Aligarh News: अलीगढ़ में जलभराव से चेहल्लुम जुलूस रुका, कर्बला तक नहीं पहुंच सका
Aligarh News: शाहजमाल क्षेत्र में भारी जलभराव के कारण चेहल्लुम का पारंपरिक जुलूस कर्बला तक नहीं पहुंच सका। आयोजकों ने चरक वाले चौराहे पर जुलूस का समापन किया।
अलीगढ़ में जलभराव से चेहल्लुम जुलूस रुका, कर्बला तक नहीं पहुंच सका (Photo- Newstrack)
Aligarh News: शहर के इतिहास में पहली बार चेहल्लुम का पारंपरिक जुलूस कर्बला तक नहीं पहुंच सका। शाहजमाल क्षेत्र में भारी जलभराव के कारण जुलूस को बीच रास्ते में ही रोकना पड़ा और इसका समापन चरक वाले चौराहे पर कर दिया गया। इस अभूतपूर्व घटना से अकीदतमंदों में मायूसी और नाराजगी देखने को मिली।
कर्बला के मुतवल्ली मुख्तार जैदी ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह नगर निगम की व्यवस्थाओं की बड़ी विफलता है। उनका कहना है। कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा स्मार्ट सिटी सहित अनेक विकास योजनाएं दी गई हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात बिल्कुल अलग दिखाई दे रहे हैं। यदि धार्मिक आयोजनों के लिए भी रास्ते सुरक्षित नहीं हैं, तो विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
मुख्तार जैदी ने कहा कि शाहजमाल क्षेत्र लंबे समय से जलभराव की समस्या से जूझ रहा है। और स्थानीय लोगों को हर बारिश में गंदे पानी के बीच रहने को मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पंपिंग स्टेशन की मोटर बदलनी ही थी, तो बारिश शुरू होने से पहले इसकी व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
आखिर नगर निगम ने समय रहते आवश्यक तैयारियां क्यों नहीं कीं? चेहल्लुम का जुलूस निर्धारित मार्ग से सिविल लाइंस और ऊपरकोट क्षेत्र होते हुए आगे बढ़ा, लेकिन शाहजमाल में जलभराव के चलते कर्बला तक पहुंचना संभव नहीं हो सका। मजबूरी में आयोजकों ने जुलूस का समापन चरक वाले चौराहे पर करने का निर्णय लिया। कई लोगों ने इसे शहर के धार्मिक इतिहास का बेहद दुखद क्षण बताया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में शाहजमाल और आसपास के क्षेत्रों में जलनिकासी की समस्या हर वर्ष सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं हो पाया। उनका आरोप है। कि करोड़ों रुपये की योजनाओं के बावजूद आम जनता को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
अब इस घटना के बाद नगर निगम की कार्यशैली और जलनिकासी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहरवासियों का मानना है। कि प्रशासन को इस मामले की जिम्मेदारी तय करते हुए भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए ठोस और स्थायी कदम उठाने चाहिए, ताकि धार्मिक आयोजनों और आम जनजीवन पर इस तरह का संकट फिर कभी न आए।