Newstrack Special: SIP बंद करना कब सही होता है, कब गलत? मार्केट गिरने पर SIP रोकनी चाहिए या नहीं?
SIP Investment Strategy Explained: क्या शेयर बाजार गिरने पर SIP बंद कर देनी चाहिए? जब म्यूचुअल फंड का रिटर्न लाल दिखाई देने लगे तो क्या हर महीने निवेश करते रहना सही है या कुछ समय के लिए SIP रोक देना बेहतर है?
SIP Investment Strategy Explained in Hindi
SIP Investment Strategy Explained: शेयर बाजार गिरता है, म्यूचुअल फंड की कीमतें नीचे आती हैं और आपके मोबाइल पर लाल रंग में दिखने लगता है तो मतलब है कि आपके निवेश का रिटर्न माइनस में है। ऐसे समय में सबसे पहले जिस चीज पर शक होने लगता है, वह है आपकी हर महीने चल रही SIP। मन में सवाल आता है कि जब बाजार लगातार गिर रहा है तो हर महीने पैसे डालते रहने का क्या फायदा? क्यों न कुछ महीने SIP रोक दी जाए? बाजार जब फिर ऊपर आएगा, तब दोबारा शुरू कर देंगे। सुनने में यह फैसला समझदारी भरा लगता है। लेकिन यहीं SIP का सबसे बड़ा गणित छिपा है। SIP का मकसद ही यह नहीं है कि बाजार हमेशा ऊपर जाता रहे और आप हर महीने महंगे दाम पर निवेश करते रहें। इसका एक बड़ा फायदा यह है कि बाजार ऊपर हो तो आपको कम इकाइयां मिलती हैं और बाजार नीचे हो तो उसी पैसे में ज्यादा इकाइयां मिलती हैं। इसे रुपये की औसत लागत कहा जाता है। हालांकि यह मुनाफे की गारंटी नहीं है और गिरते बाजार में नुकसान से भी नहीं बचाता।
यही वजह है कि केवल बाजार गिरने के डर से SIP रोक देना अक्सर उल्टा फैसला साबित हो सकता है।
लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि SIP को कभी रोकना ही नहीं चाहिए। कुछ ऐसी परिस्थितियां हैं जब SIP रोकना बिल्कुल सही फैसला हो सकता है।
तो सवाल यह नहीं है कि “बाजार गिरा है, SIP रोकें या नहीं?”
सही सवाल है कि “SIP रोकने की वजह क्या है?”
SIP आखिर काम कैसे करती है?
SIP को समझने के लिए इसे किसी शेयर की कीमत का अनुमान लगाने की कोशिश के बजाय हर महीने एक निश्चित रकम निवेश करने की आदत समझिए।
मान लीजिए आप हर महीने 5,000 रुपये किसी इक्विटी म्यूचुअल फंड में लगाते हैं। जिस महीने उस फंड की एक इकाई की कीमत 50 रुपये है, आपको 5,000 रुपये में 100 इकाइयां मिलेंगी। अब बाजार गिर गया और अगले महीने वही कीमत 25 रुपये हो गई। आपने फिर 5,000 रुपये लगाए तो इस बार आपको 200 इकाइयां मिलेंगी।
बाजार ऊपर गया और कीमत 100 रुपये हो गई तो उसी 5,000 रुपये में सिर्फ 50 इकाइयां मिलेंगी। यानी SIP अपने आप आपको बाजार के अलग-अलग स्तरों पर खरीदारी करवाती रहती है।
यही कारण है कि SIP में बाजार के हर महीने का सही समय पकड़ना जरूरी नहीं होता। AMFI भी SIP को नियमित निवेश और रुपये की औसत लागत के फायदे से जोड़ता है।
बाजार गिरने पर SIP रोकना सबसे बड़ी गलती क्यों हो सकती है?
