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Mobile Phone Addiction: अरे ! हम सब कर क्या रहे हैं

Mobile Phone Addiction in India: 1.1 लाख करोड़ घण्टे ये कोई कम समय तो है नहीं। लेकिन भारतीयों ने इतना समय केवल फोन देखते बिता दिया, वो भी केवल 2024 में।

Yogesh Mishra
Written By Yogesh Mishra
Published on: 4 April 2025 5:48 PM IST
Mobile Phone Addiction in India
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Mobile Phone Addiction in India

How Much Time Indians Spend On Phone: अंक यानी नम्बर बहुत कुछ बयां करते हैं। देखिए तो सारी सृष्टि, जिंदगी, सब कुछ नम्बरों पर ही टिका हुआ है। उम्र, समय सब नम्बर ही तो हैं। गिनतियाँ ही सब राज खोलती हैं, सब कुछ बताती हैं। गिनतियाँ ही सब कुछ तय करती हैं।

चलिए, एक नंबर के बारे में जानिये। ये है 1.1 लाख करोड़। यानी 11 के बाद दस जीरो। एक ट्रिलियन और दस हजार करोड़। बहुत बड़ी संख्या है। गर एक इंसान की उम्र 85 साल नियत कर दी जाए तो इतने घण्टों में बीत जाएंगी 1,47,730 जिंदगियां। इतना जीते जीते ही थक कर मर जाये कोई।

हम 1.1 लाख करोड़ घण्टों की बात कर रहे हैं। लेकिन क्यों?

इसलिए क्योंकि हाल में आई एक रिपोर्ट बताती है कि हम हिंदुस्तानियों ने साल भर में मिल जुल कर अपनी जिंदगी के इतने घण्टे खर्च कर दिए, सिर्फ फोन पर।

केवल 2024 में भारतीयों ने इतने घंटे इस्तेमाल कर लिया फोन

(फोटो साभार- सोशल मीडिया)

कंसल्टेंसी फर्म एर्नस्ट एंड यंग की सालाना एंटरटेनमेंट रिपोर्ट (Consultancy firm Ernst & Young annual entertainment report) ये भी बताती है कि हम भारतीय औसतन रोज़ाना 5 घंटे फ़ोन का इस्तेमाल करते हैं। रिपोर्ट ने ही बताया है कि साल 2024 में भारतीयों ने 1.1 लाख करोड़ घंटे फोन का इस्तेमाल किया। उसमें भी 70 फीसदी लोगों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वीडियो प्लेटफॉर्म और गेमिंग के लिए फोन का इस्तेमाल किया है। यानी मनोरंजन पर ही समय खपा जा रहा है।

ये है हमारा उपभोग। हम पश्चिम की उपभोक्तावादी संस्कृतियों को हमेशा से नीची निगाह से देखते आये हैं। हमें अपने गीता ज्ञान पर गर्व रहा है जो कहता है कि कर्म ही जीवन है, कर्म ही सब कुछ है। लेकिन आज क्या यही हमारा कर्म रह गया है - 1 ट्रिलियन से ज्यादा घण्टे सिर्फ फोन पर? ये उपभोग की कैसी विडंबना है जहां उपभोग सब कुछ है। डेटा का उपभोग। हर महीने प्रति व्यक्ति औसतन 27.5 जीबी डेटा का उपभोग।

डेटा से पानी को ही रही बर्बादी

हम जल को जीवन मानने वाले लोग जल की ऐसी तैसी कर रहे। हमें भान ही नहीं कि डेटा कितना पानी पी लेता है। जान लीजिए कि गूगल के डेटा सेंटरों ने सिर्फ एक साल में 17 अरब लीटर पानी खर्च कर दिया। ऐसे और तमाम डेटा सेंटर हैं। इन्हें अपनी मशीनों की कूलिंग के लिए पानी चाहिए। अभी इन दिनों चैटजीपीटी में घिबली स्टाइल फोटो बनाने का इतना क्रेज़ है कि कम्पनी की मशीनों के प्रोसेसर गर्म हो कर पिघले जा रहे हैं। सोचिए, आपकी मस्ती प्रकृति पर कितनी भारी पड़ रही है।

क्या कर रहे युवा?

(फोटो साभार- सोशल मीडिया)

हम एक युवा देश होने का गर्व करते हैं। लेकिन कर क्या रहे हैं युवा? स्मार्टफोन पर रील्स देख रहे हैं, गेम खेल रहे हैं, सिनेमा देख रहे हैं, बेटिंग ऐप्स चला रहे हैं?

