जहां टेंट में विराजे थे रामलला, वहीं बनेगा भव्य स्मारक! अंदर दिखेगा 27 साल का पूरा इतिहास
Ayodhya Smarak Mandir: अयोध्या में उस जगह पर स्मारक मंदिर तैयार हो गया है, जहां 2020 में रामलला को अस्थायी मंदिर में रखा गया था। यहां राम मंदिर आंदोलन के 27 साल का सफर, पुराना टेंट और बलिदानियों की याद में बना स्मारक स्तंभ देखने को मिलेगा।
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Ayodhya Smarak Mandir: अयोध्या में राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) निर्माण से जुड़ी एक और अहम कड़ी अब श्रद्धालुओं के सामने आने वाली है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) ने उस जगह पर एक स्मारक मंदिर (Memorial Temple) तैयार कराया है, जहां मुख्य मंदिर का निर्माण शुरू होने से पहले रामलला की मूर्ति को अस्थायी मंदिर में रखा गया था। यह स्मारक मंदिर राम मंदिर आंदोलन (Ram Temple Movement) के 27 साल के सफर और रामलला की अस्थायी टेंट से भव्य मंदिर तक की यात्रा की याद को संजोएगा।
स्मारक मंदिर और इसके साथ बनाए गए स्मारक स्तंभ (Memorial Pillar) का निर्माण पूरा हो चुका है। अब इसे आम लोगों के लिए कब खोला जाएगा, इसका फैसला ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी करेंगे।
2020 में बदला था रामलला का ठिकाना
25 मार्च 2020 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) रामलला की मूर्ति को अयोध्या मंदिर परिसर के भीतर बनाए गए एक अस्थायी मंदिर (Makeshift Temple) में लेकर गए थे। उस समय मुख्य स्थल पर भव्य राम मंदिर का निर्माण शुरू नहीं हुआ था।
रामलला को जिस अस्थायी जगह पर रखा गया था, अब उसी स्थान पर एक स्मारक मंदिर तैयार किया गया है। इसका मकसद राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लंबे सफर और रामलला के उस दौर को याद रखना है, जब उनकी मूर्ति अस्थायी टेंट से लेकर भव्य मंदिर के गर्भगृह तक पहुंची।
आंदोलन की यादों को समर्पित स्मारक
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से तैयार इस स्मारक मंदिर को राम मंदिर आंदोलन के 27 साल के सफर की याद में बनाया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, यह स्मारक रामलला की उस यात्रा को भी दर्शाएगा, जिसे अस्थायी टेंट से भव्य मंदिर तक पहुंचने के रूप में देखा जाता है।
मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा (Nripendra Mishra) ने बताया कि अस्थायी मंदिर और उसके पास बनाए गए स्मारक दोनों का निर्माण पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि इसे जल्द ही आम लोगों के लिए खोला जाएगा और यह इतिहास की याद और प्रतीक के तौर पर मौजूद रहेगा।
लकड़ी से बना है स्मारक मंदिर
स्मारक मंदिर को सागौन की लकड़ी से तैयार किया गया है। इसमें लकड़ी पर नक्काशी भी की गई है। इसके बाहरी ढांचे को मुख्य राम मंदिर में इस्तेमाल किए गए लाल बलुआ पत्थर (Red Sandstone) की डिजाइन से मेल खाते हुए तैयार किया गया है।
यानी स्मारक मंदिर की बनावट भले ही लकड़ी की है, लेकिन इसके बाहरी स्वरूप में मुख्य राम मंदिर की स्थापत्य शैली की झलक दिखाई देगी। इसका उद्देश्य इसे राम मंदिर परिसर और उससे जुड़ी ऐतिहासिक यात्रा के साथ जोड़कर देखना है।
बीच में होगी इलेक्ट्रिक अखंड ज्योति
स्मारक मंदिर के केंद्र में इलेक्ट्रिक अखंड ज्योति (Electric Akhand Jyoti) लगाई गई है। इसे राम जन्मभूमि आंदोलन (Ram Janmabhoomi Movement) की याद और स्मरण के प्रतीक के तौर पर रखा गया है।
मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के मुताबिक, यहां सामान्य लौ या आग जलाने के बजाय इलेक्ट्रिक ज्वाला का इस्तेमाल करने का फैसला सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया गया। उन्होंने बताया कि स्मारक मंदिर लकड़ी से बना है, इसलिए ऐसी ज्वाला की जरूरत थी जिससे गर्मी पैदा न हो और किसी तरह की दुर्घटना की आशंका न रहे।