मान लीजिए आपने SIP तब शुरू की जब बाजार काफी ऊंचाई पर था। कुछ महीनों बाद बाजार 10, 15 या 20 प्रतिशत गिर गया। आपका पुराना निवेश लाल निशान में दिखाई देने लगा। आप डर गए और SIP रोक दी। अब ध्यान दीजिए कि आपने क्या किया।जिस समय म्यूचुअल फंड की कीमतें कम थीं, उसी समय आपने नई खरीदारी बंद कर दी। यानी जब आपको कम कीमत पर ज्यादा इकाइयां मिल सकती थीं, तब आपने खरीदना रोक दिया।
बाद में जब बाजार सुधरने लगा और कीमतें बढ़ने लगीं, आपने फिर SIP शुरू की। इस तरह आपने महंगे समय में निवेश किया, गिरावट के समय खरीदारी रोक दी और फिर बाजार के सुधरने के बाद वापस आए।
यह वही चीज है जिसे निवेशक अक्सर अनजाने में करते हैं - ऊंचे दाम पर खरीदना और डरकर नीचे खरीदना बंद कर देना। राष्ट्रीय प्रतिभूति बाजार संस्थान यानी NISM भी बाजार गिरने के दौरान SIP जारी रखने के पीछे रुपये की औसत लागत और अनुशासित निवेश को महत्वपूर्ण कारण मानता है।
बाजार गिरना SIP निवेशक के लिए हमेशा बुरी खबर क्यों नहीं है?
यह बात पहली नजर में उलटी लग सकती है। अगर बाजार गिर रहा है तो निवेशक का नुकसान हो रहा है। फिर बाजार गिरना अच्छी खबर कैसे हो सकता है? इसका जवाब आपके पुराने निवेश और नए निवेश को अलग-अलग देखने में है। अगर आपने पहले से 5 लाख रुपये निवेश कर रखे हैं और बाजार 20 प्रतिशत गिर गया तो आपके पुराने निवेश का मूल्य घट सकता है। यह निश्चित रूप से अच्छी खबर नहीं है। लेकिन अगर आप हर महीने नई रकम निवेश कर रहे हैं तो गिरती कीमतों पर आपको ज्यादा इकाइयां मिलेंगी।
यानी एक SIP निवेशक के लिए बाजार गिरने का असर दो तरफ होता है। पुराने निवेश का मूल्य घटता है, लेकिन नई रकम से ज्यादा इकाइयां खरीदी जाती हैं।
यही कारण है कि लंबे समय की SIP में बाजार की गिरावट हमेशा दुश्मन नहीं होती। AMFI के अनुसार SIP का एक फायदा यह है कि निवेशक बाजार की स्थिति की परवाह किए बिना नियमित रूप से निवेश करता रहता है और कीमत कम होने पर ज्यादा इकाइयां खरीदता है।
लेकिन क्या हर गिरावट में SIP जारी रखना चाहिए?
यहां थोड़ा सावधान होना जरूरी है। सिर्फ बाजार गिरने के कारण SIP रोकना आम तौर पर सही वजह नहीं है। लेकिन SIP जिस फंड में चल रही है, उसकी गुणवत्ता, आपकी आर्थिक स्थिति और आपका निवेश लक्ष्य भी मायने रखते हैं। मसलन, अगर आपने किसी छोटे आकार की कंपनी वाले फंड में सिर्फ इसलिए SIP शुरू की थी क्योंकि उसने पिछले साल बहुत ज्यादा मुनाफा दिया था और अब आपको समझ आ रहा है कि उस फंड का जोखिम आपकी क्षमता से बहुत ज्यादा है, तो केवल बाजार की गिरावट देखकर आंख बंद करके SIP जारी रखना भी सही रणनीति नहीं है। इसी तरह अगर आपके निवेश का उद्देश्य बदल गया है, आपकी आमदनी कम हो गई है या आपको अगले कुछ महीनों में उस पैसे की जरूरत पड़ने वाली है, तो SIP रोकने का कारण बाजार नहीं बल्कि आपकी व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति हो सकती है।
SIP कब बंद करना सही हो सकता है?
SIP को रोकना अपने आप में गलत फैसला नहीं है।
गलती तब होती है जब इसे डर में लिया गया फैसला बना दिया जाता है।
अगर आपकी नौकरी चली गई है, कारोबार में आमदनी अचानक घट गई है या घर के जरूरी खर्च पूरे करना मुश्किल हो रहा है, तो पहले अपनी आर्थिक स्थिति संभालना जरूरी है। ऐसे समय में हर महीने निवेश करने के बजाय पैसा बचाकर रखना ज्यादा समझदारी हो सकती है। अगर आपके पास पर्याप्त आपातकालीन बचत नहीं है और अचानक किसी बड़ी जरूरत के लिए पैसे चाहिए, तो SIP में पैसा डालते रहने से पहले नकद बचत बनाना ज्यादा जरूरी हो सकता है। यानी जब आपकी जेब अनुमति नहीं देती, तब SIP रोकना गलत नहीं है। गलती यह होगी कि सिर्फ बाजार गिरने के डर से SIP रोक दें जबकि आपकी आमदनी, बचत और लक्ष्य सब ठीक चल रहे हों।
अगर SIP वाला फंड खराब हो गया हो तो?
