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हर गरीब के खाते में 6 महीने तक प्रति माह 7500 रुपये डाले मोदी सरकार: राहुल

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लॉकडाउन के दौरान बदइंतजामी को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला है। स्पीक अप इंडिया ऑनलाइन कैंपेन को एड्रेस करते हुए राहुल ने वीडियो संदेश जारी किया और कहा कि, ‘कोविड के कारण देश में आज एक तूफान आया है, गरीब जनता को चोट लगी है।

सुगंध-मिठास में 21 है चंपारण का ये जर्दालु आम

आरके सिन्हा
बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश तो जर्दालु आमों पर जान निसार करता है। आम के सीजन में सभी पूर्वांचली इसका भरपूर सेवन करते हैं। वे इसे बार-बार खाए बिना रह ही नहीं सकते। बिहार में कई स्थानों पर जर्दालु आम खाने की प्रतियोगिताएं भी होती हैं। वहां का नजारा गजब का होता है। थाली में दर्जनों आम और बगल में छिलकों का ढेर।

क्या भारत-चीन युद्ध हो सकता है ?

डा. वेद प्रताप वैदिक
अपने नागरिकों की इस तरह की सामूहिक वापसी कोई भी देश तभी करता है, जब उसे युद्ध का खतरा हो। इस खतरे के अंदेशे को बढ़ाने में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अंग्रेजी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ का भी योगदान है।

नेहरु के आखिरी कुछ दिन

के विक्रमराव
नेहरू की ज्योतिष में रूचि पैदा करने में सत्यनारायण बाबू कई संयोगों के कारण सफल हुए| पहला इत्तिफाक था मौलाना अबुल कलाम आजाद की अकस्मात् मौत का| हिन्दुस्तान टाइम्स के संपादक रहे दुर्गा दास की किताब “इंडिया फ्रॉम कर्जन टू नेहरू एण्ड आफ्टर” (रूपा प्रकाशन 1981, पृष्ठ 375) में मौलाना आजाद की मृत्यु का उल्लेख है|

भारत से हारा है चीन: उसे याद रखना चाहिए यह पुराना सबक

योगेश मिश्र
चीन भारत के साथ व्यापार को कितना महत्व देता है, उसे नाथू ला के नवीनतम घटना से भी समझा जा सकता है। डोकलाम मुद्दे पर भारत पर दबाव डालने के लिए चीन ने नाथू ला दर्रे से मानसरोवर यात्रा रोकी। लेकिन व्यापार बिल्कुल नहीं। इस तरह अतीत की सामरिक एवं आर्थिक व्याख्याएं  बताती हैं कि डोकलाम से चीन ही पीछे हटेगा।

मज़दूरों की मज़बूरी और सत्ता का टैलेंट हंट कार्यक्रम

ज्योतिकुमारी ने चाहे अपने आगे के भविष्य को लेकर अभी कुछ भी तय नहीं किया हो कि वह गाँव में ही रहकर पढ़ना चाहती है या सायकिलिंग महासंघ की पेशकश को स्वीकारना चाहती है पर वे तमाम लोग जो अलग-अलग जगहों पर बैठे हुए हैं, उसके बारे में अपने तरीक़ों से सोच में जुटे हुए हैं।

‘आस्था के प्रश्न तथा अम्फान एवं कोरोना का साहचर्य’

डॉ कौस्तुभ नारायण मिश्र
सब कुछ उसी दैवी सत्ता या प्रकृति या सृष्टि के नियमों पर छोड़कर समय की प्रतीक्षा करने के अलावा कुछ नहीं बचता। हम प्रकृति का और प्रकृति को संचालित करने वाली शक्तियों का धन्यवाद एवं आभार प्रकट करते हैं और प्रकट करना चाहिये, यही मानवीय वृत्ति है।