Apara Ekadashi 2026: अपरा एकादशी की महिमा, पूजा-विधि, मुहूर्त, जानें पारणा का समय कब होगा?

Apara Ekadashi 2026 : 13 मई को उत्तरभाद्रपदा नक्षत्र में विष्कुम्भ योग के साथ अपरा एकादशी की शुरुआत होगी। जानिए इस दिन पूजा का शुभ समय पूजा विधि औरर महत्व...

Update:2026-05-12 08:08 IST

Apara Ekadashi 2026 Kab Hai: 13 मई को अपरा एकादशी का  व्रत होगा।  हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की दो एकादशी होती है। इस दिन श्री हरि और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के पुण्य प्रताप से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और प्रभु का आशीर्वाद मिलता है। 

अपरा एकादशी का अर्थ है अपार फल देने वाला व्रत। इसलिए अपरा एकादशी का महत्व है। इस दिन भगवान की कृपा पाने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठें ,स्‍नान करें और स्‍वच्‍छ पीले वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प करें। इसके बाद अक्षत, फूल, मौसमी फल, नारियल और मेवे और तुलसी से भगवान विष्‍णु की पूजा करें। एकादशी के दिन सूर्य को भी जल चढ़ाने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है। अंत में कथा सुनकर पूरे दिन निर्जला व्रत का पालन करें और शाम के समय तुलसी को गाय के घी का दीपक जलाएं। अपरा एकादशी या किसी भी एकादशी में सोना नहीं चाहिए ।अगले दिन स्नान दान के बाद ही व्रत तोड़ना चाहिए।

अपरा एकादशी का शुभ मुहूर्त (Apara Ekadashi shubh muhurat)

इस बार अपरा एकादशी के दिन नक्षत्र उत्तरभाद्रपदा 12:17 AM तक उपरांत रेवती रहेगा और विष्कुम्भ योग 08:54 PM तक, उसके बाद प्रीति योग रहेगा। पहले दोनों ही योग में किया गया कार्य शुभ परिणाम देने वाला है।

 ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 12 मई 2026 को दोपहर 2.52 मिनट पर शुरू होगी,
 यह तिथि 13 मई 2026 को दोपहर 1. 30 मिनट तक रहेगी।
एकादशी व्रत हमेशा उदया तिथि के अनुसार रखा जाता है। ऐसे में मई 2026 की पहली एकादशी यानी अपरा एकादशी का व्रत 13 मई 2026, बुधवार को रखा जाएगा। 14 मई को व्रत पारण किया जाएगा।

अमृत काल - 07:19 PM – 08:51 PM

ब्रह्म मुहूर्त - 04:14 AM – 05:02 AM

सर्वार्थसिद्धि योग - May 13 01:17 AM - May 13 05:50 AM 

इस बार अपरा एकादशी का व्रत 13 मई को रखा जाएगा। मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की इस दिन पूजा करने से भूत-प्रेत का डर नहीं रहता है। इस दिन व्रत रखने से मौत के बाद भी ईश्वर की कृपा बनी रहती हैं। बड़ा से बड़ा पाप धूल जाता है। स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

अपरा एकादशी 2026 पारण समय

अपरा एकादशी व्रत के पारण का समय 14 मई को पारण का शुभ समय सुबह 6. 4 मिनट से 8 .41 मिनट तक रहेगा। इस समय के भीतर व्रत खोलना शुभ माना जाएगा

अपरा एकादशी का महत्व क्या है?

अपरा एकादशी के दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु की पूजा करने से हर क्षेत्र में चाहे वो महामारी ही क्यों ना हो विजय प्राप्त होती है। जीवन में कोई कष्ट नहीं होता है। बड़ी से बड़ी महामारी भी पास नहीं भटकती है। कोरोना जैसी महामारी से भी बचने के लिए इस दिन स्वच्छ पीले वस्त्र धारण कर संकल्प के साथ तुलसी और माखन-मिश्री से भगवान विष्णु की पूजा करें और अपरा एकादशी का व्रत रखें। पूरे दिन एक माला ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप महामारी से बचाव में रक्षा कवच का काम करता है।

अपरा एकादशी पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल, फल और पंचामृत अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। विष्णु सहस्त्रनाम और गीता पाठ का भी विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन सात्विक भोजन करें और कई लोग निर्जल या फलाहार व्रत भी रखते हैं। शाम के समय भगवान विष्णु की आरती करें और जरूरतमंदों को दान देना शुभ माना जाता है।

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