Aligarh News: गांधी जयंती पर न्यायालय में स्वच्छता की शपथ, पीएलवी ने दी विधिक जागरूकता की जानकारी
Aligarh News: अलीगढ़ में गांधी जयंती पर न्यायालय में जजों ने स्वच्छता की शपथ दिलाई। पीएलवी ने स्कूलों में विधिक जागरूकता कार्यक्रम किए।
Aligarh News: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर अलीगढ़ जिला न्यायालय परिसर सत्य, अहिंसा और स्वच्छता के संदेश से गुंजायमान हो उठा। गांधी जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के जन्मदिवस के अवसर पर न्यायालय परिसर में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों और अधिवक्ताओं ने स्वच्छता को व्यक्तिगत जिम्मेदारी से ऊपर उठकर सामाजिक दायित्व के रूप में अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ न्यायमूर्ति ए.एन. मित्तल, न्यायमूर्ति इफाकत अली खान एवं जनपद न्यायाधीश पंकज कुमार अग्रवाल ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित करके किया। इस दौरान पूरे परिसर में देशभक्ति और गांधीवादी विचारों का माहौल देखने को मिला।
सभा को संबोधित करते हुए माननीय न्यायमूर्तिगण ने कहा कि महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और न्यायपरक जीवन मूल्य आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने केवल देश को आजादी ही नहीं दिलाई, बल्कि जीवन जीने का एक आदर्श मार्ग भी दिखाया। उनके विचारों को आत्मसात कर ही एक स्वच्छ, न्यायपूर्ण और विकसित समाज का निर्माण किया जा सकता है। लाल बहादुर शास्त्री जी की सादगी और ईमानदारी भी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों और अधिवक्ताओं ने स्वच्छता की शपथ ली। सभी ने संकल्प लिया कि वे अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे। न्यायालय परिसर में स्वच्छता अभियान भी चलाया गया, जिसमें सभी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। वहीं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में पराविधिक स्वयंसेवकों (पीएलवी) ने जिले के विभिन्न विद्यालयों में प्रभात फेरी निकालकर गांधी जी के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाया। प्रभात फेरी के दौरान छात्र-छात्राओं को स्वच्छता के महत्व, नशा मुक्ति और अपने विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया। बच्चों ने हाथों में स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर गांधी जी के संदेशों का प्रचार-प्रसार किया। इस आयोजन ने गांधी जयंती को केवल एक औपचारिक स्मरण दिवस न बनाकर उनके विचारों को व्यवहार और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का संदेश दिया। कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि न्यायालय केवल न्याय देने का ही नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा दिखाने का भी केंद्र है।