क्या ज्यूडिशियल एग्जाम JPSC कराती है? परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल, CBI जांच पर सरकार को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने JPSC सिविल सर्विस प्रीलिम्स 2025 में कथित गड़बड़ियों की CBI जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र और झारखंड सरकार समेत संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।

Update:2026-08-24 16:59 IST

Supreme Court On JPSC: झारखंड में सरकारी नौकरी की परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को झारखंड सरकार से पूछा है कि 2025 की झारखंड कंबाइंड सिविल सर्विसेज प्रीलिमिनरी परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच CBI से कराने की मांग पर उसका क्या रुख है? यह परीक्षा झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC ने 103 पदों पर भर्ती के लिए कराई थी।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले में झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील से अगली सुनवाई तक मामले में निर्देश लेकर जवाब दाखिल करने को कहा है।

क्या ज्यूडिशियल एग्जाम JPSC कराती है?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने JPSC की कार्यप्रणाली को लेकर भी चिंता जताई। पीठ ने सवाल किया कि क्या न्यायिक सेवाओं की परीक्षा भी इसी आयोग के जरिए होती है। कोर्ट ने कहा कि वह इस पहलू को लेकर भी चिंतित है। इससे संकेत मिलता है कि सुप्रीम कोर्ट परीक्षा आयोजित करने वाली व्यवस्था की कार्यप्रणाली को गंभीरता से देख रहा है।

JPSC, JSSC, केंद्र और CBI को भी नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने केवल झारखंड सरकार से ही जवाब नहीं मांगा, बल्कि JPSC, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC), केंद्र सरकार और CBI को भी नोटिस जारी किया है। याचिका में 2025 की सिविल सर्विस प्रीलिमिनरी परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता हरीशरण देवगन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने अदालत को बताया कि बड़ी संख्या में अभ्यर्थी परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर चुके हैं।

कौन-कौन से रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग?

याचिका में मूल OMR शीट, अभ्यर्थियों की कार्बन कॉपी, प्रश्नपत्र, आंसर की, उपस्थिति रिकॉर्ड, बायोमेट्रिक डेटा, CCTV फुटेज और परीक्षा केंद्रों से जुड़े रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग की गई है। इसके अलावा स्कैनिंग और कोडिंग रिकॉर्ड, मूल्यांकन से जुड़ा डेटा, सर्वर लॉग और रिजल्ट तैयार करने से संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड को भी संरक्षित रखने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि जांच से यह पता लगना चाहिए कि कथित गड़बड़ी किसी एक अभ्यर्थी या परीक्षा केंद्र तक सीमित थी या फिर पूरी परीक्षा व्यवस्था में इसका असर था।

26 दिन तक चला था अभ्यर्थियों का आंदोलन

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद नया नहीं है। अलग-अलग परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों ने करीब 26 दिनों तक आंदोलन किया था। 19 अगस्त को प्रदर्शनकारियों ने अपना आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया था। इसके बाद हेमंत सोरेन सरकार ने 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया और 23 अन्य परीक्षाओं में जांच के आदेश दिए।

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