वही अस्थायी टेंट भी दिखेगा
रामलला की मूर्ति को जिस अस्थायी टेंट में रखा गया था, उसे भी स्मारक मंदिर में जगह दी जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, इस टेंट को मोड़कर रखे जा सकने वाले रूप में मंदिर के भीतर प्रदर्शित किया जाएगा।
इससे श्रद्धालुओं और वहां पहुंचने वाले लोगों को उस दौर की एक सीधी झलक मिल सकेगी, जब रामलला अस्थायी व्यवस्था में विराजमान थे और मुख्य राम मंदिर का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ था।
रामलला के साथ आया था भगवान हनुमान का पुराना विग्रह
सूत्रों के मुताबिक, स्मारक मंदिर में भगवान हनुमान (Lord Hanuman) की एक पुरानी मूर्ति भी रखी जाएगी। बताया जाता है कि रामलला की मूर्ति के साथ यह मूर्ति भी उसी जगह लाई गई थी और दोनों को एक ही टेंट के नीचे रखा गया था।
बाद में जब भव्य राम मंदिर का निर्माण पूरा हुआ और रामलला को मुख्य मंदिर के गर्भगृह (Garbhagriha) में स्थापित किया गया, तो रामलला की मूर्ति को वहां स्थानांतरित कर दिया गया। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक भगवान हनुमान की यह मूर्ति स्मारक मंदिर में ही रहेगी।
शहीदों की याद में अलग स्मारक स्तंभ
स्मारक मंदिर के साथ एक अलग स्मारक स्तंभ (Memorial Pillar) भी तैयार किया गया है। यह स्तंभ उन लोगों की याद में बनाया गया है, जिन्होंने कई दशकों तक चले राम मंदिर आंदोलन के दौरान अपनी जान गंवाई।
इस स्तंभ के ऊपर सूर्य के आकार की आकृति बनाई गई है। इसके साथ भगवान राम की चित्रात्मक प्रस्तुति भी उकेरी गई है। स्तंभ पर ट्रस्ट का ध्येय वाक्य ‘रमो विग्रहवान धर्म’ भी अंकित है।
‘रमो विग्रहवान धर्म’ का अर्थ है कि राम धर्म के साक्षात स्वरूप हैं। इस तरह स्मारक स्तंभ राम मंदिर आंदोलन से जुड़े बलिदानों की याद के साथ भगवान राम और धर्म की अवधारणा को भी प्रदर्शित करेगा।
कब खुलेगा स्मारक मंदिर, अभी फैसला नहीं
स्मारक मंदिर और स्मारक स्तंभ का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन इन्हें आम लोगों के लिए खोलने की तारीख अभी तय नहीं हुई है। जब नृपेंद्र मिश्रा से पूछा गया कि दोनों संरचनाओं को जनता के लिए कब खोला जाएगा, तो उन्होंने कहा कि दोनों का निर्माण पूरा हो चुका है और अब यह फैसला ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पर निर्भर है कि इन्हें कब और किस तरह आम लोगों के लिए खोला जाए।
यानी निर्माण पूरा होने के बाद अब अगला फैसला ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को करना है।
सप्त ऋषि मंदिर के पास है स्मारक
सूत्रों के मुताबिक, यह स्मारक मंदिर तीर्थ यात्री सुविधा केंद्र (Pilgrim Facilitation Centre) के पास स्थित सप्त ऋषि मंदिर (Sapta Rishis Temple) के नजदीक बनाया गया है। हालांकि, आम लोगों के लिए इसे खोलने से पहले ट्रस्ट मुख्य मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था (Security) और श्रद्धालुओं की आवाजाही यानी फुटफॉल (Footfall) को लेकर भी स्थिति का आकलन कर रहा है।
मुख्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए स्मारक मंदिर को खोलने और वहां लोगों की आवाजाही को लेकर व्यवस्था तैयार की जा रही है।
इस तरह अयोध्या में तैयार किया गया यह स्मारक मंदिर केवल एक नई संरचना नहीं होगा, बल्कि रामलला की उस यात्रा की याद को भी अपने भीतर समेटेगा, जो एक अस्थायी टेंट से शुरू होकर भव्य राम मंदिर के गर्भगृह तक पहुंची। इसके साथ बना स्मारक स्तंभ राम मंदिर आंदोलन से जुड़े दशकों पुराने संघर्ष में जान गंवाने वालों की स्मृति को भी दर्ज करेगा।