उत्तराखंड

केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को दिल्ली बुलाए जाने के बाद यहां नेतृत्व परिवर्तन की कवायद तेज हो गई है।

पर्यवेक्षक के तौर पर देहरादून पहुंचे रमन सिंह और दुष्यंत गौतम ने कोर कमेटी के सदस्यों की राय जानी। इसके अलावा इन दोनों नेताओं ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह के साथ भी लंबी चर्चा की और दिल्ली वापस आ गए।

हिमालयन योगी स्वामी वीरेन्द्रानंद गिरि महाराज ने कहा वह सत्कर्म मिशन के माध्यम से उत्तराखंड के सीमान्त क्षेत्रों में शिक्षा का प्रचार प्रसार कर रहे हैं। उन्होंने बताया एशियन एकेडमी के माध्यम से सीबीएससी बोर्ड के 10 इंटर काॅलेज संचालित किए जा रहे हैं।

उत्तराखंड में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री की शिकायतों को भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने गंभीरता से लिया है। और दो पर्यवेक्षकों को उत्तराखंड भेजा गया है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश के बाद कांग्रेस भी त्रिवेंद्र रावत से इस्तीफा मांग चुकी है।

सात सन्यासी अखाड़ो में से पांच सन्यासी अखाड़ों जूना आवाहन, अग्नि, निरंजनी तथा आनंद अखाड़े की पेशवाई हो चुकी है और इसके नागा सन्यासी व रमता पंचों ने छावनी प्रवेश कर देवता स्थापित कर दिए हैं।

बीजेपी के हाईकमान के आदेश के बाद रविवार को दो बड़े ऑब्जर्वर त्रिवेंद्र सरकार के राज्य पहुंचे हुए है। बता दें कि वहां छतीसगढ़ के पूर्व सीएम रमन सिंह और पार्टी के सचिव दुष्यंत गौतम ऑब्जर्वर के रूप में पहुंचे है।

ऋषिकेश में बाघ खाले के पास हाथी ने एक व्यक्ति को कुचल कर मार डाला। अभी तक मृतक की शिनाख्त नहीं हो पाई है। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में ले लिया है।

श्रीमहंत हरिगिरि महाराज के सानिध्य में आई.जी के.पी.सिंह ने मायादेवी तथा श्रीआनंद भैरव मन्दिर में पूजा अर्चना कर कुम्भ मेला 2021 के निर्विध्न सकुशल सम्पन्न होने की कामना के साथ किए जा रहे हवन में भी भाग लिया।

नागा सन्यासियों के सबसे बड़े अखाड़े श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े की शाही पेशवाई पारम्परिक अंदाज में पूजा अर्चना के बाद निकाली गयी। पेशवाई में भव्य झांकियों, बैण्डबाजों के अलावा हेलीकाॅप्टर से फूलों की वर्षा आकर्षण के केन्द्र रहे।

एनएच के बंद होने से चुपकोट बैंड के समीप के होटल-ढाबों में भोजन और पानी खत्म हो गया। इससे यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लोग भूखे प्यासे रहकर एनएच खुलने का इंतजार करते रहे।