Sidhi Maternal Mortality 2026: मां बनने से पहले बुझ गईं 53 जिंदगियां, सीधी की मातृ मृत्यु दर ने खोली सिस्टम की पोल
Sidhi Maternal Mortality 2026: देश में मातृ मृत्यु दर घटने के दावों के बीच MP के सीधी जिले से चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जहां एक साल में 53 महिलाओं की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं
Sidhi Maternal Mortality 2026
Sidhi Maternal Mortality 2026: स्वास्थ्य और तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक पटल पर टॉप लिस्ट में शामिल होने के सरकारी दावों के बीच लगातार लचर व्यवस्था से जुड़ी घटनाएं इन दावों की कलई खोलने का माध्यम बनती जा रही हैं। मध्य प्रदेश का सीधी जिला इन दिनों एक बेहद चिंताजनक वजह से चर्चा में है। पिछले 12 महीनों में यहां 53 महिलाओं की प्रसव से पहले, प्रसव के दौरान या प्रसव के बाद मौत हो गई। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उन परिवारों का दर्द है जिन्होंने मां बनने जा रही अपनी बेटियों, बहुओं और पत्नियों को खो दिया। देश और राज्य स्तर पर मातृ मृत्यु दर में सुधार के दावों के बीच सीधी का मामला स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत सामने ला रहा है।
एक साल में 53 महिलाओं की मौत ने बढ़ाई चिंता
इस मामले में जारी आंकड़ों की बात करें तो अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच सीधी जिले में 53 मातृ मौतें दर्ज की गईं। इन महिलाओं की औसत उम्र सिर्फ 26 वर्ष थी, जबकि सबसे कम उम्र 19 साल थी। इनमें अधिकांश महिलाएं पहली या दूसरी बार मां बनने वाली थीं। विशेषज्ञों के अनुसार गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ी अधिकांश मौतों को समय पर इलाज और निगरानी से रोका जा सकता है, इसलिए यह आंकड़ा और अधिक गंभीर माना जा रहा है।
देश और राज्य में सुधार, लेकिन सीधी अब भी पिछड़ा
भारत में मातृ मृत्यु दर लगातार घट रही है। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) के अनुसार 2022-24 में देश की मातृ मृत्यु दर घटकर 87 प्रति एक लाख जीवित जन्म हो गई है। मध्य प्रदेश में भी यह दर 2018-20 के 173 से घटकर 159 पर पहुंच गई। हालांकि सीधी जिले की मातृ मृत्यु दर 211 दर्ज की गई, जो राज्य के औसत से काफी ज्यादा है। यही वजह है कि अब स्वास्थ्य विभाग ने जिले के प्रदर्शन पर विशेष निगरानी शुरू कर दी है।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही कई महिलाओं ने तोड़ दिया दम
मातृ मौतों के रिकॉर्ड बताते हैं कि इलाज तक पहुंचने में देरी एक बड़ी समस्या बनकर सामने आई। 53 में से 16 महिलाओं की मौत रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में हुई। वहीं 13 महिलाओं ने एंबुलेंस, निजी वाहन या किराए की गाड़ी में अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। 13 महिलाओं की मौत घर पर हुई। इससे साफ संकेत मिलता है कि समय पर इलाज और रेफरल सिस्टम में गंभीर कमियां हैं।
अत्यधिक रक्तस्राव बना मौत का सबसे बड़ा कारण
जिन मामलों की वजह स्पष्ट हो सकी, उनमें प्रसव के दौरान या उसके बाद होने वाला अत्यधिक रक्तस्राव सबसे बड़ा कारण बनकर सामने आया। 12 महिलाओं की मौत इसी वजह से हुई। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय पर खून उपलब्ध हो और प्रशिक्षित डॉक्टर मौजूद हों तो ऐसे अधिकांश मामलों में जान बचाई जा सकती है।
हाई ब्लड प्रेशर और एक्लेम्पसिया भी बना खतरा
गर्भावस्था के दौरान बढ़ा हुआ रक्तचाप और एक्लेम्पसिया भी कई महिलाओं के लिए जानलेवा साबित हुआ। सात महिलाओं की मौत इन जटिलताओं के कारण हुई। यह स्थिति अचानक दौरे पड़ने, अंगों के प्रभावित होने और मां व बच्चे दोनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। नियमित जांच और समय पर उपचार से ऐसे मामलों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
एनीमिया और पोषण की कमी ने बढ़ाई मुश्किलें
