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सेना से राजनीति में आए थे जसवंत

जसवंत सिंह उन गिने-चुने राजनेताओं में से थे जिन्हें भारत के विदेश, वित्त और रक्षा मंत्री बनने का गौरव प्राप्त हुआ था। 1966 में वह पहली बार राजनीति के मैदान में उतरे और राजस्थान के दिग्गज नेता भैरो सिंह शेखावत की छत्रछाया में आगे बढ़ते हुए 1980 में पहली बार राज्यसभा सांसद बने।

जमानिया विधायक सुनीता सिंहः राजनीति में न आती तो वृक्षारोपण करती

भाजपा विधायक सुनीता सिंह
भाजपा विधायक सुनीता सिंह ने बताया कि अभी मेरे क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं एवं बिजली के जर जर तारों की समस्या सबसे बड़ी है। इन क्षेत्रों मे मेरे प्रयास जारी हैं। मुख्यमंत्री से भी इन विषयों पर काफी चर्चा हुई है और उन्होंने विश्वास दिलाया है कि इन पर जल्द ही कुछ निर्णय होगा।

मुहम्मदाबाद से भाजपा विधायक अल्का रायः राजनीति में न आती तो गृहिणी होती

विधायक अलका राय
अल्का राय ने विधायक निधि के बारे में बताया की सरकार द्वारा दिया गया विधायक निधि क्षेत्र में लगाने के लिए एक धनराशि है। उन्होंने कहा जनता की जैसे सेवा हो सके चाहे स्कूल हो, अस्पताल हो, सड़क हो या खड़ंजा हो विधायक निधि खर्च करनी चाहिए। यह जनता की निधि है।

सिद्धार्थनगर शोहरतगढ़ के विधायक चौधरी अमर सिंहः राजनीति में न आते तो खेती करते

चौधरी अमर सिंह
मैं कहना चाहूंगा कि निचले स्तर पर अगर ज़िला पंचायत ओर क्षेत्र पंचायत में भ्रष्टाचार है तो ये चुनाव सीधे जनता से ही करा दिये जाएं ताकि भ्रष्टाचार खत्म हो जाये। ताकि भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा के तहत चुनकर आने वाला निर्भीक हो कर अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करें।

कानपुर देहात सिकंदरा से विधायक अजित पालः युवाओं को तकनीकी दक्षता का संकल्प

विधायक अजित पाल
वह कहते हैं कि बचपन से ही वह मेधावी, अनुशासित तथा चरित्रवान छात्र रहे हैं। समाज को अपने साथ लेकर निरंतर आगे बढ़ते हुए अपने पिता स्वर्गीय मथुरा प्रसाद पाल के नक्शे कदम पर चलते हुए ‘सबका साथ सबका विकास’ के संकल्प को पूरा करने के लिए अत्यधिक उत्साहित हैं।

डुमरियागंज के विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंहः हिंदू युवा वाहिनी कार्यकर्ता से की शुरुआत

विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह
गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ महाराज की प्रेरणा से योगी आदित्यनाथ के दिशा निर्देश पर मैं डुमरियागंज विधानसभा में चुनाव लड़ने आया। सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठन हिंदू युवा वाहिनी से जुड़े रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

छानबे के विधायक राहुल प्रकाश कोलः राजनीति में नहीं आता तो वकालत करता

विधायक राहुल प्रकाश कोल
विधायक राहुल प्रकाश कोल ने कहाकि लोगों की सोच गलत है। उन्होंने कहा जो प्रत्याशी जनता के बीच में रहता है, जनता की सेवा करता है। उसके चुनाव में धनबल और बाहुबल काम नहीं आएगा। जनता के साथ किया गया संघर्ष ही चुनाव के दौरान काम आता है।

कटरा बाजार के भाजपा विधायक बावन सिंहः 51 साल से परिवार पर भरोसा

विधायक बावन सिंह
विधायक बावन सिंह का कहना है कि जनता की सेवा ही मेरी जिंदगी है। लोगों ने मुझ पर जो भरोसा जताया है, मैं उनका विश्वास कभी टूटने नहीं दूंगा। क्षेत्र के विकास के लिए जो भी संभव होगा उसे पूरा करेंगे।

सिधौली के बसपा विधायक डॉ. हरगोविंद भार्गवः प्रगति में गरीबी लाचारी बाधा नहीं

विधायक डॉ. हरगोविंद भार्गव
अधिकारियों पर हनक धमक दिखाना मेरी फितरत में नहीं है। सभी से प्यार से बात करता हूं, अच्छा व्यवहार करता हूं तो ज्यादातर काम हो ही जाते हैं। जो नहीं काम करते हैं उनकी शिकायत शासन में कभी की है, इस पर वो कहते हैं कि ऐसी जरूरत नहीं पड़ी। वैसे भी अगर शिकायत करेंगे भी तो कोई परिणाम नहीं निकलेगा।

