Opinion

सुरेंद्र साए से संबंधित तमाम दस्तावेज भोपाल, रायपुर और नागपुर में आज भी मौजूद बताए जाते हैं लेकिन उड़ीसा सरकार ने इस संबंध में आज तक कुछ नहीं किया। उड़ीसा के बुर्ला में वीर सुरेंद्र साए यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नालाजी है। यहीं पर वीर सुरेंद्र साए मेडिकल कालेज भी है। 1986 में भारत सरकार ने इस योद्धा के सम्मान में डाक टिकट जारी किया था।

आजादी की बेला पर कुर्सी की रेस में नेहरु-पटेल ने इस अकीदतमंद हिन्दुस्तानी से उनकी मातृभूमि (सरहद प्रान्त) छीनकर अंग्रेजभक्त मोहम्मद अली जिन्ना की झोली में डाल दी थी। तब इस भारतरत्न और उनके भारतभक्त पश्तूनों को कांग्रेसियों ने “भेड़ियों” (मुस्लिम लीगियों) के जबड़े में ढकेल दिया था।

निकाह नहीं, विवाह ! विवाह याने हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार मंत्र-पाठ, पूजा, हवन, द्वीप-प्रज्जवलन, मंगल-सूत्र आदि यह सब होते हुए आप यू-टयूब पर भी देख सकते हैं। शरत शशि और अंजु अशोक कुमार के इस विवाह में आये 4000 मेहमानों को शाकाहारी प्रीति-भोज भी करवाया गया।

हम चीन के पहले आजाद हुए और चीन प्रारंभिक कई वर्षों तक कम्युनिस्ट बेड़ियों में जकड़ा रहा, फिर भी उसने इतनी जल्दी इतनी उन्नति कैसे कर ली ? आज चीन और भारत की जनसंख्या में मुश्किल से 10-12 करोड़ का अंतर है।

जनसंख्या विस्फोट को लेकर मौलाना भड़क जाते हैं। इसे एकतरफा या मजहबी रुख पहना दिया जाता है। जबकि कानून किसी एक के लिए नहीं सभी के लिए समान होगा और जबकि नतीजे खुद सारी पोल खो रहे हैं तो आप बेचैन क्यों हैं। जनसंख्या विस्फोट के लिए दो बच्चों का कानून बनाने का राष्ट्रीय स्वयंसेवक …

भारत सरकार मलेशिया को सबक सिखाना चाहता है। वह मलेशिया से खरीदे जानेवाले पाम आइल पर पाबंदी लगाने जा रही है और वह उससे माइक्रोप्रोससरों की खरीद पर भी पुनर्विचार कर रही है। यदि ऐसा हो गया तो भारत-मलेशिया व्यापार जो कि 17 अरब डाॅलर का है, आधे से भी कम रह जाएगा।

पड़ोसी कम्युनिस्ट चीन की प्राणपण से रची साजिशों के बावजूद लोकतान्त्रिक प्रगतिशील प्रत्याशी 63-वर्षीया कुमारी साईं इंग-विन ताईवान द्वीप राष्ट्र की राष्ट्रपति गत सप्ताह फिर चुन ली गयीं। उनके चीन-समर्थक प्रतिद्वंदी श्री हान कुयोयू बुरी तरह हारे।

केरल में कल-परसों ऐसा काम हुआ है, जो पूरे देश में बड़े पैमाने पर होना चाहिए। कोची के समुद्रतट के किनारे चार गगनचुंबी भवनों को कुछ ही सेकेंड में जमीदोज़ कर दिया गया।

कश्मीर के सवाल पर सर्वोच्च न्यायालय का जो फैसला आया है, उस पर विपक्षी दल क्यों बहुत खुश हो रहे हैं, यह समझ में नहीं आता। क्या अदालत ने सब गिरफ्तार नेताओं की रिहाई के आदेश दे दिए हैं ?

ईरानी सेनापति कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध छिड़ जाने की जो आशंका थी, वह अभी तक आशंका ही है, यह संतोष का विषय है।