पर्यटन

ज्येष्ठ महीने में पड़ने वाला चौथा व आखिरी बड़ा मंगल है आज। इस बार लॉकडाउन में मंदिरों के पट बंद होने हनुमान जी के दर्शन नही किया जा सका। ज्येष्थ का बड़ा मंगल हनुमान जी की आराधना के लिए बेहद खास होता है।

: उत्तराखंड के कुमाऊं मण्डल  में अल्मोड़ा जिला है, अल्मोड़ा एक पहाड़ी जिला है जो की घोड़े के खुर के समान है। अल्मोड़ा जिले का क्षेत्रफल 3072 वर्ग किलोमीटर है। एक कथा के अनुसार कहा जाता है कि अल्मोड़ा की कौशिका देवी ने शुम्भ और निशुम्भ नामक दानवों को इसी क्षेत्र में मारा था।

शहर से करीब आठ किमी दूर मटसेना रोड पर बिलहना गांव में नगरसेन बाबा के नाम से एक प्राचीन मंदिर बना है। इस मंदिर की अनोखी परंपरा है कि नगरसेन बाबा पर अंडा फेंककर मांगी हुई मुराद पूरी हो जाती है। मनौती मांगने के लिए यहां दूसरे जिलों और प्रांतों से भी श्रद्धालु आते हैं।

लॉकडाउन कुछ दिनों या कुछ महिनों बाद खत्म हो जाएगा। लोग नॉर्मल तो नहीं, लेकिन कुछ सावधानियों के साथ जिंदगी जीने लगेंगे। सफर पर निकलने लगेंगे और ऑफिस भी जाना शुरु कर देंगे। लेकिन सबसे ज्यादा जो परेशानी की बात है वो सफर है।

दिल्ली के जमुना बाजार में स्थित हनुमान मंदिर दुनियाभर में फेमस है। ये प्राचीन मंदिर मरघट वाले बाबा हनुमान के नाम से प्रसिद्ध है। दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास हनुमान जी के दर्शन को दिल्ली के हजारों लोग प्रतिदिन आते हैं

श में ऐसी कई जगहें हैं जिनका संबंध रामायण आयर महाभारत से माना जाता हैं और उनकी ये विशेषता उन्हें अनोखा बनाती हैं। आज इस कड़ी में हम एक ऐसी गुफा के बारे में बात करने जा रहे हैं जिसका संबंध महाभारत से जाना जाता हैं और कहा जाता हैं

 दुनिया में कई जगहें और कई चीजें है जो आश्चर्य से भरी है। उन जगहों पर जाना हर किसी को अच्छा लगता है। इसी तरह की जगहों में एक शहर है जहां जाकर आप आना नहीं चाहेंगे। वो जगह जमीन के नीचे बसा है। आस्ट्रेलिया के कूबर पेडी टाउन की।

गावों में ही मिलता हैं।देश के ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपनी अनोखी विशेषता के चलते पूरे विश्व में जाने जाते है और यहां जाना आपके लिए एक अद्भुद अहसास होता हैं। तो  जानते है देश के उन गांवों के बारे में जो माने जाते है विशेष।

दूरदर्शन पर रामायण में  रावण का वध हो चुका है, और उत्तर रामायण शुरू हो गया है। जिसमे राजा राम व लव-कुश के जन्म की कथा का वर्णन हैं। सीता समेत श्रीराम चंद्र जी वनवास पूरा करके वापस अयोध्या आ गए हैं।  कहने का मतलब ये है कि प्रभु श्रीराम के जीवनकाल में एक समय ऐसा भी आया जब जिसने उन्हें राजगद्दी से हटाकर 14 साल का वनवास दे दिया।

रघुनंद का नाम आते ही आंखों के सामने उनकी जन्म स्थली आयोध्या घूमने लगती है। ये तो सभी जानते है कि श्री राम जी का संबंध अयोध्या से है। वहां उनके होने का साक्ष्य भी है, लेकिन शायद बहुत कम लोगों को पता होगा कि उनका संबंध झारखंड से भी है। यहां के लोगों  का कहना है कि  यहां भी भगवान राम आए है।