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भारत से हारा है चीन: उसे याद रखना चाहिए यह पुराना सबक

योगेश मिश्र
चीन भारत के साथ व्यापार को कितना महत्व देता है, उसे नाथू ला के नवीनतम घटना से भी समझा जा सकता है। डोकलाम मुद्दे पर भारत पर दबाव डालने के लिए चीन ने नाथू ला दर्रे से मानसरोवर यात्रा रोकी। लेकिन व्यापार बिल्कुल नहीं। इस तरह अतीत की सामरिक एवं आर्थिक व्याख्याएं  बताती हैं कि डोकलाम से चीन ही पीछे हटेगा।

मज़दूरों की मज़बूरी और सत्ता का टैलेंट हंट कार्यक्रम

ज्योतिकुमारी ने चाहे अपने आगे के भविष्य को लेकर अभी कुछ भी तय नहीं किया हो कि वह गाँव में ही रहकर पढ़ना चाहती है या सायकिलिंग महासंघ की पेशकश को स्वीकारना चाहती है पर वे तमाम लोग जो अलग-अलग जगहों पर बैठे हुए हैं, उसके बारे में अपने तरीक़ों से सोच में जुटे हुए हैं।

‘आस्था के प्रश्न तथा अम्फान एवं कोरोना का साहचर्य’

डॉ कौस्तुभ नारायण मिश्र
सब कुछ उसी दैवी सत्ता या प्रकृति या सृष्टि के नियमों पर छोड़कर समय की प्रतीक्षा करने के अलावा कुछ नहीं बचता। हम प्रकृति का और प्रकृति को संचालित करने वाली शक्तियों का धन्यवाद एवं आभार प्रकट करते हैं और प्रकट करना चाहिये, यही मानवीय वृत्ति है।

प्रवासी मजदूरों की दुविधा

डा. वेद प्रताप वैदिक
इसमें शक नहीं कि करोड़ों मजदूरों के भरण-पोषण को सबसे पहली प्राथमिकता मिलनी चाहिए लेकिन शहरों में चल रहे उद्योग-धंधों को भी किसी तरह चालू किया जाना चाहिए। इसका भी कुछ पता नहीं कि जिन मजदूरों को एक बार शहर की हवा लग गई है, वे गांवों में टिके रहना पसंद करेंगे या नहीं ?

हमारे हनुमान तो इस समय प्रार्थनाओं में ही उपस्थित हैं

इस बीच निहित स्वार्थ वाले लोग सत्ताओं की साँठगाँठ से महँगे सेनिटायज़र और नक़ली वेंटिलेटर बेचते रहेंगे और ड्रग ट्रायल भी चलते रहेंगे।कभी-कभी शक भी होने लगता है कि महामारी की गम्भीरता और उसके इलाज को लेकर जनता को सबकुछ ठीक-ठीक बताया भी जा रहा है या नहीं ?

अब आया है चीन की गर्दन में अंगूठा डालने का वक्त

आरके सिन्हा
भारत को कूटनीति से ही काम लेना पड़ेगा। हम नेपाल को चीन या पाकिस्तान की श्रेणी में रखने की भूल भी नहीं कर सकते। हालांकि कुछ अति उत्साही मित्र कह रहे हैं कि भारत को चाहिए कि वह नेपाल को मजा चखा दे। यह एक गलत सोच है।