सीधी में मातृ स्वास्थ्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक एनीमिया भी है। पांच महिलाओं की मौत गंभीर एनीमिया के कारण हुई, जबकि 16 मामलों में आयरन और फोलिक एसिड की कमी को महत्वपूर्ण कारण माना गया। गर्भावस्था के दौरान शरीर को अतिरिक्त पोषण की जरूरत होती है, लेकिन ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में आज भी पोषण संबंधी जागरूकता और सुविधाओं की कमी देखी जाती है।
संक्रमण और गर्भपात से जुड़ी जटिलताओं ने भी ली जान
रिपोर्ट में सामने आया कि चार महिलाओं की मौत संक्रमण और सेप्सिस के कारण हुई, जबकि तीन महिलाओं ने गर्भपात से जुड़ी जटिलताओं के चलते दम तोड़ दिया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षित प्रसव, स्वच्छ चिकित्सा सुविधाएं और समय पर इलाज उपलब्ध हो तो ऐसे मामलों को रोका जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग की नाराजगी के बाद जारी हुआ नोटिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. एस. बी. खरे को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विभाग का आरोप है कि अस्पतालों में पर्याप्त तैयारी नहीं थी और कई मामलों में समय पर उचित फैसले नहीं लिए गए। अधिकारियों का कहना है कि कई महीनों से समीक्षा बैठकों, पत्रों और फोन कॉल के जरिए सुधार के निर्देश दिए जा रहे थे, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
जिला अस्पताल में स्टाफ और संसाधनों की भारी कमी
सीधी जिला अस्पताल में मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है, लेकिन संसाधन सीमित हैं। अस्पताल में एक ही एनेस्थीसियोलॉजिस्ट होने के कारण कई बार जटिल मामलों को संभालना मुश्किल हो जाता है। स्त्री रोग विशेषज्ञों और नर्सिंग स्टाफ की भी कमी है। मैटरनिटी वार्ड में जहां लगभग 40 कर्मचारियों की जरूरत है, वहां केवल 22 कर्मचारी कार्यरत हैं। इसका सीधा असर मरीजों को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ता है।
ब्लड बैंक की बदहाल स्थिति ने बढ़ाया जोखिम
प्रसव के दौरान होने वाले रक्तस्राव में खून की उपलब्धता बेहद जरूरी होती है। लेकिन सीधी जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। अप्रैल 2026 में अस्पताल के पास केवल सात यूनिट रक्त उपलब्ध था। बाद में रक्तदान शिविरों के जरिए अतिरिक्त यूनिट जुटाई गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि रक्त की कमी कई गंभीर मामलों में मौत का कारण बन सकती है।
ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में भी सुविधाओं का अभाव
जिले के कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों, नर्सों और आवश्यक उपकरणों की कमी बनी हुई है। कई केंद्रों में ब्लड स्टोरेज तो है लेकिन ब्लड ट्रांसफ्यूजन की सुविधा नहीं है। कुछ जगहों पर जरूरी दवाओं की कमी भी बताई गई है। ऐसे में गंभीर मरीजों को रीवा जैसे बड़े अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है, जिससे इलाज में देरी हो जाती है।
खराब सड़कें और लंबी दूरी भी बन रही हैं बाधा
सीधी के कई गांव दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों में स्थित हैं। बरसात के मौसम में सड़कें खराब हो जाती हैं और कई गांवों का संपर्क टूट जाता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है। कई बार मरीजों को खाट पर उठाकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है, जहां से उन्हें एंबुलेंस मिल पाती है।
एमपी के सीधी जिले का मामला पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए चेतावनी
सीधी में सामने आया संकट सिर्फ एक जिले की समस्या नहीं है। यह उन चुनौतियों को उजागर करता है जिनका सामना देश के कई दूरस्थ और आदिवासी इलाके आज भी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मातृ मृत्यु दर को और कम करने के लिए केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, पोषण, हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की समय पर पहचान, पर्याप्त ब्लड बैंक, प्रशिक्षित स्टाफ और मजबूत आपातकालीन सेवाएं भी उतनी ही जरूरी हैं।