वाराणसी के अजगरा विधायक कैलाश सोनकरः टूट जाएगा BJP का घमंड

विधायक कैलाश सोनकर
कैलाश सोनकर भले ही मौजूदा वक्त में सुभासपा से विधायक हों लेकिन राजनीति की शुरुआत उन्होंने बीजेपी से ही की है। वो दौर था 1990 का, जब पूरे देश में राम नाम की लहर थी। लालकृष्ण आडवाणी की अगुवाई में बीजेपी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए आंदोलन छेड़ रखा था।

गोसाईगंज से भाजपा विधायक इंद्र प्रताप तिवारी खब्बूः विकास प्राथमिकता

विधायक इंद्र प्रताप तिवारी खब्बू
गरीब तबके के वनराजा, नट, कंकाली, धर कार जैसे समाज के छोटे तबके के लोगों को चिन्हित कर जिन्हें सर्वाधिक जरूरतमंद समझा उनके लिए अपने बरईपारा स्थित आवास पर अन्नपूर्णा राहत पैकेज का निर्माण करा कर लोगों को बांटने का काम कराया है।

दीन दयाल उपाध्याय नगर से MLA साधना सिंहः समाज सेवा करती रहूंगी

विधायक साधना सिंह
दल - बदल की राजनीति पर विधायक ने बहुत शालीनता से जवाब देते हुए कहा, " अरे भईया, जब हम सत्ता से सालों दूर रहे तब दल बदलने का थोड़ा सा भी ख्याल नहीं आया तो अब क्या आएगा, इसी कमल के फूल में लिपटकर श्मशान घाट पहुंच जाएं यही हमारी हार्दिक इच्छा है क्योंकि बीजेपी हमारे लिए तो भगवान के समान है।"

महराजगंज सदर MLA जयमंगल कन्नौजियाः माँ ने कपड़े धोकर पाला

विधायक जयमंगल कन्नौजिया
विधायक जयमंगल कन्नौजिया का कहना है कि नेताओं का भी अपना परिवार होता है। हमारा भी व्यक्तिगत काम है। निजी जीवन है। परिवार के साथ होटल में भोजन की फोटो को गलत तरीके से वायरल करना निजता का उलंघन है। निजी जीवन में झांकना किसी के लिए ठीक नहीं है।

अयोध्या से भाजपा विधायक वेद प्रकाश गुप्ताः जनता से गौरवान्वित

विधायक वेद प्रकाश गुप्ता
वेद प्रकाश गुप्ता का कहना है अयोध्या का विकास बड़े पैमाने पर हो रहा है जिसमें जिला मुख्यालय पर कोर्ट न्यायालय का निर्माण हो रहा है। ब्रांच सिविल लाइन का निर्माण हो रहा है। रामायण सर्किट थीम रामकथा गैलरी पर्यटन के क्षेत्र में तमाम काम जिले में चल रही है।

गोंडा सदर विधायक प्रतीक भूषण सिंहः प्रचारक से कम उम्र में मुकाम

भाजपा को पहली आंतरिक लोकतंत्र वाली पार्टी बताते हुए प्रतीक भूषण ने कहा कि बीजेपी इकलौती पार्टी है, जिसमें अदने से कार्यकर्ता को भी अपनी बात रखने का अवसर मिलता है। जबकि अन्य सभी पार्टियां परिवार वाद की पोषक हैं और वहां परिवार के खिलाफ आवाज उठाने वाले को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।

गाजीपुर सदर विधायक संगीता बलवंतः राजनीति में न आती तो लेखन कार्य करती

विधायक संगीता बलवंत
बीजेपी विधायक ने कहा कि गाजीपुर की समस्याओं को विधानसभा में मैं हमेशा उठाती रहती हूं। ताकि यहां के समस्याओं का निस्तारण किया जा सके एक सवाल के जवाब में संगीता बलवंत ने कहा कि जब तक जीवन है, तब तक कार्य खत्म नहीं होंगे।

मेरठ दक्षिण के भाजपा विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमरः विधायक नहीं, विकास पुरुष

डॉ. सोमेंद्र तोमर
भाजपा का साधारण कार्यकर्ता भी किसी पद पर विराजमान हो सकता है। वाम दलों और भाजपा को छोड़कर अन्य राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र न के बराबर है। अधिकांश क्षेत्रीय दलों की स्थिति वैसी ही है जैसी राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की है। ऐसे दलों में नेता या उसका परिवार ही पार्टी का पर्याय होता है।

सरेनी से भाजपा विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंहः क्षेत्र व जनता का विकास सबसे बड़ी खुशी

