Opinion

राम ने ''सच्चे धर्म'' को अपने जीवन से हमें साक्षात करके सिखाया है। वे हमारे ही नहीं, सारे विश्व के हैं। ऐसा माननेवाली जाहरा बेगम पहली मुसलमान नहीं हैं।

रेरा ने अब तक अनियंत्रित एक क्षेत्र में शासन प्रणाली को प्रभावित किया है। विमुद्रीकरण और वस्‍तु और सेवा कर कानूनों के साथ, इसने काफी हद तक रियल एस्‍टेट क्षेत्र से काले धन का सफाया किया है।

मोहम्मद सिराज के पिता का इंतकाल हो गया। भाई इस्माइल ने दफनाया। सिराज आस्ट्रेलिया में भारतीय टीम में सेवारत रहे। नमाजे—जनाजा छूट गया। उधर टी. नटराजन की पुत्री पैदा हुयी। तब वह दुबई में आईपीएल खेल रहे थे। वहीं से सीधे आस्ट्रेलिया जाना पड़ा।

पाकिस्तान में सिंध की आजादी और अलगाव का आंदोलन फिर तेज हो गया है। जीए सिंध आंदोलन के नेता गुलाम मुर्तज़ा सईद के 117 वें जन्म दिन पर सिंध के कई जिलों में जबर्दस्त प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों में नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के पोस्टर भी उछाले गए।

वॉट्सऐप के पॉलिसी अपडेट से मचे बवाल के बाद सिग्नल और टेलिग्राम को बड़ा फायदा हुआ है। ऐप एनालिटिक्स फर्म सेंसर टावर के डेटा के मुताबिक 6 से 10 जनवरी के बीच दुनिया भर में ऐप स्टोर और गूगल प्लेस्टोर में सिग्नल के 75 लाख के करीब डाउनलोड्स रहे हैं।

अनायास याद आ गयी राज्य सभा के चुम्बन पर चली एक पुरानी रोचक बहस (शुक्रवार, 27 फरवरी, 1970)। पचास वर्ष हुए। इसमें तब साठ साल पार कर चुके सदस्यों ने चुस्कियां लेते हुये चुंबन पर विचारों का दिनभर आदान-प्रदान किया था।

हिंदी में किसी से बात करने के लिए मैं तरस जाता था लेकिन अब अमेरिका के छोटे-मोटे गांवों में भी आप भारतीयों से टकरा सकते हैं। अबू धाबी और दुबई तो अब ऐसे लगते हैं

मकर संक्रांति पर मुख्यमंत्री आवास में तहरी भोज था। मेजबान थे योगी आदित्यनाथजी। चुनिन्दा (फारसी में ''चुनीदा'' मायने श्रेष्ठ) अतिथि आये थे। करीब इकतीस। बहुत से वरिष्ठ थे, कई विशिष्ट, कुछ गरिष्ठ मगर सभी शिष्ट। मुझ जैसा कलमकर्मी भी था। गणित की स्नातक-डिग्रीप्राप्त मुख्यमंत्री का हिसाब बरोबर रहा।

ममता बनर्जी के दस वर्षों के कार्यकाल के दौरान देश का एक शानदार राज्य पिछड़ता ही रहा। वहां पर बार-बार हिंसा ही होती रही।

ऐसी शादियाँ वास्तव में प्रेम-विवाह होते हैं। प्रेम के आगे मजहब, जाति, रंग, पैसा, सामाजिक हैसियत- सब कुछ छोटे पड़ जाते हैं। शादी के बाद भी जो जिस मजहब या जात में पैदा हुआ है, उसे न बदले तो भी क्या फर्क पड़ता है ?