Ram Mandir FIR Copy: राम मंदिर मामले में पहली बार FIR कॉपी आई सामने, दोषियों मिलेगी सीधे उम्रकैद की सजा, लगीं ये गंभीर धाराएं

Ram Mandir FIR Copy: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले में पहली बार FIR की कॉपी सामने आई है। आठ नामजद आरोपियों पर बीएनएस और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। जानिए पूरे मामले की अहम जानकारी।

Update:2026-06-26 15:50 IST

Ram Mandir FIR Copy: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में करोड़ों रुपये के चढ़ावे और चंदे की चोरी का मामला अब हर गुजरते दिन के साथ और ज्यादा गहराता जा रहा है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बेहद कड़े और सख्त रुख के बाद मचे इस भारी सियासी बवाल के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और वरिष्ठ ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा था. इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब इस महा-घोटाले की पुलिस एफआईआर (FIR) की मूल कॉपी पहली बार सार्वजनिक तौर पर सबके सामने आई है, जिसने इस पूरे खूनी खेल की हर एक कड़नी को खोलकर रख दिया है.

25 जून की शाम 7:21 बजे दर्ज हुआ मुकदमा

सामने आए आधिकारिक सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, इस महा-घोटाले को लेकर मुख्य मुकदमा किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि खुद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ही एक सम्मानीय सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत के आधार पर अयोध्या के स्थानीय थाना रामजन्म भूमि में दर्ज कराया गया है. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 25 जून 2026 को शाम 7:21 बजे मिली इस लिखित तहरीर के आधार पर पुलिस ने मामला पंजीकृत किया है. इस प्रार्थना पत्र में सीधा आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने बहुत पहले से ही एक बेहद खतरनाक और सुनियोजित आपराधिक षडयंत्र रच रखा था.


नोट गिनने वाले कमरों में चला चोरी और गबन का खेल

ट्रस्ट की शिकायत के मुताबिक, राम मंदिर के दानपात्रों से निकलने वाली करोड़ों रुपये की भेंट और चढ़ावे की धनराशि की रोजाना गिनती करने के लिए दफ्तर के भीतर एक विशेष टीम तैनात की गई थी. इसी दौरान वहां पर तैनात कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों ने आपस में गुटबाजी कर बेहद चालाकी से प्रभु राम के चरणों में अर्पित होने वाली बड़ी रकम की चोरी, वित्तीय गबन और आपराधिक हेराफेरी को अंजाम दिया. पुलिस ने इस संवेदनशील मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए कुल 8 मुख्य आरोपियों को नामजद किया है, जबकि कुछ अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज किया है.

ड्राइवर टिन्नू यादव और अनुकल्प समेत 8 लोग नामजद

पुलिस की इस एफआईआर में जिन 8 बड़े चेहरों को मुख्य तौर पर नामजद किया गया है, उनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और चंपत राय का निजी ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं. इन सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत बेहद गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें अधिकतम आजीवन कारावास तक का प्रावधान शामिल है. धार्मिक स्थल पर चोरी (धारा 305) और सेवक द्वारा संपत्ति चोरी (धारा 306) के तहत 7-7 साल की कैद हो सकती है.

गबन और भ्रष्टाचार की धाराओं में होगी कठोर जेल

इस केस में सबसे बड़ी कानूनी कार्रवाई लोक सेवक या एजेंट द्वारा किए गए आपराधिक विश्वासघात (धारा 316(5)) और चुराई हुई संपत्ति के आदतन लेन-देन (धारा 317(4)) के तहत की गई है, जिनमें सीधे 10 साल की जेल या उम्रकैद हो सकती है. इसके अलावा, चोरी का पैसा छिपाने (धारा 317(5)) के लिए 3 वर्ष और सामूहिक रूप से साजिश रचने (धारा 61 और धारा 3(5)) के तहत मुख्य अपराधी के बराबर सजा तय की गई है. साथ ही, ट्रस्ट के पैसों के गबन के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) के तहत न्यूनतम 4 से लेकर अधिकतम 10 वर्ष तक की कठोर जेल और भारी जुर्माने की सख्त कानूनी संस्तुति की गई है.

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