धीरेंद्र बहादुर सिंह
विधायक धीरेन्द्र बहादुर सिंह कहते हैं टोला हो मजरा हो हर जगह विद्युतीकरण हो। प्रकाश और विकास हर घर तक पहुंचे और हमने प्रधानमंत्री आवास 250 स्वीकृत करा लिए हैं जो पूर्व एमएलसी राजा राकेश प्रताप सिंह की जमीन पर बनेंगे। इस संबंध में बैठक करके जिलाधिकारी के माध्यम से संस्तुति प्रदान करवाया है।

सिवालखास से विधायक जितेंद्र पाल सिंह उर्फ़ बिल्लूः मेरी एक ही पूंजी – कठोर परिश्रम

विधायक जितेंद्र पाल सिंह उर्फ़ बिल्लू
जितेंद्र पाल सिंह कहते हैं मैं शुरू से ही काम ज्यादा, बातें कम पर यकीन करता हूं। जो भी करता हूं, पूरी ईमानदारी और मेहनत से करता हूं क्योंकि मैं जानता हूं कि इज्जत और तारीफ मांगी नहीं जाती, कमाई जाती है।

मेहनौन से भाजपा विधायक विनय द्विवेदीः विधायक नहीं, तो डॉक्टर होते

विधायक विनय द्विवेदी
नौकरशाही के कार्यशैली पर उन्होंने कहा कि आज जो विकास हो रहे हैं वह ब्यूरोक्रेसी द्वारा सहयोग से ही संभव है। विधायिका और कार्यपालिका विकास के दो पहिए हैं इसलिए जन प्रतिनिधि एवं नौकरशाही को ईमानदारी से सरकार का साथ देना चाहिए तभी देश, प्रदेश का विकास होगा और जनता खुशहाल होगी।

मिल्कीपुर से भाजपा विधायक बाबा गोरखनाथः दुखी पीड़ितजन का सहारा

विधायक बाबा गोरखनाथ
विधायक का मानना है कोरोना बीमारी के लिए बन रही दवा शोध आदि में मेरे शरीर की आवश्यकता पड़ेगी, तो भी मैं देश के हित में उस के लिए तैयार हूं। जहां भी मुझे बुलाया जाएगा जाऊँगा। मैं वहां जाकर इस काम में प्रमुखता से आगे खड़ा मिलूंगा।

भारतीय एकता को राजनीति के लिए ना बांटा जाए

योगेश मोहनजी गुप्ता
सम्पूर्ण विश्व में भारत की संस्कृति, सभ्यता, मूल्य, विविधता में एकता की धरोहर एक पहचान स्वरूप है, भारत को इसपर गर्व है। सम्भवतया विश्व में कोई ही ऐसा देश होगा।

कैसे हों बिहार के राजमार्ग सुरक्षित

आर.के. सिन्हा
आज से तीस साल पहले की तुलना में देश की आबादी ने एक स्थान से दूसरे स्थान पर आना-जाना बहुत अधिक कर दिया है। जनता अपने करियर को पंख लगाने के लिए एक शहर से दूसरे शहर में बसने या कामकाज के सिलसिले में जाने लगी है।

रे मगध ! कहां मेरा रश्मिरथी ?

के. विक्रम राव
उनका शैशव विपन्नता में बीता। स्कूल जाते थे नदी पार कर, बिना जूतों के। फिर भारत ने उन्हें उठाकर अपने ललाट पर सजाया। वे आसमान चीरकर निकले थे, मार्तंड थे।

देशी सोच के प्रणेता कालजयी युगपुरुष पं. दीन दयाल उपाध्याय

योगेश मिश्र
संघ के एक शिविर में खाना खाने के बाद एक स्वयंसेवक उनका हाथ धुलवा रहा था। चुनाव का दौर था। स्वयंसेवक ने पूछा- अपने कितने जीतेंगे। दीन दयाल जी ने उत्तर दिया- 425 जीतेंगे। स्वयंसेवक ने कहा- कैसे? तो उन्होंने बताया- जो जीतेंगे सभी स्वयंसेवक होंगे।

भारत में विपक्ष की भूमिका

डॉ. वेदप्रताप वैदिक
इस बार संसद ने 8 दिन में 25 विधेयक पारित किए। जिस झपाटे से हमारी संसद ने ये कानून बनाए, उससे ऐसा लगने लगा कि यह भारत की नहीं, माओ के चीन या स्तालिन के रुस की संसद है।

हो गया फैसलाः कोरोना भी चलेगा और जिंदगी भी, लेकिन खतरे में हैं गांव

योगेश मिश्र
यह पहला अवसर नहीं है जब इस तरह की किसी स्थापित स्वरूप के अंत की घोषणा की गई है। या की जा रही है। पर हर बार मानव समाज उठ खड़ा होता है। जीवंत हो जाता है। नये रास रच लेता है। नये संगीत गढ लेता है। नया साहित्य रच लेता है। इस बार भी होगा। ज़रूर होगा।