यह SIP रोकने का एक ज्यादा गंभीर कारण हो सकता है। SIP कोई अलग निवेश उत्पाद नहीं है। यह सिर्फ म्यूचुअल फंड में नियमित रूप से पैसा लगाने का तरीका है। इसलिए असली सवाल हमेशा यह होना चाहिए कि आप किस फंड में SIP कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं।
मान लीजिए आपने किसी फंड को उसके पुराने शानदार प्रदर्शन को देखकर चुना था। बाद में उसका प्रदर्शन लगातार कमजोर हो गया। उसकी निवेश रणनीति आपके लक्ष्य से मेल नहीं खा रही। जोखिम आपकी क्षमता से ज्यादा है या फंड की स्थिति में ऐसा बदलाव आया है जिससे आपको अपनी पसंद पर दोबारा विचार करना चाहिए।
ऐसी स्थिति में सिर्फ इसलिए SIP जारी रखना कि “SIP कभी बंद नहीं करनी चाहिए”, सही सोच नहीं है।
AMFI भी कहता है कि म्यूचुअल फंड की पिछली कामयाबी भविष्य के अच्छे रिटर्न की गारंटी नहीं है और निवेशक को योजना के प्रदर्शन और उसके मानक की तुलना करते हुए समय-समय पर समीक्षा करनी चाहिए।
SIP और म्यूचुअल फंड बेच देना एक ही बात नहीं है
यह फर्क भी समझना बहुत जरूरी है। मान लीजिए बाजार गिर गया और आपने SIP रोक दी। इसका मतलब यह है कि आपने आगे की नई किस्तें रोक दीं।
आपका पहले से लगा हुआ पैसा अभी भी उसी म्यूचुअल फंड में मौजूद है। अगर बाजार आगे और गिरता है तो उस पुराने निवेश का मूल्य फिर घट सकता है। इसलिए कई बार निवेशक SIP रोककर सोचते हैं कि उन्होंने बाजार से अपना पैसा बचा लिया। लेकिन अगर उन्होंने पुराने निवेश को बेच नहीं दिया है तो वे अभी भी बाजार के उतार-चढ़ाव में शामिल हैं। दूसरी तरफ, अगर वे पुराने निवेश को भी घाटे में बेच देते हैं तो वे गिरावट को वास्तविक नुकसान में बदल सकते हैं। यही कारण है कि SIP रोकना, निवेश निकालना और फंड बदलना, तीनों अलग फैसले हैं।
बाजार गिरने पर SIP बंद करने के बजाय क्या करना चाहिए?
सबसे पहले यह देखना चाहिए कि बाजार क्यों गिर रहा है। हर गिरावट एक जैसी नहीं होती। कभी बाजार कुछ दिनों के लिए किसी खबर से घबराकर गिरता है। कभी अर्थव्यवस्था में कमजोरी के कारण गिरावट लंबी चलती है। कभी किसी खास क्षेत्र या उद्योग में समस्या होती है। कभी पूरी दुनिया में आर्थिक या राजनीतिक संकट के कारण बाजार नीचे जाता है। लेकिन SIP निवेशक के लिए हर दिन बाजार की दिशा का अनुमान लगाना मुश्किल है। यही तो SIP का उद्देश्य है।हर महीने बाजार का अनुमान लगाने की जरूरत कम करना।
AMFI के अनुसार SIP का तरीका ही ऐसा है जिसमें निवेशक तय रकम को नियमित अंतराल पर लगाता है और बाजार की चाल के हिसाब से खरीदारी का समय तय करने की जरूरत कम हो जाती है।
क्या बाजार बहुत ज्यादा गिर जाए तो SIP बढ़ा देनी चाहिए?
