“चाणक्य भी चौंक जाते” वाले बयान पर सदन में गूंजे ठहाके, प्रियंका गांधी वाड्रा का अमित शाह पर तंज
Priyanka Gandhi Vadra: महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने मजाकिया अंदाज में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर कसा तंज।
Priyanka Gandhi Vadra: संसद के भीतर चल रही चर्चा के दौरान राजनीतिक बयानबाजी का माहौल उस समय गरमा गया जब प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा तंज कसते हुए ऐसा बयान दिया, जिस पर सदन में मौजूद सदस्य ठहाकों से गूंज उठे। उन्होंने अपने भाषण में कहा, “अगर चाणक्य आज जिंदा होते तो वो भी चौंक जाते...,” जिससे सदन में कुछ समय के लिए माहौल हल्का हो गया, लेकिन राजनीतिक बहस और तेज हो गई।
सदन में हल्की हंसी और तालियों की गूंज सुनाई दी
उनके इस बयान के बाद सदन में हल्की हंसी और तालियों की गूंज सुनाई दी। कई सांसदों ने इसे एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी के रूप में लिया, जबकि सत्ता पक्ष के कुछ सदस्यों ने इसका विरोध भी किया। हालांकि, सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए हल्के-फुल्के माहौल में बदल गई।
बहस के दौरान कई बार तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली
संसद में इस बहस के दौरान कई बार तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली, लेकिन सभापति ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए कार्यवाही को आगे बढ़ाया। सदन में मौजूद अन्य सांसदों ने भी विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय रखी।
लोकतंत्र में संवाद और सवाल उठाना बेहद जरूरी
प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपने भाषण में आगे कहा कि लोकतंत्र में संवाद और सवाल उठाना बेहद जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार स्पष्ट जवाब देने से बचती है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता से जुड़े विषयों पर अधिक गंभीरता और संवेदनशीलता की जरूरत है।
मौजूदा 543 सीटों में 33 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता
वायनाड सांसद ने यह भी पूछा कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों में 33 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा, 'अगर यह संविधान संशोधन विधेयक पारित हो गया, तो इस देश में लोकतंत्र खत्म हो जाएगा।' प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के भाषण का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस पर रूप से निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण के इस कदम का हमेशा से विरोध होता रहा है।
राजनीतिक व्यंग्य और तीखे बयान भी अहम भूमिका निभाते हैं
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखाया कि संसद में नीतिगत चर्चाओं के साथ-साथ राजनीतिक व्यंग्य और तीखे बयान भी अहम भूमिका निभाते हैं। फिलहाल, इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा जारी है और आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।