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शादी में दिए गए इन सात वचनों का दांपत्य जीवन में काफी महत्व होता है। आज भी यदि इनके महत्व को समझा जाय तो वैवाहिक जीवन में आने वाली कई समस्याओं से निजात पाई जा सकती है।

कहते हैं किस्मत हमारे हाथ में ही होती है। यह किस्मत हाथ की उन रेखाओं में है जो समय के साथ बदलती रहती हैं। हथेली की रेखाओं को पढ़ कर भविष्य बताने की कला को हस्तरेखा कहते है। हस्तरेखा में उंगलियों, नाखूनों, उंगलियों के निशान, हथेली की त्वचा की बनावट व रंग, आकार, हथे

माह-माघ, पक्ष-कृष्ण, तिथि- एकादशी, दिन-सोमवार, नक्षत्र- अनुराधा, सूर्योदय-07.22, सूर्यास्त-15.40।आज षट्तिला एकादशी है आज व्रत के साथ तिल का दान करें। गरीबों को दान दें। जानते हैं आज का सोमवार कैसा रहेगा 12 राशियों जातकों के लिए

भारत में हर जगह पाया जाता ही। यह एक हमेशा हरा रहने वाला पेड़ है। इसे उदंबर, गूलर, गूलार उमरडो, कलस्टर फिग आदि नामों से जाना जाता है। इसका लैटिन नाम फाईकस ग्लोमेरेटा कहा जाता है। गूलर का पेड़ बड़ा होता है और यह उत्तम भूमि में उगता है। इसका तना मोटा होता है।

आज के समय में लोगों का रिलेशनशिप पर ज्यादा विश्वास नहीं रहा है, लेकिन ये आज की ही सिर्फ बात नहीं है, जब से सभ्यता पनपी है लोगों के अवैध संबंध भी बने है । ये अलग बात है कि आज आसानी से किसी के अवैध रिलेशनशिप की जानकारी हो जाती है।  यदि शुक्र मेष,सिंह, धनु, वृश्चिक में हो या नीच का हो

माह- माघ, पक्ष-कृष्ण, तिथि- दशमी, दिन-रविवार, नक्षत्र-विशाखा , सूर्योदय- 07.21, सूर्यास्त-17.38। आज रविवार के दिन सूर्य की उपासना करें सूर्य के तिल के साथ जल चढ़ाएं। जो भी रोग है वो क्षण भर में दूर हो जाएंगे। जानते हैं 12 राशियों का हाल...

काले​ तिल से विष्णु की पूजा करने का व्रत षटतिला एकादशी है। इस साल 20 जनवरी 2020 को पड़ रहा है। माघ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि षटतिला एकादशी के नाम से जान जाती है। इस दिन भगवान ​विष्णु और श्रीकृष्ण की आराधना विधिपूर्वक की जाती है। पूजा के समय काले तिल के प्रयोग का विशेष महत्व होता है।

माह- माघ, पक्ष-कृष्ण,  तिथि- नवमी, नक्षत्र-स्वाति, दिन शनिवार, सूर्योदय-07.20, सूर्यास्त-17.38। शनिवार के दिन किसी भी पीपल के पेड़ के नीचे तिल, तेल चढ़ाएं व दीपक जलाएं। जानिए शनिदेव की कैसी रहेगी कृपा, जानिए  राशिफल...

हिन्दू धर्म में सोलह संस्कार होते हैं और इसमें से मृत्यु को अंतिम संस्कार के रुप में मनाया जाता है। मृत्यु संस्कार में शव को श्मशान घाट तक ले जाने के लिए बांस की अर्थी का इस्तेमाल किया जाता है।

जो धरती पर आया है उसे अपने शरीर को छोड़कर एक न एक दिन जाना जरूर है क्योंकि यह धरती मृत्यु लोक है यानी यहां पर मृत्यु का साम्राज्य है। लेकिन मृत्यु के लिए हर व्यक्ति का समय निर्धारित है और उसी समय उसे जाना होता है।