Opinion

शब्बीर हसन खान “जोश” मलिहाबादी, जो जन्मे अवध (लखनऊ) में और जिनका इन्तिकाल हुआ इस्लामाबाद में, आम भारतीय मुसलमान की भांति सहज अंतर्द्वंद्व से ग्रसित रहे। हिंदुस्तान में रहें या फिर दारुल इस्लाम में बसें? उनके यार जवाहरलाल नेहरू ने इसरार किया था कि : “भारत में ही रहें, भले ही अपने संतानों को कराची भेज दें।” वे नहीं माने।

यदि यह सच नहीं है तो क्या नरेंद्र मोदी से नोटबंदी- जैसी भूल कभी हो सकती थी ? जीएसटी जैसा लंगड़ा-लूला कानून कभी देश के सामने लाया जा सकता था ? अब नागरिकता संशोधन विधेयक के मामले में भी यही हुआ है।

श्री इंदर गुजराल आज जिंदा होते तो हम उनका सौंवा जन्मदिन मनाते। वे मेरे घनिष्ट मित्र थे। वे भारत के प्रधानमंत्री रहे, सूचना मंत्री रहे और मुझे याद पड़ता है कि वे दिल्ली की नगरपालिका के भी सदस्य रहे।

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने करतारपुर गलियारे के बारे में काफी सख्त प्रतिक्रिया कर दी है। उन्होंने यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान के रेलमंत्री शेख राशिद के बयान पर की है।

अभी महाराष्ट्र में लगा घाव हरा ही था कि भाजपा सरकार को अब एक और गंभीर चोट लग गई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछली तिमाही में भारत की विकास-दर जितनी गिरी है, उतनी पिछले छह साल में कभी नहीं गिरी।

महाराष्ट्र में आखिरकार शिव सेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस की गठबंधन सरकार बन गई है। उद्धव ठाकरे भाजपा की सरकार में ढाई साल बाद मुख्यमंत्री पद मांग रहे थे लेकिन वे अभी ही मुख्यमंत्री बन गए।

क्यों भाजपा के हाथों से महाराष्ट्र की सत्ता फिसली ? कब अजीत पवार थके मांदे घर वापस लौटे? कैसे माहभर से तरसते उद्धव ठाकरे ने अंततः कुर्सी हथिया ही ली?

मुम्बई से लेकर दिल्ली तक जो राजनीतिक हलचल मची रही अब उसका पटाक्षेप हो चुका है। लेकिन जो कीमत भाजपा को चुकानी पड़ी उसकी भरपाई करना इतना आसान नहीं होगा। शरद पवार की भाजपा को सत्ता से दूर रखने की भीष्म प्रतिज्ञा के बीच देवेंद्र फडणवीस बलि का बकरा बन गए। उनकी स्वछ राजनीतिक छवि …

विश्व के सबसे बड़े जनतंत्र के वृहदतम शिक्षा तंत्रों में से एक होने के गौरव के साथ साथ हमें एक बड़ी जिम्मेकदारी का भी अहसास है। हमें पता है कि अच्छी शिक्षा के माध्यम से ही हम नव भारत के निर्माण की आधारशिला तैयार कर सकते हैं। हम बखूबी जानते हैं कि हम लगभग 33 …

मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने के लिए शिवसेना को बहुत पापड़ बेलने पड़े। कांग्रेस, एनसीपी, भाजपा, मुस्लिम लीग सबके साथ जुड़ने और टूटने का रिश्ता बनाना पड़ा। बाल ठाकरे के बेटे उद्धव ठाकरे कांग्रेस और एनसीपी के सहयोग से मुख्यमंत्री बनेंगे।