नवरात्रि में कन्या पूजन कब करें, जानिए सही मुहूर्त, विधि और महत्व

Kanya Pujan 2025 Date Navratri में कन्या पूजन कब और कैसे करें? जानें अष्टमी-नवमी का शुभ मुहूर्त, कन्या पूजन की विधि, महत्व और धार्मिक मान्यताएं। क्यों जरूरी है लंगूर के साथ कन्या भोज।

Update:2025-09-12 07:10 IST

Navratri Me Kanya Pujan नवरात्रि में कन्या पूजन कब करें:  नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा का अनुष्ठान का होता है। इस समय प्रतिपदा से नवमी तक 9 रूपों की पूजा के बाद कन्या पूजन हवन से नवरात्रि की पूर्णाहुति की जाती है। नवरात्रि में देवी दुर्गा की आराधना के साथ कन्या पूजन का विधान है। चाहे नवरात्रि कोई भी हो इसमें 8 वें और 9 वें दिन कन्या पूजन किया जाता है। इस बार भी नवरात्रि में 22 सितंबर से शुरू है। तो  कन्या की पूजा 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को की  जाएगी। बिना कन्या पूजन के नवरात्रि और मां दुर्गा की पूजा अधूरी होती है।

कन्या पूजन महत्व 

कन्या पूजा एक अवसर होता है जब आप छोटी बच्चियों के रूप में देवी की पूजा कर सकते हैं। कन्या पूजा में विश्वास, पवित्रता और समर्पण होना चाहिए। देवी पुराण में कन्या की पूजा करने से देवी दुर्गा प्रसन्न होती हैं और व्रत की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इतना ही नहीं कन्याओं को भोजन कराने से कुंडली में ग्रहों की स्थिति भी ठीक होती है। ज्योतिष के अनुसार कन्या पूजन में आपको हमेशा एक लड़के को आमंत्रित करना चाहिए। यह माना जाता है कि भगवान शिव ने आदि शक्ति या मां दुर्गा की सुरक्षा के लिए भैरव को नियुक्त किया था। इसलिए मां दुर्गा के साथ भगवान भैरव के रूप में कम से कम एक लड़के की पूजा करना जरूरी है।

नवरात्रि में कन्या पूजन का मुहूर्त

नवरात्रि में अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन का विधान है। इस बार 30 सितंबर को दुर्गा अष्टमी मनाई जाएगी। इसी दिन कन्या पूजन किया जाएगा।आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत- 29 सितंबर को शाम 04 .31 मिनट पर आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का समापन- 30 सितंबर को शाम 06. 06 मिनट पर


महानवमी शुभ मुहूर्त

इस बार 01 अक्टूबर को महानवमी का पर्व मनाया जाएगा। इसी दिन विधिपूर्वक कन्या पूजन किया जाएगा।आश्विन शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि की शुरुआत- 30 सितंबर को शाम 6 . 06 मिनट पर और आश्विन शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का समापन- 01 अक्टूबर को रात 7. 01 मिनट पर हौगा,वैसे तो कन्या पूजन के लिए इन तिथियों पर पूरा दिन शुभ होता है लेकिन अगर विशेष फल की चाहत है तो इस दिन राहुकाल को छोड़कर किसी शुभ काल जैसे अमृत काल ,विजय मुहूर्त, अमृत , शुभ, लाभ, की चौघड़िया में पूजा कर सकते है।

नवरात्रि में कन्या पूजन की विधि

अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या की पूजा करने के लिए सबसे पहले सुबह उठकर स्नान कर लें। स्नान करने के बाद सबसे पहले विधि अनुसार भगवान गणेश और महागौरी की पूजा करें। कन्या पूजा के लिए दो साल से लेकर 10 साल तक की 9 लड़कियों और एक लड़के को घर पर बुलाएं। कन्याओं के पैर धोने के बाद उनके हाथों में रोली, कुमकुम और अक्षत का टीका लगाकर मौली बांधें। आमतौर पर कन्या पूजन के दिन लड़कियों को पुरी, चना और हलवा खाने के लिए दिया जाता है।