यह सवाल भी अक्सर पूछा जाता है। सैद्धांतिक रूप से बाजार गिरने पर कम कीमत में ज्यादा इकाइयां खरीदी जा सकती हैं। इसलिए जिस निवेशक की आर्थिक स्थिति मजबूत है, जिसके पास पर्याप्त आपातकालीन बचत है और जिसका निवेश लक्ष्य लंबे समय का है, वह अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार अतिरिक्त निवेश पर विचार कर सकता है। लेकिन यहां भी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। किसी को सिर्फ इसलिए अपनी SIP दोगुनी नहीं कर देनी चाहिए क्योंकि बाजार 10 प्रतिशत गिर गया है।
क्योंकि कोई नहीं जानता कि बाजार की गिरावट वहीं रुक जाएगी या आगे 10, 20 या 30 प्रतिशत और नीचे जाएगी। इसलिए SIP जारी रखना और गिरावट में अतिरिक्त पैसा लगाना दो अलग फैसले हैं। पहला नियमित निवेश की रणनीति है। दूसरा बाजार की स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त जोखिम लेने का फैसला है।
सबसे खतरनाक गलती क्या है?
सबसे खतरनाक गलती है कि बाजार ऊपर हो तो निवेश बढ़ाना और बाजार गिरते ही निवेश रोक देना।
यह इंसानी मनोविज्ञान है। जब हर तरफ मुनाफे की खबरें आती हैं, लोग बाजार में पैसा लगाने के लिए ज्यादा उत्साहित होते हैं। जब बाजार गिरता है, वही लोग डरने लगते हैं। लेकिन निवेश में समस्या यही है कि जब कीमतें पहले ही काफी बढ़ चुकी होती हैं तब उत्साह चरम पर हो सकता है और जब कीमतें गिर चुकी होती हैं तब डर सबसे ज्यादा होता है। SIP इस भावनात्मक समस्या को कम करने का तरीका देती है। आपने एक तारीख तय की।
एक रकम तय की और हर महीने निवेश करते रहे। इससे बाजार की हर खबर देखकर फैसला बदलने की जरूरत कम हो जाती है।
क्या SIP से नुकसान नहीं हो सकता?
बिल्कुल हो सकता है। यह समझना बेहद जरूरी है कि SIP मुनाफे की गारंटी नहीं है। अगर आपने इक्विटी म्यूचुअल फंड में SIP की है तो आपका निवेश बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित होगा। बाजार लंबे समय तक कमजोर रह सकता है और आपका निवेश लंबे समय तक घाटे में भी रह सकता है। AMFI साफ करता है कि म्यूचुअल फंड में निवेश बाजार के जोखिम के अधीन है और निवेश की मूल रकम भी घट सकती है। रुपये की औसत लागत नुकसान की गारंटी को खत्म नहीं करती।
इसलिए यह कहना गलत होगा कि “बाजार कितना भी गिर जाए, SIP में हमेशा फायदा होगा।” सही बात यह है कि लंबे समय तक नियमित निवेश करने से बाजार के अलग-अलग स्तरों पर खरीदारी होती है और औसत लागत का फायदा मिल सकता है।
कितने समय के लिए SIP कर रहे हैं, यह सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है
अगर आपका पैसा छह महीने बाद चाहिए तो इक्विटी म्यूचुअल फंड में SIP करने का सवाल ही अलग है।
अगर आपका लक्ष्य 10, 15 या 20 साल दूर है तो बाजार की कुछ महीनों की गिरावट का महत्व बहुत कम हो जाता है। यही वजह है कि SIP शुरू करने से पहले यह समझना जरूरी है कि पैसा किस काम के लिए है।
बच्चे की पढ़ाई, रिटायरमेंट, घर खरीदना या लंबे समय की संपत्ति बनाना जैसे लक्ष्य लंबी अवधि के हो सकते हैं।
दूसरी तरफ अगले साल की फीस, शादी का खर्च या कुछ महीनों बाद घर की डाउन पेमेंट जैसे लक्ष्य के लिए बाजार आधारित निवेश का जोखिम अलग तरीके से देखना होगा। निवेश की अवधि छोटी होती जाए तो बाजार की एक बड़ी गिरावट आपके लक्ष्य को ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है।
एक उदाहरण से समझिए
मान लीजिए अमित हर महीने 10,000 रुपये की SIP करता है। पहले साल बाजार अच्छा चलता है। वह खुश है। दूसरे साल बाजार 20 प्रतिशत गिर जाता है। अमित का निवेश घाटे में दिखने लगता है। वह घबरा जाता है और SIP बंद कर देता है। तीसरे साल बाजार नीचे के स्तर से तेजी से ऊपर आने लगता है। अमित सोचता है कि अब बाजार महंगा हो गया है, कुछ और इंतजार करता हूं। कुछ महीने बाद बाजार और ऊपर चला जाता है। अब वह वापस SIP शुरू करता है। अमित ने बाजार को पकड़ने की कोशिश में दो गलतियां कीं। पहली, उसने गिरावट के दौरान कम कीमतों पर खरीदना बंद किया। दूसरी, उसने दोबारा निवेश शुरू करने के लिए बाजार के ऊपर जाने का इंतजार किया। दूसरी तरफ रोहित ने उसी अवधि में अपनी 10,000 रुपये की SIP जारी रखी।
उसे भी शुरुआत में नुकसान दिखाई दिया। लेकिन गिरावट के दौरान उसकी हर मासिक किस्त से ज्यादा इकाइयां खरीदी गईं। अगर बाद में बाजार ठीक हुआ तो रोहित के पास कम कीमत पर खरीदी गई ज्यादा इकाइयां थीं। यही SIP के गणित का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
क्या पांच साल तक SIP करने के बाद भी रोक सकते हैं?
