Ayodhya News: अयोध्या में राष्ट्रपति मुर्मु का भव्य स्वागत, राम यंत्र प्रतिष्ठा

Ayodhya News: चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन अयोध्या पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, एयरपोर्ट से राम मंदिर तक भव्य स्वागत, श्रीराम यंत्र की विधिवत प्रतिष्ठापना

Update:2026-03-19 19:23 IST

Ayodhya News: अयोध्या में चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन गुरुवार को देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का आगमन अत्यंत ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गरिमा से परिपूर्ण रहा। रामनगरी ने देश की प्रथम नागरिक का जिस भव्यता और श्रद्धा के साथ स्वागत किया, वह अपने आप में अद्वितीय दृश्य प्रस्तुत करता है। यह दौरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि सांस्कृतिक एकता और भारतीय परंपरा की झलक भी इसमें साफ दिखाई दी।

महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति के आगमन पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।


‘नगर की चाबी’ से हुआ सम्मान

अयोध्या पहुंचने पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को नगर की ओर से सर्वोच्च प्रतीकात्मक सम्मान ‘नगर की चाबी’ भेंट की गई। महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने उनका अभिनंदन करते हुए यह विशेष सम्मान प्रदान किया। यह परंपरा शहर के प्रति सम्मान और अतिथि के प्रति आदर का प्रतीक मानी जाती है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति मुर्मु का यह अयोध्या का दूसरा दौरा है, जिससे इस यात्रा का महत्व और भी बढ़ जाता है।


एयरपोर्ट से मंदिर तक भव्य स्वागत

जैसे ही राष्ट्रपति का काफिला एयरपोर्ट से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के लिए रवाना हुआ, पूरा मार्ग उत्सव स्थल में बदल गया। सड़कों के दोनों ओर लगभग 20 सांस्कृतिक मंच सजाए गए थे, जहां करीब 250 कलाकारों ने रामायण पर आधारित प्रस्तुतियां दीं।

कलाकारों ने पारंपरिक भारतीय वेशभूषा में भजन, स्वागत गीत, अवधी और भोजपुरी लोकगायन व लोकनृत्य प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इन प्रस्तुतियों ने न केवल आगंतुकों का मन मोह लिया, बल्कि अयोध्या की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत कर दिया।


हर ओर दिखा उत्साह और उल्लास

राष्ट्रपति के स्वागत में अयोध्यावासी भी पीछे नहीं रहे। सड़कों के किनारे खड़े लोगों ने पुष्प वर्षा कर और जयकारों के साथ उनका अभिनंदन किया। हर तरफ "जय श्रीराम" के उद्घोष सुनाई दे रहे थे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और उल्लासपूर्ण हो उठा।

कार्यक्रम को और भव्य बनाने के लिए रामलीला के अंश, आकर्षक झांकियां, ढोल-नगाड़ों की धुन, शंखनाद, वेदपाठ और भजन-कीर्तन जैसे पारंपरिक आयोजन किए गए। इन सभी ने मिलकर अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।


श्रीराम यंत्र की विधिवत प्रतिष्ठापना

अयोध्या दौरे का सबसे महत्वपूर्ण क्षण वह रहा, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की विधिवत प्रतिष्ठापना की। वैदिक मंत्रोच्चार और संतों की उपस्थिति में यह अनुष्ठान संपन्न हुआ।

राष्ट्रपति ने नव संवत्सर के अवसर पर रामलला के चरणों में शीश झुकाकर पूजा-अर्चना की और आरती उतारी। इस दौरान राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उनके साथ विधि-विधान से पूजा की। तीनों ने मंदिर परिसर में अन्य देवताओं के समक्ष भी श्रद्धा अर्पित की।

वैदिक परंपरा और आध्यात्मिक महत्व

श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना का विशेष धार्मिक महत्व है। यह यंत्र वैदिक गणित और ज्यामितीय आकृतियों पर आधारित होता है, जिसे देवताओं का निवास स्थान माना जाता है। मान्यता है कि यह सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और वातावरण को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाता है।


इस यंत्र को लगभग दो वर्ष पूर्व जगद्गुरु शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती महाराज द्वारा शोभायात्रा के माध्यम से अयोध्या लाया गया था। इसके लिए दक्षिण भारत, काशी और अयोध्या के आचार्यों द्वारा नौ दिवसीय वैदिक अनुष्ठान पहले से ही चल रहा था।

संतों और गणमान्य लोगों की उपस्थिति

यंत्र प्रतिष्ठापना के अवसर पर कई प्रमुख संत और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इनमें मां अमृतानंदमयी, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और अन्य सदस्य शामिल थे। सभी ने इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनकर इसे और विशेष बना दिया।


सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संगम का प्रतीक

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का यह अयोध्या दौरा केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, परंपरा और आस्था का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। चैत्र नवरात्रि जैसे पावन अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम देशभर में एक सकारात्मक संदेश देने वाला साबित हुआ।

अयोध्या की सजी-धजी गलियां, भक्तिमय वातावरण, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और धार्मिक अनुष्ठान—इन सभी ने मिलकर इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया। राष्ट्रपति का यह दौरा आने वाले समय में अयोध्या के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।

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