'ज्ञानू-जानू विवाह' ने मचाया बवाल! मोदी-ज्ञानेश कुमार का वीडियो बनाकर बुरे फंसे अमित जोगी

Amit Jogi: अमित जोगी के 'ज्ञानू-जानू विवाह' वीडियो पर छत्तीसगढ़ में विवाद बढ़ गया है। पीएम मोदी और ज्ञानेश कुमार को लेकर बनाए गए वीडियो के खिलाफ भाजपा ने FIR दर्ज कराई।

Update:2026-11-04 11:13 IST

Amit Jogi Viral Video

Amit Jogi: वोट चोरी (Vote Chori) के आरोपों पर विरोध जताने के लिए जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के अध्यक्ष अमित जोगी ने ऐसा अनोखा तरीका चुना कि सियासी विरोध सीधे थाने तक पहुंच गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर बनाए गए 'ज्ञानू-जानू विवाह' वीडियो ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। वीडियो में दोनों को सांकेतिक शादी और हनीमून के दृश्य में दिखाया गया था। भाजपा नेताओं ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। मामला बढ़ा तो भाजपा कार्यकर्ता रायपुर के सिविल लाइंस थाने पहुंचे और अमित जोगी के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करा दी। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद जोगी ने वीडियो हटाकर माफी भी मांग ली है।

क्या है 'ज्ञानू-जानू विवाह' वीडियो का पूरा मामला?

दरअसल, कथित वोट चोरी (Alleged Vote Theft) के मुद्दे पर अमित जोगी ने रायपुर में सोशल मीडिया (Social Media) पर 'ज्ञानू-जानू विवाह' नाम से एक वीडियो पोस्ट किया था। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुखौटे लगाए दो लोगों को सांकेतिक शादी करते हुए दिखाया गया। वीडियो में हनीमून का दृश्य भी शामिल था। जोगी ने इस वीडियो के जरिए चुनाव आयोग और उसके कामकाज पर व्यंग्य करने की कोशिश की थी।

वीडियो सामने आने के बाद भाजपा नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर बहस शुरू हो गई। लगातार बढ़ते विरोध के बीच अमित जोगी ने 2 नवंबर को वीडियो पोस्ट डिलीट कर दी और अपने तरीके के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी।

भाजपा नेताओं ने बताया वैचारिक दिवालियापन

वीडियो को लेकर भाजपा नेताओं ने अमित जोगी पर निशाना साधा। भाजपा नेता मिंटू बिसेन ने कहा कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Expression) नहीं, बल्कि वैचारिक दिवालियापन है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री और संवैधानिक संस्था के प्रमुख को शादी और हनीमून जैसे शब्दों से जोड़कर मजाक उड़ाना छत्तीसगढ़ की संस्कृति नहीं है।

वहीं, देवा दास चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि अमित जोगी सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए इस तरह की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग (Election Commission) पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन उसके प्रमुख को प्रधानमंत्री से जोड़कर आपत्तिजनक वीडियो बनाना लोकतंत्र का अपमान है।

भाजपा नेता जगजीवन खरे ने भी वीडियो की आलोचना की। उन्होंने कहा कि 'ज्ञानू-जानू' जैसे शब्दों के जरिए युवाओं का मजाक बनाया गया है। उनके मुताबिक, यह वोट चोरी के मुद्दे को उठाने के बजाय लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जनता कांग्रेस अब राजनीतिक रूप से कमजोर हो चुकी है और विवादित वीडियो के जरिए चर्चा में आने की कोशिश कर रही है।

अमित जोगी ने पोस्ट हटाकर मांगी माफी

विवाद बढ़ने के बाद अमित जोगी ने अपनी पोस्ट हटाते हुए माफी मांगी। उन्होंने स्वीकार किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के विरोध में संदेश देने का उनका तरीका गलत था। जोगी ने कहा कि विरोध जताने के लिए दूसरे तरीके भी अपनाए जा सकते थे।

उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि खुद का मजाक उड़ाना अलग बात है, लेकिन किसी दूसरे व्यक्ति के निजी रिश्तों में घुसकर व्यंग्य करना सही नहीं है। दूसरों की निजी सीमाओं (Personal Space) का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनकी पोस्ट से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए माफी मांगते हैं।

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