सिर्फ इसलिए कि आपने पांच साल SIP की है, इसका मतलब यह नहीं कि आपको हमेशा उसी फंड में निवेश करते रहना है। आपकी आर्थिक स्थिति बदल सकती है। आपका लक्ष्य बदल सकता है। आपकी जोखिम लेने की क्षमता बदल सकती है। आपकी उम्र बढ़ सकती है।
आपको अगले कुछ वर्षों में पैसे की जरूरत हो सकती है।
इन सब परिस्थितियों में निवेश योजना की समीक्षा करना जरूरी है। लेकिन समीक्षा और डर में फैसला लेने के बीच बड़ा अंतर है। समीक्षा का मतलब है, सोचकर बदलाव करना। घबराहट का मतलब है, बाजार गिरा और तुरंत SIP बंद कर दी। दोनों को एक जैसा नहीं समझना चाहिए।
SIP बंद करने से पहले खुद से कौन-सा सवाल पूछें?
जब भी बाजार गिरने पर SIP बंद करने का मन करे, खुद से सिर्फ एक सवाल पूछिए “अगर बाजार नहीं गिरा होता, तो क्या मैं आज भी अपनी SIP बंद करने के बारे में सोचता?” अगर जवाब है - “नहीं”, तो संभव है कि आपका फैसला निवेश की वजह से नहीं बल्कि डर की वजह से है। लेकिन अगर जवाब है - “हां, मेरी आय कम हो गई है”, “मुझे पैसे की जरूरत है”, “मेरा लक्ष्य बदल गया है”, “मैंने गलत फंड चुना था” या “मेरी जोखिम लेने की क्षमता बदल गई है”, तो SIP की समीक्षा करना बिल्कुल उचित है। यह छोटा सा फर्क बहुत बड़ी गलती से बचा सकता है।
SIP रोकने और SIP की रकम घटाने में भी फर्क है
मान लीजिए आपकी आमदनी पहले 1 लाख रुपये थी और आप 20,000 रुपये की SIP कर रहे थे। अब आपकी आमदनी घटकर 70,000 रुपये हो गई।
ऐसे में पूरी SIP बंद करने के बजाय रकम घटाना भी एक रास्ता हो सकता है, अगर आपकी योजना और फंड की स्थिति इसकी अनुमति देती है। इससे निवेश की आदत पूरी तरह नहीं टूटती और आपकी मौजूदा आर्थिक स्थिति पर भी बहुत दबाव नहीं पड़ता। लेकिन यह फैसला व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति पर निर्भर करेगा।
SIP बंद करने से पहले आपातकालीन बचत कितनी जरूरी है?
