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लॉक डाउन प्रतिबंधों में अब किस प्रजातांत्रिक छूट की प्रतीक्षा है ?

श्रवण गर्ग
हम चाहें तो इस बात को लेकर भी चिंतित हो सकते हैं कि एक लम्बे समय तक घरों में बंद रहते हुए शेष विश्व से अलग कर दिए गए हैं।हमारी लड़ाई जबकि एक वैश्विक महामारी से है।

कोरोना काल- जो बने बेसहाराओं का सहारा

आरके सिन्हा
कोरोना वायरस से पैदा हुए हालातों के चलते दो तरह के लोग सामने आए हैं। पहले, वे जो संक्रमण को रोकने के लिए जारी लॉकडाउन को तोडने में पीछे नहीं रहे। यह करके उन्होंने बताना चाह कि वे सरकार से ऊपर हैं । दूसरे, जो इस कठिन काल में बेबस लोगों की मदद को आगे आए।

तकलीफ़ें हवाओं में और सलाहें ख़ंदकों में शरण लेने की !

श्रवण गर्ग
आश्चर्य प्रकट किया जा सकता है कि जिस समय हम कोरोना से मरने वालों की बढ़ती हुई तादाद ,दो महीनों से ऊपर के लॉक डाउन के अपार कष्टों, करोड़ों बेरोज़गारों और प्रवासी मज़दूरों की पीड़ाओं और उनकी टाली जा सकने वाली मौतों के बोझ तले दबे हुए हैं, क्या इन विषयों को उठाने का यही सही समय है ! और यह भी कि सब कुछ एक ही समय में कैसे उपस्थित हो सकता है ?

मोदी-वर्ष पर कोरोना बादलः क्या रही सरकार की तीसरी गलती

डा. वेद प्रताप वैदिक
आगा-पीछा सोचे बिना धड़ल्ले से कुछ भी कर डालने के नतीजे सामने हैं। तालाबंदी तीसरे महिने में प्रवेश कर गई है, कल कारखाने, दुकानें, दफ्तर ठप्प हैं, प्रवासी मजदूरों की करुणा-कथा बदतर होती जा रही हैं, हताहतों की संख्या बढ़ती चली जा रही है।

अतीत के पन्नों से

के विक्रमराव
पत्रकार के लिए कोई हीरो नहीं होता है| वह स्वयं किसी से कम भी नहीं होता। वह नायक सर्जाता है , खलनायक को भी| वह उस नास्तिक की भांति है जिसके आराध्य इष्टदेव भी हुआ करते हैं|

कितनी गहरी हैं सनातन संस्कृति की जड़ें

डॉ. नीलम महेंद्र
इस तरह जब हमें यह प्रमाण मिलते हैं कि रूस से लेकर रोम तक और इंडोनेशिया से लेकर अफ्रीका तक के देशों के इतिहास में कभी सनातन हिंदू धर्म वहाँ की संस्कृति का हिस्सा थी और आज जब उसके निशान वियतनाम में हाल ही में मिले शिवलिंग के रूप में सम्पूर्ण विश्व के सामने आते हैं तो गर्व होता है स्वयं के भारत की सनातन संस्कृति का हिस्सा होने पर।