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Rana Sanga Controversy: झूठ सच नहीं हो जाता है, सांसद ही क्यों न बोले!
Rana Sanga Controversy: सपा सासंद रामजी लाल सुमन ने हाल ही में राणा सांगा पर एक बयान दिया, जिसके बाद से वह चर्चा में बने हुए है, लेकिन क्या उनका दिया गया बयान सत्य है, या महज सुनी सुनाई बातें।
Rana Sanga Controversy (फोटो साभार- सोशल मीडिया)
Rana Sanga Controversy: हिटलर के प्रचार सचिव गोएबेल्स ने कहा था कि एक झूठ सौहार्द बोला जाये तो सच हो जाता है। भारत के लोग वैसे भी बहुत चतुर सुजान हैं, इसलिए भारत के सांसदों ने यह मान लिया है कि झूठ सच हो जाता है। अगर सफेद कपड़े पहन कर बोला जाये। संसद में बोला जाये। इसलिए सफेद कपड़े पहनने वाले राजनेताओं को यह गुमान हो गया है कि अगर वे झूठ बोलते हैं, तो वह कभी भी सच हो सकता है और उन्हें एक झूठ को सौ बार बोलने की ज़रूरत ही नहीं है। एक बार बोलेंगे तो सच हो जायेगा। इसलिए इतिहास के तथ्यों को वे प्रायः तोड़ मरोड़ कर पेश करते हैं। जब जो चाहते हैं, वह बोल देते हैं क्योंकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के वही रखवाले हैं। हमें आप को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता उनके मार्फ़त ही मिलती है। इसलिए जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का रखवाला है, वह निश्चित तौर से उसका ज़्यादा सदुपयोग या दुरूपयोग दोनों कर सकता है। वह कर क्या रहा है, इसे आप सब मिलकर तय कीजिए ।
ऐसा करने के पीछे राजनेताओं का भारतीय इतिहास के प्रति ज्ञान नहीं होना भी है। सुनी सुनाई बातों को तूल देकर वे ऐतिहासिक असत्य को तर्क के रुप में इस्तेमाल करते हैं। इसका हालिया उदाहरण है समाजवादी पार्टी के सासंद रामजी लाल सुमन का यह कहना कि चित्तौड़ के राणा सांगा (Rana Sanga) ने लोदी बादशाह इब्राहिम लोदी को हराने और हटाने के लिए उजबेकी लुटेरे मोहम्मद जहीरुद्दीन बाबर (Muhammad Zahiruddin Babur) को भारत बुलाया था। इस सांसद को अपने गुरु डॉ. राममनोहर लोहिया के इतिहास पर लिखे ग्रन्थ को ज़रूर पढ़ना चाहिए। लोहिया जी की इस बाबत एक किताब है। जिसका नाम है ‘इतिहास चक्र’ ( Wheel of History)। उसमें उन्होंने इस तरह के तमाम भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश की है। लेकिन राजनेताओं को तो पढ़ने का समय ही नहीं है। पढ़ना उनकी आदत में नहीं है। उनकी तौहीन है।
रामजी लाल सुमन के लिए जानना जरूरी हो जाता है कि भारतीय इतिहास गवाह है कि महाराणा संग्राम (Maharana Sangram Singh I) ने जर्जर लोधी साम्राज्य के अंतिम बादशाह इब्राहिम लोदी को कई बार हराया था। बेहतर होता लोहिया का यह अनुयायी खानजादा राजा हसन खान मेवाती का जिक्र करता। यह राजा हसन मेवाती ही थे। जिन्होंने राणा सांगा के साथ बाबर से लड़ाई की थी।
राजा हसन खां और बाबर की लड़ाई
(फोटो साभार- सोशल मीडिया)
खानजादा राजा हसन खान मेवाती जहीरूद्दीन बाबर से खंडवा कंवाहा के मैदान में लड़े थे। चित्तौड़ के राजा संग्राम सिंह के साथ थे। इसीलिए बाबर को राजपूत और सुन्नी-अफगान संयुक्त सेना से मुकाबला करना पड़ा था। राजा हसन खान का जन्म अलावल खां मेवाती के घर हुआ था। उनके वंशज करीब 200 साल मेवात की रियासत पर राज करते रहे। बाबर उस समय हसन खां मेवाती से भी भयभीत था। हसन खां का क्षेत्र मेवात यानी दिल्ली के समीप था। इस कारण हमेशा ही वह बाबर की आंखों में चुभता रहा। अतः बाबर ने राजा हसन खां को यह कहा कि हम और तुम दोनों एक ही धर्म के लोग हैं।
उन्हें लालच दिया, ताकि मेवात की रियासत की गद्दी पर कब्जा किया जा सके। लेकिन राजा हसन खां बाबर के लालच में नहीं आए। उन्होंने कहा : “तू विदेशी हमलावर है, इसलिए मैं अपने वतन के भाई राणा सांगा का साथ दूंगा।” खंडवा के मैदान में भयंकर युद्ध शुरू हुआ। राजा हसन खां मेवाती अपने लाव-लश्कर और 1,200 सैनिकों को साथ लेकर राणा सांगा की मदद के लिए युद्ध के मैदान में कूद पड़े। लड़ते हुए हसन खां और उनके बेटे नाहर खान 15 मार्च, 1527 को मैदान में शहीद हो गए।
