Shani Pradosh Vrat 2026: शनि प्रदोष पर बन रहा शुभ संयोग, जानें जून में कब करें पूजा, क्यों है खास

Shani Pradosh Vrat 2026: इस बार जून 2026 में शनि प्रदोष पर बन रहा है और शनि प्रदोष पर बन रहा है शुभ योग। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से जीवन की कई बाधाएं दूर हो सकती हैं। जानें पूजा का समय और धार्मिक महत्व...

Update:2026-06-11 09:19 IST

Shani Pradosh Vrat 2026

Shani Pradosh  : प्रदोष व्रत और तिथि भगवान शिव को अति प्रिय है। हर महीना में दो प्रदोष पड़ता है। जो दिन के अनुसार अलग अलग नामों से जानते है। वैसे तो हर प्रदोष खास है लेकिन इनमें सोम और शनि प्रदोष की अपनी महिमा है।  शनि प्रदोष पर भगवान शिव और शनिदेव की कृपा एक साथ मिलती  है। जब प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ता है, तो उसे शनि प्रदोष व्रत कहते है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने के साथ ही शनिदेव का आशीर्वाद पाने के लिए उपवास रखते हैं। मान्यता है कि शनि प्रदोष व्रत करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और शनि दोष से राहत मिलती है। साल 2026 में शनि प्रदोष 27 जून को पड़ रहा है। वहीं इस दिन रवि योग भी है। जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। जानते हैं तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त…

शनि प्रदोष व्रत तिथि -मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 26 जून 2026 को रात 10 . 22 मिनट पर आरंभ होगी।
 यह तिथि 27 जून 2026 को रात 12 . 43 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए शनि प्रदोष व्रत 27 जून को रखा जाएगा।
प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त 27 जून 2026 को शाम 7 .20 मिनट से रात 9 बजकर 29 मिनट तक रहेगा।
 इस बीच में आप भोलेनाथ की पूजा- अर्चना कर सकते हैं।

शनि प्रदोष व्रत का महत्व

मान्यताओं के अनुसार, शनि प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है।
 इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
शनिदेव की कृपा से करियर, व्यापार और आर्थिक स्थिति में मजबूती आती है।
जिन लोगों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या अन्य अशुभ प्रभाव चल रहे हों, उनके लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है।

शनि प्रदोष पूजा विधि

शनि प्रदोष के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शिव का अभिषेक करें।
प्रदोष व्रत के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
इस दिन सूर्यास्त से एक घंटा पहले नहाकर भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए।
प्रदोष व्रत की पूजा में कुशा के आसन का प्रयोग करना चाहिए। पंचामृत का पूजा में प्रयोग करें।
धूप दिखाएं और भगवान शिव को भोग लगाएं।इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव त्रयोदशी तिथि में शाम के समय कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं।इस दिन भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। निसंतान को संतान मिलती है। संतान सत्कर्मों में लगी रहती है। प्रदोष व्रत करने के लिए व्रती को त्रयोदशी के दिन सुबह जल्दी उठना चाहिए। नहाकर भगवान शिव का ध्यान करना चाहिए। इस व्रत में भोजन ग्रहण नहीं किया जाता है। गुस्सा या विवाद से बचकर रहना चाहिए। 

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