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हुआ बड़ा खुलासा! इन लोगों ने रची थी दिल्ली में हिंसा की साजिश, ये सच्चाई आई सामने

गृह मंत्रालय दिल्ली में हुई हिंसा पर सख्त हो गया है। दिल्ली पुलिस ने उपद्रवियों के खिलाफ एक्शन लेना शुरू कर दिया है। योगेंद्र यादव और राकेश टिकैट समेत एनओसी पर साइन करने वाले सभी किसान नेताओं के खिलाफ एफाईआर दर्ज की गई है।

सिरसागंज सपा विधायक हरीओम यादवः खेती किसानी से आए राजनीति में

विधायक हरीओम यादव
हर जनप्रतिनिधि की प्राथमिकता जनता की सेवा करना होनी चाहिए। इसके लिए विधायक निधि की जरूरत होती है। विधायक निधि से क्षेत्र की जनता के विकास कार्य होते हैं। विपक्ष की सरकार है फिर भी जनहित के कार्य कराते हैं। हमारे क्षेत्र की मुख्य समस्या आवारा जानवरों की है जो किसानों की फसल ओर किसानों को काफी नुकसान पहुचा रहे हैं।

शिकोहाबाद के भाजपा विधायक डॉ. मुकेश वर्माः शल्य चिकित्सक से आए राजनीति में

विधायक डॉ मुकेश वर्मा
दलबदल के सवाल पर वह कहते हैं कि राजनीति गंदी है, कुछ नेता मज़बूरी में दल बदलते है। राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र होना चाहिए अपनी बात रखने की आजादी होनी चाहिए।

बढ़ापुर भाजपा विधायक कुंवर सुशान्त सिंहः राजनीति में न आते तो वकील होते

विधायक कुंवर सुशान्त सिंह
विधायक कहते हैं कि क्षेत्र की समस्या है तहसील बनवाने की क्योंकि एक तहसील में 300 गांव होते हैं जबकि तहसील धामपुर में 936 गांव हैं। अतः एक नई तहसील का निर्माण कराना। जिमकार्बेट पार्क कालागढ़ टुरिज्म बनाना जिससे वहां पर जो विदेशी चिड़िया आती हैं लोग उनको देख सकें।

चांदपुर से भाजपा विधायक कमलेश सैनीः राजनीति में न आतीं तो समाजसेवा करतीं

विधायक कमलेश सैनी
विधायक के तौर पर क्षेत्र में आईटीआई, जीजीआईसी संस्थाओं का निर्माण कराया एवं बिजली की समस्या निवारण हेतु बिजली घर का निर्माण कराया तथा मेरठ बिजनौर को जोड़ने वाले पुल का भी कार्य कराया और छोटे बड़े अनेक पुल बनवाये।

नगीना से सपा विधायक मनोज पारसः राजनीति में न आते तो आईएएस होते

विधायक मनोज पारस
विधायक ने कहा विधायक निधि का सही इस्तेमाल करे तो मददगार है। निधि नहीं होगी तो हम समस्या हल नहीं कर पायेंगे। विधायक निधि 2.5 करोड़ से बढ़ाकर 8 से 9 करोड़ कर देनी चाहिए जिससे क्षेत्र का ओर विकास कराया जा सके। 

गणतंत्र दिवस पर दिल्ली हिंसा से देश शर्मसार- जिम्मेदार कौन ?

मृत्युंजय दीक्षित
आज वह लोग मन ही मन बहुत प्रसन्न हो रहें होंगें जो किसी न किसी प्रकार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भारत सरकार की छवि को देश ही नहीं अपितु पूरी दुनिया के सामने खराब करना चाह रहे थे।

इस आंदोलन का ‘महात्मा गांधी’ कौन है ?

श्रवण गर्ग
छह महीने के राशन-पानी और चलित चोके-चक्की की तैयारी के साथ राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर पहुँचे किसान अपने धैर्य की पहली सरकारी परीक्षा में ही असफल हो गए हैं ,क्या ऐसा मान लिया जाए ?

भीड़ को संभालने के लिए चाहिए गांधी, जो आंदोलनकारियों के पास नहीं

केंद्र की सरकार अब आंदोलनकारी किसानों के साथ अगर सख्त रुख दिखाए तो शायद ही कुछ लोग किसानों के साथ खड़े दिखाई देंगे। गणतंत्र दिवस के मौके पर हुए इस पूरे हंगामे के दौरान देशवासियों को राष्ट्रपिता मोहनदास कर्मचंद गांधी यानी महात्मा गांधी सबसे ज्यादा याद आए।

तिरंगे का अपमानः क्या रियायत की उम्मीद अब भी की जानी चाहिए

रामकृष्ण वाजपेयी
चोट किसी को भी लगे, नुक़सान हमारे देश का ही होगा। देशहित के लिए कृषि-विरोधी क़ानून वापस लो! हास्यास्पद है। देश के राष्ट्रीय पर्व के मौके पर इस शर्मनाक घटना की राहुल गांधी को कम से कम अब तो निंदा करनी ही चाहिए थी। यह मौन कांग्रेस की अलगाववाद को बढ़ावा देने की नीतियों को दर्शाता है।

किसान ! असली कौन, नकली कौन ?

के. विक्रम राव
दिल्ली सीमा पर अपना डेरा डाले कुछ लोग लालकिले पर चढ़ गये। दिल्ली पुलिस को अपना अमेरिकी मैस्सी फर्गूसन ट्रैक्टर चढ़ाकर खदेड़ दिया। वहां बने अवरोधों को ध्वस्त कर दिया?

किसान आंदोलन: कल्पना से परे था ऐसा अंत…

किसान आंदोलन की शुरुआत से ये सवाल लगातार उठ रहे थे कि आंदोलनकारियों का सरकार के सुलह के हर कदम पर अड़ियल रवैया आखिर क्यों है?