हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का दुर्लभ संयोग: भूलकर न करें ये गलती, यहां दूर करें सारा कन्फ्यूजन
Hartalika Teej Ganesh Chaturthi 2026: इस बार सितंबर को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन पड़ रही हैं। जानें पहले किसकी पूजा करें, तीज का विसर्जन कब करें और गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त।
Hartalika Teej and Ganesh Chaturthi 2026: सावन आते ही त्योहारों का सीजन शुरु हो जाता है। हिंदू धर्म में भाद्रपद माह का विशेष धार्मिक महत्व है। इसी माह में हरतालिका तीज और भगवान गणेश की पूजा से जुड़े दो बड़े पर्व हैं। हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी अलग-अलग दिनों में मनाई जाती हैं, क्योंकि हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को होती है, जबकि गणेश चतुर्थी चतुर्थी तिथि में मनाई जाती है। लेकिन साल 2026 में तिथियों के विशेष संयोग के कारण 14 सितंबर को दोनों व्रत और पर्व एक ही दिन पड़ने की स्थिति बन रही है।
हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन हैं, तो सबसे पहले किसकी पूजा करनी चाहिए? हरतालिका तीज की बालू या मिट्टी से बनी प्रतिमाओं का विसर्जन कब होगा और भगवान गणेश की स्थापना किस समय की जाएगी? क्या तीज की पूजा समाप्त किए बिना गणपति की स्थापना की जा सकती है? जानते हैं इस विशेष संयोग में पूजा का नियम।
तृतीया तिथि का समय
तृतीया तिथि प्रारंभ: 13 सितंबर 2026 को सुबह 07:08 बजे
तृतीया तिथि समाप्त: 14 सितंबर 2026 को सुबह 07:06 बजे
14 सितंबर को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि का प्रभाव रहेगा और इसके समाप्त होने के बाद चतुर्थी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। हरतालिका तीज की तिथि में उदया तिथि का विशेष महत्व है, जबकि गणेश चतुर्थी की पूजा और स्थापना के लिए मध्याह्न काल में चतुर्थी तिथि का होना जरूरी है। यही कारण है कि इस बार दोनों पर्व एक ही दिन मनाए जाएंगे।
14 सितंबर 2026 के प्रमुख पूजा मुहूर्त
हरतालिका तीज प्रातःकाल पूजा मुहूर्त: सुबह 06:26 बजे से 07:06 बजे तक।
गणेश स्थापना का अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:09 बजे से 12:58 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:42 बजे से 07:05 बजे तक।
एक ही दिन क्यों पड़ रहे हैं हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी?
हरतालिका तीज तृतीया तिथि में और गणेश चतुर्थी अगले दिन चतुर्थी तिथि में आती है। लेकिन कई बार तिथियों की अवधि और उदया तिथि के नियम के कारण दोनों व्रत एक ही दिन पड़ सकते हैं।
इस बार तृतीया तिथि 13 सितंबर को शुरू होकर 14 सितंबर की सुबह 07:06 बजे समाप्त हो रही है। 14 सितंबर को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि होने के कारण हरतालिका तीज का व्रत इसी दिन माना जा रहा है। वहीं, दिन के मध्याह्न काल में चतुर्थी तिथि होने के कारण गणेश चतुर्थी भी 14 सितंबर को मनाई जाएगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्योदय के समय तृतीया तिथि होने पर हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है, जबकि मध्याह्न काल में चतुर्थी तिथि होने पर गणेश चतुर्थी की पूजा की जाती है।
पहले हरतालिका तीज की पूजा करें या गणेश स्थापना?
इस विशेष संयोग में दोनों पूजाओं को अलग-अलग समय पर करना सबसे सुविधाजनक है। हरतालिका तीज की पूजा प्रातःकाल की जा सकती है, जबकि गणेश जी की स्थापना मध्याह्न के शुभ समय में की जा सकती है।
हरतालिका तीज में भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं। कई महिलाएं निर्जला व्रत भी करती हैं।
प्रातःकाल तीज की पूजा, कथा और अन्य धार्मिक विधियां पूरी करने के बाद व्रत के नियमों के अनुसार पारण किया जा सकता है। इसके बाद पूजा स्थल को व्यवस्थित कर भगवान गणेश की स्थापना की जा सकती है।
हरतालिका तीज की मूर्तियों का विसर्जन कब करें?
