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जयपुर: माह आश्विन, तिथि – द्वितीया, पक्ष – कृष्ण, वार – सोमवार,नक्षत्र – रेवती, सूर्योदय – 06:06,सूर्यास्त – 18:25, चौघड़िया अमृत – 06:10 से 07:41,शुभ – 09:13 से 10:44,चर – 13:47 से 15:19,लाभ – 15:19 से 16:50,अमृत – 16:50 से 18:22

आश्विन माह के कृष्ण पक्ष अष्टमी को माताएं जिउतिया व्रत स्वस्थ संतान और उसकी लंबी आयु  के लिए व्रत रखती है ये व्रत हर पुत्रव्रती महिला रखती है। इस बार 21 और 22 सितंबर को जिउतिया का व्रत रखेंगी। इस व्रत में निर्जला व निराहार रहना पड़ता है।

प्राय: कुछ लोग यह शंका करते हैं कि श्राद्ध में समर्पित की गईं वस्तुएं पितरों को कैसे मिलती है? कर्मों की भिन्नता के कारण मरने के बाद गतियां भी भिन्न-भिन्न होती हैं। कोई देवता, कोई पितर, कोई प्रेत, कोई हाथी, कोई चींटी, कोई वृक्ष और कोई तृण बन जाता है।

श्राद्ध के समय पितर लोक से पूर्वज आते हैं। उनका आशीर्वाद बना रहे इसके लिए पूर्वजों का श्राद्ध  किया जाता है। इन दिनों में पूर्वजों की आत्मा धरती पर आती हैं और भोग लगाने से उन्हें संतुष्टि होती हैं। इससे प्रसन्न होकर पित्तर अपना आशीर्वाद देते हैं। इ

हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष में एक पखवारे तक घर-घर में पितरों का पूजन और तर्पण होता है। श्राद्ध सोलह संस्कारों में एक प्रमुख संस्कार है जिसे मृतक की अगली पीढ़ी अपने स्वर्गवासी पितृ की मृत्यु के उपरांत इस संस्कार को करती है।

माह – आश्विन,तिथि – प्रतिपदा ,पक्ष – कृष्ण,वार – रविवार,नक्षत्र – उत्तराभाद्रपद,सूर्योदय – 06:05,सूर्यास्त – 18:26, चौघड़िया चर – 07:41 से 09:13, लाभ – 09:13 से 10:45, अमृत – 10:45 से 12:16, शुभ – 13:48 से 15:20

वेद-पुराणों से लेकर उपनिषदों तक में गर्भधारण से लेकर मृत्योपरांत तक  के संस्कारों का वर्णनहै। इन्हीं संस्कारों में से एक है पितृ पक्ष। इस बार 13 व 14 सितंबर से पितृपक्ष शुरु हो गया। इस दौरान व्यक्ति अपने पितरों को तर्पण देने के साथ उनका श्राद्ध भी करता है।

माह – भाद्रपद,तिथि – पूर्णिमा, पक्ष – शुक्ल, वार – शनिवार नक्षत्र – पूर्वाभाद्रपद , सूर्योदय – 06:05, सूर्यास्त – 18:28 चौघड़िया- शुभ – 07:41 से 09:13, चर – 12:17 से 13:48, लाभ – 13:48 से 15:20, अमृत – 15:20 से 16:52।

काशी को मोक्ष की नगरी भी कहा जाता है कहते हैं यहां जो इंसान अंतिम सांस लेता है उसे मोक्ष  मिलता है। जिन लोगों की मृत्यु यहां नहीं होती उनका अंतिम संस्कार यहां  पर कर देने मात्र से ही मोक्ष मिलता है। इसके साथ ही काशी में एक ऐसा कुंड भी है

माह भाद्रपद,तिथि चतुर्दशी – 07:37,पक्ष – शुक्ल,वार – शुक्रवार,नक्षत्र – शतभिषा ,सूर्योदय – 06:04,सूर्यास्त – 18:29,चौघड़िया चर – 06:08 से 07:41,,लाभ – 07:41 से 09:13,अमृत – 09:13 से 10:45, शुभ – 12:17 से 13:49,चर – 16:53 से 18:25।