Breaking News

COVID-19

Country Total Cases Deaths
India 173763 4971

Live: मन की बात में बोले पीएम मोदी: देश अब खुल गया है, ज्यादा सतर्क रहें

देश में, सबके सामूहिक प्रयासों से कोरोना के खिलाफ लड़ाई बहुत मजबूती से लड़ी जा रही है। हमारी जनसंख्या ज़्यादातर देशों से कई गुना ज्यादा है, फिर भी हमारे देश में कोरोना उतनी तेजी से नहीं फैल पाया, जितना दुनिया के अन्य देशों में फैला।

अतीत के पन्नों से

पत्रकार के लिए कोई हीरो नहीं होता है| वह स्वयं किसी से कम भी नहीं होता। वह नायक सर्जाता है , खलनायक को भी| वह उस नास्तिक की भांति है जिसके आराध्य इष्टदेव भी हुआ करते हैं|

कितनी गहरी हैं सनातन संस्कृति की जड़ें

डॉ. नीलम महेंद्र
इस तरह जब हमें यह प्रमाण मिलते हैं कि रूस से लेकर रोम तक और इंडोनेशिया से लेकर अफ्रीका तक के देशों के इतिहास में कभी सनातन हिंदू धर्म वहाँ की संस्कृति का हिस्सा थी और आज जब उसके निशान वियतनाम में हाल ही में मिले शिवलिंग के रूप में सम्पूर्ण विश्व के सामने आते हैं तो गर्व होता है स्वयं के भारत की सनातन संस्कृति का हिस्सा होने पर।

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विशेष-एक थे सौरभ सिंह

योगेश मिश्र
इसलिए हिंदी पत्रकारिता दिवस पर जो लोग हम पर भरोसा मान कर हमारा लिखा पढ़ते हैं यानी हमारे सुधि पाठक हैं। जो हमारे सहयोगी हिंदी पत्रकारिता में काम करने वाले देश भर के साथी हैं, दोनों से दो बार क्षमा मांगने का अवसर है।

चीन की बौखलाहट का कारण

डा. समन्वय नंद
इसलिए इस तरह के हरकतों से वह मनोवैज्ञानिक तरीके से भारत पर दबाव डालना चाहता है । लेकिन चीन को अब यह समझ लेना होगा कि 1962 से अब तक चीन के पीली नदी व भारत के गंगा नदी में काफी पानी बह चुका है । अब 2020 है । वर्तमान का भारत 2020 का भारत है 1962 का भारत नहीं है ।

तो हमारी ट्रेनें उम्रदराज होने के चलते भूल गयीं अपनी राह !!

ज्ञानेंद्र शुक्ला
तमाम पहलूओँ पर गौर करने से ये तय हो जाता है कि कई दर्जन ट्रेनों के रास्ते से भटकने की गुंजाईश नहीं हो सकती है। हां रूट तय करने के फैसले को लेकर सवाल उठ सकते हैं, कम समय- कम लागत वाला रूट क्यों नहीं निर्धारित किया गया इसे लेकर भी सवाल पूछे जा सकते हैं।

वीर सावरकर पर उठाये गये सवालों के जवाब

योगेश मिश्र
सावरकर प्रथम राष्ट्रभक्त थे जिन्हें अंग्रेजी सत्ता ने 30 वर्षों तक जेलों में रखा । आजादी के बाद 1948 में नेहरु सरकार ने महात्मा गाँधी की हत्या की आड़ में लाल किले में बंद रखा। पर आरोप झूठे पाए जाने के बाद ससम्मान रिहा कर दिया। देशी-विदेशी दोनों सरकारों को उनके राष्ट्रवादी विचारों से डर लगता था।