कहने को फोन की लत खराब है। नई पीढ़ी खराब हो रही है, युवा बर्बाद हुए जा रहे हैं। समाज टूट रहा है। लोग बातें करना भूल रहे हैं। वगैरह वगैरह....। फोन की बुराइयों के बखान शुरू भर हो जाएं तो खत्म होने का नाम नहीं लेते। खुद स्मार्टफोन में डूबे उतराते लोग ही उसकी बुराइयों की झड़ी लगा देते हैं। आप खुद भी कुछ देर एक दूसरे से बात करने के बाद आप फ़ोन देखने लगे जाते होंगे। चारों ओर नज़र दौड़ाइये। कहीं भी देखिए हर दूसरा तीसरा शख़्स उसी डिवाइस में झांकता नज़र आएगा। चलते फिरते, बैठते लेटे, सफर में, आराम में, पार्क, पार्टी और श्मशान तक में। अब इसमें भी कुछ नया नहीं रहा।

ईवाई की रिपोर्ट ये भी बताती है कि ट्रिलियन घण्टों के फोन उपभोग का बड़ा हिस्सा मनोरंजन में जाता है। हिंदुस्तानी भरपूर मनोरंजन कर रहे हैं। लेकिन हमारे मन, रंजन से लबालब है ये नज़र नहीं आता। चेहरे मुरझाए उदास ही नज़र आते हैं। कॉमेडी पर गुस्सा भड़क उठता है। बेसाख्ता हंसते मुस्कुराते लोग पागल या संदिग्ध लगते हैं। हर समय मानो खून खच्चर, गाली गलौज ही सिर पर सवार रहता है। मनोरंजन भरपूर है लेकिन हम हैप्पीनेस इंडेक्स में निचली पायदानों में ही फंसे पड़े हैं, ऊपर उठ ही नहीं पा रहे। क्या विडंबनाओं का संसार है।

इंटरनेट जानकारी और सूचनाओं का अंतहीन भंडार है। लेकिन इस भंडार से शिक्षा, स्किल, भाषाएं, आईडिया सीखने की बजाए सीख क्या रहे? स्कैम के तरीके, नफरत, भरम या फिर डूब रहे मनोरंजन रूपी ड्रग्स में।

डेटा आपका कमाई किसी और की

(फोटो साभार- सोशल मीडिया)

खैर, ये भी जान लीजिए कि फोन पर मनोरंजन तलाशते घंटों बिताते हैं हम आप और मालामाल होती हैं एंटरटेनमेंट मीडिया और गेमिंग कंपनियां। मालामाल भी ऐसी वैसे नहीं बल्कि लाखों करोड़ों की। 2024 में लोग 1. लाख करोड़ घण्टे फोन चलाते रह गए, डेटा फूंकते रह गए और उनकी फितरत से एंटरटेनमेंट और गेमिंग कंपनियों ने ढाई लाख करोड़ रुपये कमा लिए और टीवी कम्पनियों को पीछे छोड़ दिया। डेटा आप खरीदें और कमाई कर रहे कोई और। वाह क्या बिजनेस है!

खैर, रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में लोगों ने औसतन 5 घंटे रोजाना फोन का इस्तेमाल किया है। उसमें भी 70 फीसदी लोगों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वीडियो प्लेटफॉर्म और गेमिंग के दौरान फोन का इस्तेमाल किया है।

दरअसल, सबकी हैसियत के मुताबिक फोन और इंटरनेट उपलब्ध होने से ही आज देश की लगभग 40 प्रतिशत आबादी या 56 करोड़ 20 लाख लोग अब स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं। इसमें से भी 40 फीसदी इंटरनेट ग्राहक ग्रामीण क्षेत्रों से हैं।

कुछ और आंकड़े जान लीजिए। अनुमान है कि आज भारत में कुल मोबाइल यूजर्स की संख्या 1 अरब से ज्यादा है, जिनमें से लगभग 90 करोड़ डाटा यूजर होंगे। भारत में 46 करोड़ 20 लाख से कहीं ज्यादा सोशल मीडिया यूजर हैं। और उनमें से 18 वर्ष से ज्यादा उम्र के 40 करोड़ हैं।

भारत में 1.12 अरब मोबाइल कनेक्शन एक्टिव हैं, जो कुल जनसंख्या का 78.0 प्रतिशत है। ये भी जान लीजिए कि जहां तक इंटरनेट डेटा की बात है तो भारत में प्रति व्यक्ति औसत मासिक डेटा यूज़ 27.5 जीबी है।

हम दुनिया की सबसे बड़ी आबादी हैं सो नम्बर में भी हम आगे ही होंगे। दुर्भाग्य से प्रति व्यक्ति जीडीपी और कमाई में ये नम्बर आगे बढ़ नहीं पा रहे। बढ़ रहे हैं कहीं और। हो सकता है कई देशों में फोन यूज़ हमारी टक्कर का हो लेकिन हमें उससे क्या? हम अपना घर पहले देखें। टेक्नोलॉजी अच्छी चीज है, उसे अपनाए बगैर रहा भी नहीं जा सकता । लेकिन अपनाने के लिए है क्या उसमें, ये भी तो सोचिए। जो डैमेज हो गया वो वापस नहीं आने वाला। आगे डैमेज न हो इसी को सोचना होगा। सोचेंगे - कुछ करेंगे तो ठीक, अन्यथा अगले साल आने वाली रिपोर्ट को देख कर और सिर धुनियेगा।

( लेखक पत्रकार हैं।)

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