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अभी-अभी भूकंप से कांपा दिल्ली-एनसीआर, होम क्वारंटाइन भूल लोग घर सेे बाहर भागे

कोरोना संकट के बीच प्राकृतिक आपदाओं का कहर भारत में लगातार जारी है। इसी कड़ी में आज राजधानी दिल्ली में भूकंप के झटके महसूस किये गए। बता दें कि दो से तीन बार भूकंप के झटके महसूस होने के बाद दिल्ली वासी सहम गए। लोग घरों से निकल कर भागने लगे। हालाँकि भूकंप की तीव्रता कम थी। बता दें कि इसके पहले भी दिल्ली में इसी महीने भूकंप आ चुका है।

चीन की बौखलाहट का कारण

डा. समन्वय नंद
इसलिए इस तरह के हरकतों से वह मनोवैज्ञानिक तरीके से भारत पर दबाव डालना चाहता है । लेकिन चीन को अब यह समझ लेना होगा कि 1962 से अब तक चीन के पीली नदी व भारत के गंगा नदी में काफी पानी बह चुका है । अब 2020 है । वर्तमान का भारत 2020 का भारत है 1962 का भारत नहीं है ।

तो हमारी ट्रेनें उम्रदराज होने के चलते भूल गयीं अपनी राह !!

ज्ञानेंद्र शुक्ला
तमाम पहलूओँ पर गौर करने से ये तय हो जाता है कि कई दर्जन ट्रेनों के रास्ते से भटकने की गुंजाईश नहीं हो सकती है। हां रूट तय करने के फैसले को लेकर सवाल उठ सकते हैं, कम समय- कम लागत वाला रूट क्यों नहीं निर्धारित किया गया इसे लेकर भी सवाल पूछे जा सकते हैं।

वीर सावरकर पर उठाये गये सवालों के जवाब

योगेश मिश्र
सावरकर प्रथम राष्ट्रभक्त थे जिन्हें अंग्रेजी सत्ता ने 30 वर्षों तक जेलों में रखा । आजादी के बाद 1948 में नेहरु सरकार ने महात्मा गाँधी की हत्या की आड़ में लाल किले में बंद रखा। पर आरोप झूठे पाए जाने के बाद ससम्मान रिहा कर दिया। देशी-विदेशी दोनों सरकारों को उनके राष्ट्रवादी विचारों से डर लगता था।

सुगंध-मिठास में 21 है चंपारण का ये जर्दालु आम

आरके सिन्हा
बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश तो जर्दालु आमों पर जान निसार करता है। आम के सीजन में सभी पूर्वांचली इसका भरपूर सेवन करते हैं। वे इसे बार-बार खाए बिना रह ही नहीं सकते। बिहार में कई स्थानों पर जर्दालु आम खाने की प्रतियोगिताएं भी होती हैं। वहां का नजारा गजब का होता है। थाली में दर्जनों आम और बगल में छिलकों का ढेर।

क्या भारत-चीन युद्ध हो सकता है ?

डा. वेद प्रताप वैदिक
अपने नागरिकों की इस तरह की सामूहिक वापसी कोई भी देश तभी करता है, जब उसे युद्ध का खतरा हो। इस खतरे के अंदेशे को बढ़ाने में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अंग्रेजी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ का भी योगदान है।

नेहरु के आखिरी कुछ दिन

के विक्रमराव
नेहरू की ज्योतिष में रूचि पैदा करने में सत्यनारायण बाबू कई संयोगों के कारण सफल हुए| पहला इत्तिफाक था मौलाना अबुल कलाम आजाद की अकस्मात् मौत का| हिन्दुस्तान टाइम्स के संपादक रहे दुर्गा दास की किताब “इंडिया फ्रॉम कर्जन टू नेहरू एण्ड आफ्टर” (रूपा प्रकाशन 1981, पृष्ठ 375) में मौलाना आजाद की मृत्यु का उल्लेख है|