 इसके बाद पैर छूकर उन्हें आशीर्वाद दें और मां की स्तुति करते हुए गलती के लिए माफी मांगें। अंत में कन्याओं को नारियल, फल और दक्षिणा और कहीं, कहीं चूड़िया और बिंदी भी दी जाती है। भोजन के बाद कन्याओं को सामर्थ्य के मुताबिक दक्षिणा या उपहार दें और पैर छूकर आशीर्वाद लें और उन्हें विदा करें।

कन्या पूजन की मान्यताएं

मान्यतों के अनुसार कन्या पूजन से मां बेहद प्रसन्न होकर भक्तों की सभी मनोकामनााओं को कर देती हैं। इतना ही नहीं देवी पुराण के अनुसार मां को हवन और दान से अधिक प्रसन्नता कन्या भोज से मिलती है। ज्योतिषशास्त्र में भी कन्या पूजन को बेहद फलदायी मानाते हुए कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति के कुंडली में बुध ग्रह बुरा फल दे रहा है, तो लोगों को कन्या पूजन अवश्य करना चाहिए। बता दें कि बुध की मित्र राशियां वृष, मिथुन, कन्या, मकर और कुंभ होने के कारण इन राशियों के जातकों को कन्या पूजन का विशेष लाभ मिलता है। माता रानी के भक्त अष्टमी और नवमी के दिन छोटी-छोटी कन्याओं को माता का अवतार मान कर उनका पूजन कर उन्हें भोजन करा कर कुछ भेंट देते हैं। गौरतलब है कि इन कन्याओं के बीच एक लड़का भी अवश्य बिठाया जाता है ,जिसे लांगुर कहते हैं। कहा जाता है कि उसके बिना कन्या पूजन पूर्ण नहीं माना जाता है।

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक कन्याओं के पूजन में दो से दस वर्ष तक की कन्याओं को बिठाना उचित होता है । इसके लिए कन्याओं की संख्या नौ होना सर्वोत्तम बताया गया है। धर्मशास्त्रों के अनुसार कन्याओं की संख्या के अनुसार ही कन्या पूजन का फल प्राप्त होता है। हर कन्या का अलग और विशेष महत्व होता है। मान्यताओं के अनुसार कन्या पूजन में 9 कन्याओं और एक लड़के का पूजन करना बेहद शुभ होता है।

कन्या पूजन कन्याओं की संख्या का मतलब

धर्मशास्त्रों के अनुसार पूजन में कन्या की संख्या के हिसाब से फल की प्राप्ति होती है। जैसे-

एक कन्या की पूजा करने से ऐश्वर्य, 

दो कन्याओं से भोग व मोक्ष 

तीन कन्याओं के पूजन से धर्म, अर्थ व काम

चार कन्याओं के पूजन से राजपद प्राप्ति

पांच कन्याओं की पूजा करने से विद्या

छह कन्याओं की पूजा से छह प्रकार की सिद्धियां

सात कन्याओं से सौभाग्य

आठ कन्याओं के पूजन से सुख- संपदा प्राप्त होती है।

नौ कन्याओं की पूजा करने करने से संसार में प्रभुत्व बढ़ता है।


कन्या के साथ लंगूर की पूजा क्यों

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान बटुक भैरव का जन्म विपदाओं से बचाने के लिए हुआ था बटुक भरैव यानि कन्या पूजन के समय लंगूर के रूप में एक लड़के को बिठाना प्रतीक है। बटुक भैरव मान-सम्मान और विपदा से लोगों को बचाते हैं । इस वजह से भी भगवान बटुक भैरव जी की पूजा करी जाती है। इस पूजन में उस लड़के को लंगूर भी कहा जाता हैं। ऐसा माना जाता है कि बटुक भैरव अपनी कृपा से कई परेशानियों को दूर करते हैं। बटुक भैरव की पूजा करने से मान- सम्मान और यश की प्राप्ति होती है। ग्रह दोष दूर हो जाते हैं और मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है। 

अंत में इस दौरान घर और मंदिर की साफ-सफाई का खास ध्यान रखें।पूजा के समय काले रंग के कपड़े न पहनें।किसी से वाद-विवाद न करें।किसी के बारे में गलत न सोचें।बड़े-बुर्जुग और महिलाओं का अपमान न करें।इसके अलावा तामसिक भोजन का सेवन करने से बचना चाहिए।

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