बाबर का पत्र और राजा हसन ख़ान का जवाब
(फोटो साभार- सोशल मीडिया)
ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि हसन खां को बाबर ने किस किस तरह के प्रलोभन दिये। और क्या क्या नहीं कहा। इतिहास के पन्ने पलटें तो पता चलता है कि राजा हसन खान मेवाती को बाबर ने एक ख़त लिखा था। उस ख़त में लिखा था : “बाबर भी कलमा-गो है और हसन ख़ान मेवाती तुम भी कलमा-गो है, इस प्रकार एक कलमा-गो दूसरे कलमा-गो का भाई है। इसलिए राजा हसन ख़ान मेवाती को चाहिए की बाबर का साथ दे।”
लेकिन बाबर के इस ख़त का जो जवाब राजा हसन ख़ान ने दिया। वह दिलचस्प है। उन्होंने कहा: “बेशक़ हसन ख़ान मेवाती कलमा-गो है और बाबर भी कलमा-गो है, मग़र मेरे लिए मेरा मुल्क पहले है और यही मेरा ईमान है। इसलिए मैं राणा सांगा के साथ मिलकर बाबर के खिलाफ युद्ध करूंगा।” भारतीय मुसलमानों को सदैव याद रखना होगा कि इब्राहिम लोदी भारतीय बादशाह था। भारत में जन्मा, पला और यहीं सुल्तान बना। उसे उज्बेकी डाकू जहीरूद्दीन बाबर ने मार डाला। बाबर ने इब्राहिम पर जेहाद बोला था। क्या विकृति थी ? जब बाबर हसन खान को मारता है, तब नहीं सोचता है। बाबर को भारत का निर्माता मानने वाले विकृति मानसिकता की जमात पर दुख होता है।
तैमूर ने अपने विरोधियों के खिलाफ, उनकी धार्मिक मान्यताओं के बावजूद, एक अभ्यास तैयार किया। खोपड़ी का टॉवर बनाने का उद्देश्य सिर्फ यह महान जीत दर्ज करना नहीं था, बल्कि विरोधियों को आतंकित करना भी था।
बाबरनामा पर यकीन क्यों करना चाहिए?
(फोटो साभार- सोशल मीडिया)
बाबर ने पहले भी दिल्ली पर आक्रमण किया था। ऐसे में जो लोग बाबर को बुलाने की बात कह रहे हैं, उनके लिए यह जानना जरूरी हो जाता है कि यदि राणा सांगा ने उसे बुलाया होता तो उसके पहले के आक्रमण किस उद्देश्य से किए गए थे। 1505 में बाबरनामा में बाबर ये बातें क्यों लिखी हैं कि दिल्ली तैमूर का इलाका है और वो इसे प्राप्त करना चाहता है। उन्होंने कहा कि लोदी के दो रिश्तेदार दौलत खान और अलम लोदी बाबर को बुलाने जाते हैं। सांगा ने न्योता दिया था, इसका उल्लेख सिर्फ बाबरनामा में किया गया है। इसके अलावा किसी इतिहासकार इस बात का कोई ज़िक्र नहीं किया है। बाबरनामा पर हमें यकीन क्यों करना चाहिए। वह भी तब जब भारत की सभ्यता व संस्कृति पर इतने कुठाराघात बाबर ने किये। बाबर ने उस समय सामाजिक विघटन किया। लोगों को धर्म परिवर्तन करने के लिए मजबूर किया। एक किताब में लिखी हुई एक छोटी सी बात को आप सच मानते हैं। और दुनिया के किसी भी इतिहास की किताब में इस बात का ज़िक्र नहीं है। तो आप उस पर यकीन करने को तैयार क्यों नहीं हैं। साफ़ है। आपका मन साफ़ नहीं है। आपका दिमाग़ साफ़ नहीं है।
वैसे भी इब्राहिम लोदी इतना बड़ा शासक नहीं था कि उसके लिए बाबर को बुलाया जाता। राणा सांगा पहले भी इब्राहिम लोदी को युद्ध में हरा चुके थे।
बाबर-राणा सांगा के विवाद में मुगलों से हमदर्दी जता रहे तमाम नेता सासंद, विधायक कुछ न कुछ बोलने के लिए मुँह खोल देते हैं। उन्हें यह जानना चाहिए कि नेहरू ने मुगल साम्राज्य के बारे में अपनी किताब "डिस्कवरी ऑफ इंडिया" में लिखा है कि औरंगजेब कट्टर था और उसने हिंदुओं पर जजिया कर लगाया। उनके मंदिरों को नष्ट किया, जिससे साम्राज्य में असंतोष बढ़ा।
कुछ बोलने से पहले सच जानना जरूरी
अपने माननीयों से, सासंदों से, राजनीतिक दल तो अपील करेंगे ही नहीं कि वे कुछ पढ़ें, और जिन्हें उन्होंने अपना प्रतीक पुरुष बना रखा है, प्रेरणा पुरुष बना रखा है, जिनके चित्र उन्होंने अपने बैनर और पोस्टर पर लगा रखे हैं, उनके बारे में जानें। पर हम जनता के लोग यह अपील कर सकते हैं कि कुछ बोलने से पहले कुछ पढ़ लिया कीजिए महाराज! आप भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। और आप के प्रतिनिधित्व करने की वजह से ढेर सारे भारतवासियों को कई बार शर्मसार होना पड़ता है।