारी विभाग के तहत मंझनपुर क्षेत्र में 9, सिराथू क्षेत्र में 11 और चायल क्षेत्र में 7 भांग की दुकानों का संचालन हो रहा है।
इस तरह जिले में कुल 27 दुकानों की नीलामी हुई है, जिनसे सरकार के लिए 1 करोड़ 64 लाख 82 हजार रुपये का राजस्व निर्धारित किया गया है।इसी को लेकर कुछ लोगों द्वारा सवाल उठाए जा रहे हैं कि यदि भांग की बिक्री सीमित मात्रा में होती है तो इतनी बड़ी राजस्व राशि और अन्य खर्चों की भरपाई किस प्रकार की जाती है। यह मुद्दा स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
कर्मचारियों और अन्य खर्चों को लेकर भी उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन दुकानों के संचालन में बड़ी संख्या में कर्मचारी भी कार्यरत रहते हैं। दुकानों पर तैनात कर्मचारियों के वेतन, दुकानों और गोदामों के किराये तथा अन्य प्रशासनिक खर्चों को जोड़कर देखा जाए तो कुल व्यय काफी अधिक दिखाई देता है।
इसी आधार पर कुछ लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि भांग कारोबार से होने वाली वास्तविक आय और कुल खर्च के बीच संतुलन किस प्रकार बनाया जाता है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
आमदनी के स्रोतों की जांच की मांग
इस पूरे मामले को लेकर कुछ लोगों ने आमदनी के स्रोतों की जांच कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि किसी प्रकार की शंका है तो संबंधित विभागों द्वारा तथ्यों के आधार पर जांच कराई जानी चाहिए ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।स्थानीय स्तर पर यह भी मांग की जा रही है कि भांग दुकानों की आय, खर्च और राजस्व भुगतान से जुड़े आंकड़ों का परीक्षण कराया जाए, जिससे किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
आबकारी विभाग की भूमिका पर भी उठे सवाल
मामले को लेकर कुछ लोगों ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता की आशंका है तो विभाग को स्वयं आगे आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।हालांकि अब तक इस मामले में किसी जांच या कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
अधिकारियों से संपर्क का प्रयास
बताया गया कि इस विषय पर जिला आबकारी अधिकारी और आबकारी आयुक्त से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। ऐसे में मामले पर विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आ पाया है।
फिलहाल यह पूरा मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इस संबंध में स्पष्ट जानकारी तथा आवश्यक जांच की मांग कर रहे हैं।