यही वह हिस्सा है जिसे कई निवेशक नजरअंदाज कर देते हैं। अगर आपके पास अचानक नौकरी चली जाने, बीमारी, घर की बड़ी मरम्मत या किसी दूसरी जरूरत के लिए पर्याप्त बचत नहीं है, तो हर उपलब्ध पैसा बाजार में डालना समझदारी नहीं है। पहले ऐसी रकम अलग रखना जरूरी है जिसे जरूरत पड़ने पर तुरंत इस्तेमाल किया जा सके। क्योंकि अगर आपके पास नकद बचत नहीं है और अचानक पैसे की जरूरत पड़ गई, तो आपको गिरते बाजार में अपना निवेश बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में SIP जारी रखने से ज्यादा जरूरी आपकी आर्थिक सुरक्षा हो जाती है।
बाजार गिरने पर SIP रोकें या जारी रखें
अगर आपकी आमदनी स्थिर है, आपातकालीन बचत पर्याप्त है, निवेश लंबे समय के लक्ष्य के लिए है और जिस फंड में SIP चल रही है वह आपके लक्ष्य और जोखिम के मुताबिक ठीक है, तो सिर्फ बाजार गिरने के कारण SIP रोकना आम तौर पर सही फैसला नहीं माना जाएगा। क्योंकि गिरते बाजार में आपकी नई किस्तें कम कीमत पर ज्यादा इकाइयां खरीद सकती हैं। यही रुपये की औसत लागत का फायदा है।
लेकिन अगर आमदनी में बड़ी कमी आई है, पैसे की तत्काल जरूरत है, आपका लक्ष्य बदल गया है, आपकी जोखिम लेने की क्षमता बदल गई है या जिस फंड में निवेश कर रहे हैं उसकी समीक्षा के बाद आपको लगता है कि वह आपके लिए सही नहीं है, तो SIP रोकना या बदलना उचित हो सकता है। यानी फैसला बाजार के लाल या हरे रंग से नहीं होना चाहिए।
सबसे जरूरी बात: SIP बाजार से ज्यादा आपके व्यवहार की परीक्षा है
SIP की खूबी सिर्फ यह नहीं है कि हर महीने पैसा कट जाता है। इसकी असली खूबी यह है कि यह आपको बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच अनुशासन बनाए रखने में मदद करती है। जब बाजार ऊपर होता है तो आप खरीदते हैं। जब बाजार नीचे होता है तब भी खरीदते हैं। यही वह चीज है जो बाजार का सही समय पकड़ने की आपकी जरूरत को कम करती है। हाल के वर्षों में भी बाजार की गिरावट के दौरान SIP निवेश में मजबूती देखी गई है। AMFI के आंकड़ों में जुलाई 2026 में SIP से 31,961 करोड़ रुपये का निवेश आया, जबकि AMFI-Crisil की रिपोर्ट बताती है कि बाजार की तेज गिरावट के दौर में भी व्यवस्थित निवेश के जरिए निवेशकों की भागीदारी पहले की तुलना में ज्यादा टिकाऊ हुई है।
लेकिन इसे भी किसी भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं समझना चाहिए।
SIP बाजार गिरने पर नहीं, वजह बदलने पर रोकें
SIP रोकने का सबसे खराब कारण है - “बाजार गिर रहा है।” और SIP रोकने का सबसे मजबूत कारण हो सकता है - “मेरी आर्थिक स्थिति, मेरा लक्ष्य या मेरी जोखिम लेने की क्षमता बदल गई है।”
अगर बाजार गिरा है लेकिन आपकी आर्थिक स्थिति और निवेश का लक्ष्य वही है, तो गिरावट के कारण SIP रोकना उस रणनीति को कमजोर कर सकता है जिसके लिए आपने SIP शुरू की थी। क्योंकि SIP का असली फायदा ही यह है कि आप बाजार के अच्छे और बुरे दोनों समय में निवेश करते रहें। बाजार ऊपर हो तो कम इकाइयां मिलती हैं, बाजार नीचे हो तो ज्यादा। लंबे समय में यही अलग-अलग कीमतों पर की गई खरीदारी आपकी औसत लागत को प्रभावित करती है। लेकिन SIP को कोई जादू की छड़ी भी नहीं समझना चाहिए। गलत फंड, गलत जोखिम, गलत समय-सीमा या कमजोर आर्थिक स्थिति को केवल “SIP जारी रखो” कहकर ठीक नहीं किया जा सकता। इसलिए अगली बार बाजार गिरे और मोबाइल स्क्रीन पर आपकी SIP लाल दिखाई दे तो तुरंत बंद करने के बजाय एक बार रुककर सोचिए कि क्या बाजार बदला है या मेरी स्थिति?
अगर सिर्फ बाजार बदला है, तो घबराने की जरूरत शायद नहीं है। अगर आपकी जिंदगी, आमदनी, लक्ष्य या जोखिम लेने की क्षमता बदल गई है, तो अपनी SIP की समीक्षा जरूर कीजिए। क्योंकि अच्छी SIP वह नहीं है जिसे हर हालत में चलाते रहना है। अच्छी SIP वह है जो आपके लक्ष्य, आपकी जेब और आपकी जोखिम लेने की क्षमता के साथ सही बैठती है। और बाजार की गिरावट में सबसे जरूरी बात शायद यही है लाल रंग देखकर निवेश का फैसला मत कीजिए; पहले यह देखिए कि आपने निवेश शुरू ही क्यों किया था।