18 April 2026 Ka Panchang Kya Hai : 18 अप्रैल को क्या है खास, जानिए आज का पंचांग
18 April 2026 Ka Panchang in Hindi : आज के पंचांग में तिथि, नक्षत्र, योग और राहुकाल,देखे आज का पंचांग आज का पञ्चाङ्ग 18 अप्रैल 2026: , आज के पंचांग में तिथि, नक्षत्र, योग और राहुकाल के साथ दिन के खास मुहूर्त की जानकारी पढ़ें।
18 April 2026 Ka Panchang in Hindi: ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का बहुत महत्व है । पंचांग ज्योतिष के पांच अंगों का मेल है। जिसमें तिथि,वार, करण,योग और नक्षत्र का जिक्र होता है। इसकी मदद से हम दिन के हर बेला के शुभ और अशुभ समय का पता लगाते हैं। उसके आधार पर अपने खास कर्मों को इंगित करते हैं।
आज 18 अप्रैल 2026, 18 अप्रैल 2026, शनिवार के दिन वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है (दोपहर 2:11 PM तक)। इस दिन चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है, जो नए चंद्र मास की शुरुआत का प्रतीक है शनिवार को राहु 09:16 AM से 10:51 AM तक है , चन्द्रमा मेष राशि पर संचार करेगा। देखिए आज का पंचांग...
आज 18 अप्रैल का पंचांग
हिन्दू मास एवं वर्ष
विक्रम संवत - 2083, सिद्धार्थि
शक सम्वत - 1948, पराभव
पूर्णिमांत - चैत्र
अमांत - चैत्र
विक्रम संवत - 2083, सिद्धार्थि
शक सम्वत - 1948, पराभव
पूर्णिमांत - चैत्र
अमांत - चैत्र
आज की तिथि
तिथि: शुक्ल पक्ष प्रतिपदा – दोपहर 2:11 PM तक
वार: शनिवार
नक्षत्र: अश्विनी – सुबह 9:43 AM तक
योग: प्रीति – रात 11:56 PM तक
करण: बव – दोपहर 2:09 PM तक
सूर्य राशि: मेष
चंद्र राशि: मेष
ऋतु: वसंत
अयन: उत्तरायण
दिशाशूल: पूर्व
चंद्र निवास: पूर्व
वार: शनिवार
नक्षत्र: अश्विनी – सुबह 9:43 AM तक
योग: प्रीति – रात 11:56 PM तक
करण: बव – दोपहर 2:09 PM तक
सूर्य राशि: मेष
चंद्र राशि: मेष
ऋतु: वसंत
अयन: उत्तरायण
दिशाशूल: पूर्व
चंद्र निवास: पूर्व
सूर्य और चंद्रमा का समय
सूर्योदय: 5:34 AM
सूर्यास्त: 6:23 PM
चंद्रोदय: 5:47 AM
चंद्रास्त: 7:30 PM
शुभ- अशुभ काल
अभिजीत मुहूर्त - 12:01 PM – 12:51 PM
अमृत काल - 02:52 AM – 04:18 AM
ब्रह्म मुहूर्त - 04:30 AM – 05:18 AM
विजय मुहूर्त-14:08 — 14:58
गोधूलि मुहूर्त-18:17 — 18:42
सायाह्न सन्ध्या-18:19 — 19:28
निशिता मुहूर्त-23:39 — 00:25
सर्वार्थसिद्धि योग - Apr 17 12:02 PM - Apr 18 06:07 AM (
अमृतसिद्धि योग -नहीं
अशुभ काल
राहू - 9:16 AM – 10:51 AM
यम गण्ड - 2:00 PM – 3:35 PM
कुलिक - 6:07 AM – 7:42 AM
दुर्मुहूर्त - 07:48 AM – 08:39 AM
वर्ज्यम् - 06:05 AM – 07:32 AM, 06:17 PM – 07:43 PM
आनन्दादि योग
सौम्य Upto - 09:42 AM
ध्वांक्ष
गण्डमूल नक्षत्र
पूरे दिन
चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
काल (काल वेला) 06:07 AM 07:42 AM
शुभ 07:42 AM 09:16 AM
रोग 09:16 AM 10:51 AM
उद्बेग 10:51 AM 12:26 PM
चर 12:26 PM 14:00 PM
लाभ (वार वेला) 14:00 PM 15:35 PM
अमृत 15:35 PM 17:10 PM
काल (काल वेला) 17:10 PM 18:44 PM
रात का चौघड़िया
लाभ (काल रात्रि) 18:44 PM 20:10 PM
उद्बेग 20:10 PM 21:35 PM
शुभ 21:35 PM 23:00 PM
अमृत 23:00 PM 00:25 AM
चर 00:25 AM 01:51 AM
रोग 01:51 AM 03:16 AM
काल 03:16 AM 04:41 AM
लाभ (काल रात्रि) 04:41 AM 06:06 AM
ध्यान दें
प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
शाम के समय चंद्रमा के दर्शन करें और अर्घ्य दें।
भगवान विष्णु और अपने इष्ट देव का स्मरण करें।
घर में दीपक जलाकर पूजा-अर्चना करें।
जरूरतमंदों को दान देना शुभ माना जाता है।
दिनभर सकारात्मक विचार रखें और शुभ कार्यों की शुरुआत करें।
पंचांग क्या होता है?
पंचांग ज्योतिष के पांच अंगों का मेल है। जिसमें तिथि,वार, करण,योग और नक्षत्र का जिक्र होता है। हर दिन की तिथि का निर्धारण सूर्य और चंद्मा में भेद के आधार पर होता है और पंचांग के आधार पर हर दिन के शुभ-अशुभ समय का निर्धारण करते हैं। इसके आधार पर अपने काम को आसान बनाते हैँ। आज का पंचांग में तिथि, पक्ष, माह, नक्षत्र भी देखना जरुरी होता है। क्योंकि हर एक शुभ कार्य के लिए अलग अलग नक्षत्र होता है। सूर्योदय से दूसरे दिन सूर्योंदय के कुछ पहर पहले तक ही एक तिथि मानी जाती। चंद्रमा का स्थान जिस दिन चंद्रमा जिस स्थान पर होता है। उस दिन वही नक्षत्र और राशि मानी जाती है। चंद्रमा एक राशि में ढ़ाई दिन तक रहते हैं।
तिथि वारं च नक्षत्रं योगं करणमेव च।
पंचांगस्य फलं श्रुत्वा गंगा स्नानं फलं लभेत् ।।
आदिकाल में ही इस श्लोक के माध्यम से पंचांग को परिभाषित किया है।
- तिथि- पंचांग का पहला अंग तिथि है। जो 16 है। इनमें पूर्णिमा और अमावस्या दो प्रमुख तिथियां है। जो दो पक्षों का निर्धारण करते हैं। कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष। पूर्णिमा और अमावस्या दोनों तिथि माह में एक बार आती है।
- नक्षत्र- नक्षत्र 27 होते हैं। लेकिन एक मुहूर्त अभिजीत नक्षत्र है जो शादी विवाह के समय देखा जाता है। इसे मिला कर 28 नक्षत्र भी कहे जाते है।
- योग- 27 होते है। मनुष्य के जीवन में योग का बहुत महत्व है।
- करण- 11 होते हैं। 4 स्थिर व 7 परिवर्तनशील है।
- वार- सप्ताह में 7 दिन होते हैं। जो रविवार से शुरू, सोमवार, बुधवार, बृहस्पतिवार, शुक्रवार, और शनिवार पर खत्म होते हैं।