हरतालिका तीज में कई स्थानों पर बालू या मिट्टी से भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनाई जाती है। पूजा पूरी होने के बाद इन प्रतिमाओं का विधि-विधान से विसर्जन किया जाता है।
यदि घर में हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों की पूजा होनी है, तो तीज की पूजा समाप्त करने के बाद शिव-पार्वती की प्रतिमाओं और पूजन सामग्री का विसर्जन किया जा सकता है। इसके बाद पूजा स्थान को साफ करके गणपति की स्थापना के लिए अलग चौकी तैयार की जा सकती है।
यदि किसी कारणवश विसर्जन तुरंत करना संभव न हो, तो घर की परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा का क्रम निर्धारित किया जा सकता है।
गणेश स्थापना के लिए अलग चौकी रखें
हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों की पूजा एक ही दिन होने पर पूजा स्थल को लेकर भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। यदि संभव हो तो दोनों देवी-देवताओं के लिए अलग-अलग चौकी की व्यवस्था करें।
हरतालिका तीज की पूजा के लिए शिव-पार्वती की प्रतिमा या पूजन स्थल अलग रखें। वहीं गणेश स्थापना के लिए नई और स्वच्छ चौकी तैयार करें। चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जा सकती है।
गणपति स्थापना से पहले स्थान की साफ-सफाई करें और श्रद्धा के साथ भगवान गणेश का आवाहन करें। इसके बाद फूल, दूर्वा, मोदक, लड्डू और अन्य सामग्री अर्पित कर पूजा करें।
निर्जला व्रत रखने वाली महिलाएं क्या करें?
हरतालिका तीज का व्रत कई महिलाएं निर्जला रखती हैं। ऐसे में यदि उसी दिन गणेश स्थापना भी करनी हो, तो पूजा के क्रम को पहले से व्यवस्थित करना जरूरी है।प्रातःकाल हरतालिका तीज की पूजा और कथा पूरी करने के बाद व्रत के नियमों और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पारण किया जा सकता है। इसके बाद कुछ समय विश्राम करके दोपहर के शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश की स्थापना की जा सकती है।
यदि किसी महिला के लिए व्रत के कारण सभी व्यवस्थाएं करना कठिन हो, तो परिवार के अन्य सदस्य गणेश स्थापना की तैयारी में सहयोग कर सकते हैं। धार्मिक कार्यों में मुख्य बात श्रद्धा और विधि का पालन माना जाता है।
गणेश चतुर्थी की पूजा कब करें?
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की स्थापना के लिए मध्याह्न काल को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि भगवान गणेश का प्राकट्य दोपहर में हुआ था, इसलिए इस समय गणेश पूजा करना शुभ है।
14 सितंबर को गणेश स्थापना के लिए दोपहर 12:09 बजे से 12:58 बजे तक अभिजीत मुहूर्त बताया गया है। इस दौरान गणपति की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की जा सकती है।
भगवान गणेश को दूर्वा, लाल फूल, मोदक और लड्डू विशेष रूप से प्रिय माने जाते हैं। पूजा के बाद आरती करें और परिवार के सदस्यों में प्रसाद वितरित करें।
क्या दोनों पूजाएं एक साथ की जा सकती हैं?
हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों अलग-अलग धार्मिक परंपराओं और पूजा विधियों से जुड़े पर्व हैं। इसलिए यदि संभव हो तो दोनों की पूजा अलग-अलग समय और अलग चौकी पर करना अधिक सुविधाजनक रहेगा।
तिथि निर्धारण के लिए सूर्योदय और मध्याह्न काल जैसे नियम बनाए गए हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि पूजा केवल उसी सीमित समय में करना अनिवार्य हो। यदि किसी कारणवश दोनों पूजाएं निर्धारित समय पर करना संभव न हो, तो घर की परंपरा और उपलब्ध परिस्थितियों के अनुसार पूजा का क्रम रखा जा सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूजा जल्दबाजी या भ्रम की स्थिति में न की जाए। पहले से पूजन सामग्री तैयार रखें और दोनों पर्वों की पूजा अलग-अलग विधि से पूरी श्रद्धा के साथ करें।
14 सितंबर 2026 को पूजा कैसे करें
इस विशेष संयोग में आप पूजा का क्रम इस प्रकार रख सकते है,,,
सुबह: हरतालिका तीज का व्रत, शिव-पार्वती की पूजा और कथा करें।
तृतीया समाप्त होने के बाद: परंपरा के अनुसार तीज की पूजा संपन्न करें और आवश्यक होने पर बालू या मिट्टी की प्रतिमाओं का विसर्जन करें।
दोपहर: गणेश स्थापना के लिए अलग चौकी तैयार करें और शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश की स्थापना करें।
गणेश पूजा: दूर्वा, फूल, मोदक और लड्डू अर्पित कर गणपति की पूजा और आरती करें।
इस प्रकार एक ही दिन पड़ने वाले हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी के दोनों धार्मिक कार्य व्यवस्थित रूप से पूरे किए जा सकते हैं। वर्ष 2026 का यह विशेष तिथि संयोग श्रद्धालुओं के लिए दोनों पर्वों की पूजा और भक्ति का अवसर लेकर आया है। अलग-अलग पूजा स्थल, उचित समय और पारिवारिक परंपरा का ध्यान रखते हुए भगवान शिव, माता पार्वती और विघ्नहर्ता भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है।