E20 विवाद या EV का बढ़ता क्रेज? भारत में फ्लेक्स-फ्यूल कारों की शुरुआत रही फीकी, बिक्री ने बढ़ाई चिंता
Flex Fuel Vehicle News: सरकारी वाहन पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर कार लॉन्च होने के बाद से दिल्ली में अब तक केवल चार फ्लेक्स-फ्यूल कारों का ही पंजीकरण हुआ है।
Flex Fuel Vehicle News
Flex Fuel Vehicle News: भारत में पेट्रोल पर निर्भरता कम करने और एथेनॉल आधारित ईंधन को बढ़ावा देने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को शुरुआती दौर में बड़ा झटका लगता दिखाई दे रहा है। फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (Flex Fuel Vehicles-FFV) को भविष्य की हरित परिवहन तकनीक के रूप में पेश किया जा रहा है, लेकिन बाजार से अब तक उम्मीद के मुताबिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। सरकारी वाहन (Vahan) पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर कार लॉन्च होने के बाद से दिल्ली में अब तक केवल चार फ्लेक्स-फ्यूल कारों का ही पंजीकरण हुआ है।
यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब सरकार लगातार एथेनॉल मिश्रित ईंधन के प्रयोग को बढ़ावा दे रही है और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रही है।
शुरुआती बिक्री ने बढ़ाई चिंता
आंकड़ों के मुताबिक, जून में देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर कार लॉन्च होने के बाद तीन वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ, जबकि जुलाई में केवल एक और कार खरीदी गई। इसी अवधि में एक प्रमुख कंपनी ने फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिल भी बाजार में उतारी, लेकिन इस तकनीक को लेकर ग्राहकों की दिलचस्पी फिलहाल सीमित नजर आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई तकनीक होने के कारण उपभोक्ताओं के मन में अभी कई तरह की शंकाएं बनी हुई हैं।
क्या होते हैं फ्लेक्स-फ्यूल वाहन?
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे वाहन होते हैं जो पेट्रोल, एथेनॉल या दोनों के मिश्रण पर चल सकते हैं। ये E85 और E100 जैसे उच्च एथेनॉल मिश्रित ईंधन का भी उपयोग करने में सक्षम होते हैं।
इन वाहनों में सामान्य पेट्रोल कारों की तुलना में विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें एथेनॉल-रोधी इंजन पार्ट्स, विशेष फ्यूल इंजेक्टर, री-कैलिब्रेटेड इंजन कंट्रोल यूनिट (ECU) और स्मार्ट सेंसर लगाए जाते हैं, जो ईंधन के मिश्रण के अनुसार इंजन की कार्यप्रणाली को स्वतः समायोजित करते हैं।
कीमत और ईंधन की उपलब्धता बनी चुनौती
दिल्ली में फ्लेक्स-फ्यूल कारों की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत लगभग 7.2 लाख रुपये है। वहीं फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिलों की कीमत 72,792 रुपये से 1.24 लाख रुपये के बीच है।
हालांकि, इन वाहनों के लिए जरूरी E85 ईंधन फिलहाल दिल्ली के केवल कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर ही उपलब्ध है। इसकी कीमत करीब 82 रुपये प्रति लीटर है। सीमित उपलब्धता भी ग्राहकों को इस तकनीक को अपनाने से रोक रही है।
E20 ईंधन को लेकर बहस का भी असर
हाल के महीनों में E20 ईंधन को लेकर कई तरह की चर्चाएं और दावे सामने आए हैं। कुछ लोगों का कहना है कि इससे वाहन का माइलेज कम हो सकता है या इंजन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, इन दावों के समर्थन में अब तक कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसके बावजूद इस बहस ने आम उपभोक्ताओं के मन में संशय पैदा किया है, जिसका असर फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की बिक्री पर भी देखने को मिल रहा है।
EV की बढ़ती लोकप्रियता बनी बड़ी चुनौती
इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) इंडिया के प्रबंध निदेशक अमित भट्ट का कहना है कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने में अभी समय लगेगा। फिलहाल बाजार में ऐसे वाहनों के विकल्प भी बहुत कम हैं।
उनका मानना है कि दिल्ली समेत कई राज्यों की नीतियां इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को प्राथमिकता दे रही हैं। ऐसे में पर्यावरण के प्रति जागरूक ग्राहक सीधे इलेक्ट्रिक वाहनों को चुनना ज्यादा बेहतर विकल्प मान रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि एथेनॉल पेट्रोल की तुलना में अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन जरूर है, लेकिन फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों से भी एग्जॉस्ट उत्सर्जन होता है, जबकि इलेक्ट्रिक वाहन इस मामले में अधिक पर्यावरण-अनुकूल माने जाते हैं।
ब्राजील से क्या सीख सकता है भारत?
ब्राजील जैसे देशों में एथेनॉल आधारित ईंधन को सरकारी स्तर पर काफी प्रोत्साहन मिलता है। वहां पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल काफी सस्ता उपलब्ध कराया जाता है। इसके बावजूद वहां भी इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार लगातार बढ़ रहा है। इससे साफ है कि केवल वैकल्पिक ईंधन उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और उपभोक्ताओं का भरोसा भी उतना ही जरूरी है।
सरकार और उद्योग के सामने बड़ी चुनौती
परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को लोकप्रिय बनाना चाहती है तो सबसे पहले सरकारी विभागों में इन वाहनों का व्यापक इस्तेमाल शुरू करना होगा। इससे आम लोगों का विश्वास बढ़ेगा और नई तकनीक को अपनाने में आसानी होगी। साथ ही E85 जैसे ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने, सर्विस नेटवर्क विकसित करने और अधिक मॉडलों को बाजार में उतारने की भी जरूरत है।
फिलहाल भारत में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की शुरुआत उम्मीद के अनुरूप नहीं रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होता है और लोगों का भरोसा बढ़ता है, तो यह तकनीक देश की ऊर्जा सुरक्षा और पेट्रोल आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।