भाजपा MLC देवेंद्र प्रताप सिंह की बगावत? सपा के संजयन त्रिपाठी को समर्थन देकर बढ़ाई हलचल

यूपी MLC चुनाव से पहले भाजपा नेता देवेंद्र प्रताप सिंह ने सपा प्रत्याशी संजयन त्रिपाठी को समर्थन दिया। जानिए गोरखपुर में नाराजगी से लेकर 23 अक्टूबर के चुनाव तक पूरा मामला।

Update:2026-10-19 19:30 IST

UP Teacher MLC Election: उत्तर प्रदेश की सियासत में भाजपा के भीतर असंतोष की एक और तस्वीर सामने आई है। विधान परिषद सदस्य (MLC) देवेंद्र प्रताप सिंह ने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी संजयन त्रिपाठी के समर्थन का ऐलान कर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। शिक्षक राजनीति से जुड़े मुद्दों पर मुखर रहने वाले देवेंद्र प्रताप सिंह का यह कदम भाजपा के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। सवाल अब सिर्फ एक प्रत्याशी को समर्थन देने का नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर नाराजगी और आगामी चुनावों में उसके संभावित सियासी असर का भी है।

गोरखपुर में भाजपा के कार्यक्रम के बाद क्यों बढ़ी नाराजगी?

देवेंद्र प्रताप सिंह की नाराजगी की चर्चा 12 अक्टूबर को गोरखपुर में आयोजित भाजपा के एक कार्यक्रम के बाद तेज हुई थी। सामने आई जानकारी के मुताबिक, कार्यक्रम में उन्हें मंच पर जगह नहीं मिलने से वह नाराज थे। इसके बाद से ही उनके पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट होने की अटकलें लगाई जा रही थीं। अब सपा प्रत्याशी संजयन त्रिपाठी को समर्थन देने के फैसले ने इन चर्चाओं को और हवा दे दी है।

हालांकि, इस घटनाक्रम को भाजपा से औपचारिक अलगाव या पार्टी छोड़ने का ऐलान मानना अभी जल्दबाजी होगी। देवेंद्र प्रताप सिंह ने समर्थन देकर अपनी राजनीतिक नाराजगी का संकेत जरूर दिया है, लेकिन उनके अगले कदम और भाजपा नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर सबकी नजर रहेगी।

फेसबुक पर पत्र लिखकर शिक्षकों और युवाओं से की अपील

देवेंद्र प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर हाथ से लिखा एक पत्र साझा किया है। इस पत्र में उन्होंने शिक्षक समुदाय और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को अपना परिवार बताते हुए उनके हितों के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही।

उन्होंने लिखा कि शिक्षक और प्रतिभाशाली प्रतियोगी नौजवानों के हितों के लिए उनका पूरा जीवन समर्पित है। पत्र में न्याय के लिए किए गए संघर्ष को अपमानित किए जाने की पीड़ा भी जाहिर की गई है। उनका संदेश साफ तौर पर शिक्षक समुदाय और युवाओं के बीच अपने समर्थन आधार को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

देवेंद्र प्रताप सिंह ने अपने पत्र में कहा कि जिन शिक्षक साथियों को न्याय पाने की ललक है और जिन्हें उनके संघर्ष पर विश्वास है, वे 23 अक्टूबर को अन्याय और अपमान के खिलाफ सशक्त जनादेश दें। उनकी इस अपील को सपा प्रत्याशी संजयन त्रिपाठी के समर्थन से जोड़कर देखा जा रहा है।

शिक्षक राजनीति के जरिए भाजपा को चुनौती?

देवेंद्र प्रताप सिंह के इस कदम का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है, क्योंकि शिक्षक और प्रतियोगी युवाओं से जुड़े मुद्दे उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से अहम रहे हैं। ऐसे में उनका सपा प्रत्याशी के पक्ष में उतरना चुनावी मुकाबले को प्रभावित कर सकता है। खासकर तब, जब शिक्षक समुदाय के बीच उनकी अपील का कितना असर होता है, यह चुनाव के नतीजों में सामने आ सकता है।

हालांकि, उनके समर्थन से संजयन त्रिपाठी को कितना फायदा मिलेगा, इसका आकलन अभी करना जल्दबाजी होगी। इसका असर संबंधित चुनाव क्षेत्र, शिक्षक मतदाताओं के रुख और अन्य राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करेगा।

अब भाजपा नेतृत्व क्या करेगा?

देवेंद्र प्रताप सिंह के समर्थन के बाद सबसे बड़ा सवाल भाजपा नेतृत्व की प्रतिक्रिया को लेकर है। क्या पार्टी इसे अंदरूनी नाराजगी मानकर बातचीत से सुलझाने की कोशिश करेगी या उनके कदम को अनुशासन के मुद्दे के तौर पर देखेगी? फिलहाल, उनके खिलाफ किसी आधिकारिक कार्रवाई की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।

एक तरफ देवेंद्र प्रताप सिंह ने शिक्षकों और युवाओं के सम्मान तथा न्याय का मुद्दा उठाया है, वहीं दूसरी तरफ उनके फैसले ने भाजपा के सामने राजनीतिक और संगठनात्मक चुनौती खड़ी कर दी है। अब निगाहें 23 अक्टूबर के चुनावी नतीजों और पार्टी नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं।

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