बड़ी खबर! रायपुर-धमतरी रोड पर खत्म होगा हादसों का डर, 90 करोड़ का ओवरब्रिज बनाने की तैयारी, सर्वे शुरू

New Overbridge Near Kamal Vihar Gate: रायपुर-धमतरी मार्ग पर कमल विहार गेट के पास करीब 900 मीटर लंबे ओवरब्रिज की तैयारी शुरू हो गई है। PWD ने सर्वे और सॉयल टेस्टिंग शुरू कर दी है।

Update:2026-08-13 13:50 IST

Chhattisgarh News

New Overbridge Near Kamal Vihar Gate: रायपुर-धमतरी मार्ग पर लगातार बढ़ते ट्रैफिक और सड़क हादसों को देखते हुए अब कमल विहार गेट के पास बड़ा बदलाव होने जा रहा है। यहां लगभग 900 मीटर लंबा ओवरब्रिज (Overbridge) बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इसके लिए सर्वे और मिट्टी की जांच यानी सॉयल टेस्टिंग (Soil Testing) का काम शुरू कर दिया है।

ओवरब्रिज बनने के बाद मुख्य मार्ग के ट्रैफिक को स्थानीय वाहनों से अलग करने की योजना है, जिससे जाम के साथ-साथ हादसों पर भी लगाम लगने की उम्मीद है।

टू-लेन या फोरलेन, जमीन पर तय होगा फैसला

प्रस्तावित ओवरब्रिज टू-लेन होगा या फोरलेन, इसका फैसला उपलब्ध जमीन के आधार पर किया जाएगा। अगर पर्याप्त सरकारी जमीन उपलब्ध होती है तो करीब 90 करोड़ रुपये की लागत से फोरलेन ब्रिज बनाया जा सकता है। वहीं, अगर निर्माण के लिए ज्यादा निजी जमीन की जरूरत पड़ती है तो तकरीबन 60 करोड़ रुपये की लागत वाला टू-लेन विकल्प चुना जा सकता है।

ऊपर से गुजरेगा मुख्य ट्रैफिक

ओवरब्रिज बनने के बाद रायपुर से धमतरी की ओर जाने वाला मुख्य ट्रैफिक ऊपर से गुजरेगा। वहीं, कमल विहार और बोरियाखुर्द की तरफ से एक्सप्रेस-वे की ओर आने-जाने वाले स्थानीय वाहन नीचे से निकलेंगे। इससे मुख्य सड़क पर स्थानीय वाहनों की क्रॉसिंग कम होगी और यातायात व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है।

फिलहाल कमल विहार गेट के सामने चारों दिशाओं से वाहन एक ही जगह पर आते-जाते हैं। रायपुर से धमतरी जाने वाले वाहनों के बीच स्थानीय वाहन सड़क पार करते हैं। विशेषकर पीक आवर में यहां ट्रैफिक का दबाव काफी बढ़ जाता है।

जनवरी से अब तक 6 हादसे

पुलिस के मुताबिक, जनवरी से अब तक कमल विहार गेट के सामने करीब 6 सड़क हादसे हो चुके हैं। वहीं, धमतरी रोड पर रोजाना करीब 1.20 लाख वाहनों की आवाजाही होती है। ऐसे में ओवरब्रिज को हादसों और ट्रैफिक दोनों की समस्या से राहत दिलाने वाली बड़ी परियोजना माना जा रहा है।

हालांकि, निर्माण के दौरान ट्रैफिक डायवर्जन से जाम, धूल और शोर की समस्या बढ़ सकती है। साथ ही जमीन अधिग्रहण की जरूरत पड़ने पर परियोजना की लागत और निर्माण अवधि भी बढ़ सकती है।

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