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पाकिस्तान की भारत के खिलाफ नापाक साजिश, राजनयिक को ऐसे पेरशान कर रही ISI

कोरोना से पूरी दुनिया परेशान है और इस महामारी से जंग लड़ रही है। लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान भारत के खिलाफ साजिशें रच रहा है। दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास में काम करने वाले दो जासूसों को भारतीय खुफिया एजेंसियों ने रंगे हाथ पकड़ा था।

90वीं जयंती पर जॉर्ज के दो प्रसंग, जिनसे खुलते हैं बहुत से राज

के विक्रमराव
महान सोशलिस्ट विचारक रामवृक्ष बेनीपुरी ने अपने पटना आवास (1956) पर मुझ (समाजवादी युवक सभा सदस्य) को बताया था कि नेहरु-सत्ता का ऐसा नसीब रहा है कि सोशलिस्ट टूटते गए, बिखरते रहे हैं| जॉर्ज ने गैर-कांग्रेसियों को दृढ़ता से संगठित करने की दिशा में कोशिश की थी| सिर्फ आंशिक कामयाबी ही पाई|

लॉक डाउन प्रतिबंधों में अब किस प्रजातांत्रिक छूट की प्रतीक्षा है ?

श्रवण गर्ग
हम चाहें तो इस बात को लेकर भी चिंतित हो सकते हैं कि एक लम्बे समय तक घरों में बंद रहते हुए शेष विश्व से अलग कर दिए गए हैं।हमारी लड़ाई जबकि एक वैश्विक महामारी से है।

मासूम बच्चों की पीड़ा का अंतर्राष्ट्रीय दिवस: डॉo सत्यवान सौरभ

डॉo सत्यवान सौरभ, 
बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम के माध्यम से पहली बार ‘पेनीट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट’, यौन हमला और यौन उत्पीड़न को परिभाषित किया गया था।

कोरोना काल- जो बने बेसहाराओं का सहारा

आरके सिन्हा
कोरोना वायरस से पैदा हुए हालातों के चलते दो तरह के लोग सामने आए हैं। पहले, वे जो संक्रमण को रोकने के लिए जारी लॉकडाउन को तोडने में पीछे नहीं रहे। यह करके उन्होंने बताना चाह कि वे सरकार से ऊपर हैं । दूसरे, जो इस कठिन काल में बेबस लोगों की मदद को आगे आए।

तकलीफ़ें हवाओं में और सलाहें ख़ंदकों में शरण लेने की !

श्रवण गर्ग
आश्चर्य प्रकट किया जा सकता है कि जिस समय हम कोरोना से मरने वालों की बढ़ती हुई तादाद ,दो महीनों से ऊपर के लॉक डाउन के अपार कष्टों, करोड़ों बेरोज़गारों और प्रवासी मज़दूरों की पीड़ाओं और उनकी टाली जा सकने वाली मौतों के बोझ तले दबे हुए हैं, क्या इन विषयों को उठाने का यही सही समय है ! और यह भी कि सब कुछ एक ही समय में कैसे उपस्थित हो सकता है ?

मोदी-वर्ष पर कोरोना बादलः क्या रही सरकार की तीसरी गलती

डा. वेद प्रताप वैदिक
आगा-पीछा सोचे बिना धड़ल्ले से कुछ भी कर डालने के नतीजे सामने हैं। तालाबंदी तीसरे महिने में प्रवेश कर गई है, कल कारखाने, दुकानें, दफ्तर ठप्प हैं, प्रवासी मजदूरों की करुणा-कथा बदतर होती जा रही हैं, हताहतों की संख्या बढ़ती चली जा रही है।