Chandauli News: चंदौली में भ्रष्टाचार जांच पर सवाल, शिकायतकर्ताओं ने लगाए आरोप

Chandauli News: कई ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार की जांच कर रहे अधिकारी पर लापरवाही और टालमटोल के आरोप लगे हैं, शिकायतकर्ताओं ने डीएम से निष्पक्ष जांच की मांग की।

Update:2026-06-02 17:34 IST

Chandauli News: चंदौली जिले में ग्राम पंचायतों में कथित भ्रष्टाचार की जांच को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। भ्रष्टाचार की जांच करने वाले अधिकारी पर ही शिकायतकर्ताओं ने जांच में लापरवाही और टालमटोल का आरोप लगाया है। मामला अब जिला प्रशासन तक पहुंच गया है, जिससे जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।

बताया जा रहा है कि जिले के कई गांवों में विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद जांच की जिम्मेदारी जिला पिछड़ा कल्याण अधिकारी रत्नेश सिंह को सौंपी गई थी। हालांकि, शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि महीनों बीत जाने के बावजूद जांच को अंतिम रूप नहीं दिया गया और न ही कोई स्पष्ट रिपोर्ट सार्वजनिक की गई।

जांच अधिकारी द्वारा मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वे लगातार जांच अधिकारी से संपर्क करते रहे, लेकिन उन्हें हर बार अलग-अलग कारण बताकर टाल दिया गया। आरोप है कि जांच अधिकारी द्वारा मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, जबकि कई मामलों में जिलाधिकारी के निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद जांच प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी।

मामले को लेकर यह चर्चा भी तेज है कि जिले के कई गांवों में भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की जांच एक ही अधिकारी को सौंपे जाने से निष्पक्षता और प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अलग-अलग मामलों की जांच विभिन्न अधिकारियों को सौंपी जाती तो जांच अधिक पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी हो सकती थी।

निष्पक्ष जांच की मांग

शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि न्यायालय के आदेश के बावजूद जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई। इससे उनके बीच नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर सिंगरौल केए तार्पणव पांडे और रमौली गांव के शिकायतकर्ता राधेश्याम मौर्य ने जिलाधिकारी से मिलने पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।

शिकायतकर्ताओं ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि लंबित जांचों को जल्द पूरा कराया जाए तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही बरती गई है तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाए। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और लंबित जांचों का निष्कर्ष कब तक सामने आएगा।

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