धानापुर में आजादी से पांच साल पहले 10 दिन फहराया तिरंगा, वीरों की गूंज इंग्लैंड संसद पहुंची
Chandauli News: चंदौली के धानापुर में 16 अगस्त 1942 को स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह कर थाने पर तिरंगा फहराया। गोलीकांड में कई वीर शहीद हुए और 26 अगस्त तक धानापुर में तिरंगा शान से लहराता रहा।
Chandauli News
Chandauli News: चंदौली का धानापुर 16 अगस्त के लिए ऐतिहासिक पन्नों में दर्ज हो गया है यहां के वीर सपूतों ने आजादी के पांच वर्ष पूर्व 1942 में धानापुर थाने को फूंक कर अपनी शहादत देते हुए 10 दिन के लिए आजाद कराकर भारत के तिरंगे को फहरा दिया था,जिसकी गूंज इंग्लैंड के संसद तक पहुंच गई। इस घटना को पूर्वांचल के चौरी चौरा के रूप में भी याद किया जाता है, यही नहीं इस क्षेत्र के वीर सपूत देश की आजादी में इस कदर अपने आप को नौछावर करने के लिए बेताब थे कि एक बाद कई घटनाओं से अंग्रेजों को नाकों चने चबाने को मजबूर कर दिया। सकलडीहा स्टेशन पर रेलवे लाइन उखाड़ कर जहां पटना रेल लाइन को बाधित किया वहीं सैयदराजा ने भी गया रेल लाइन को उखाड़कर बाधित करने का कार्य किया।
पूरे देश में तत्कालीन वाराणसी जनपद का यह धानापुर क्षेत्र देश की आजादी के लिए प्रेरक बन गई थी। जब महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन का नारा दिया तो शहीद गांव के निवासी कामता प्रसाद विद्यार्थी के नेतृत्व में क्षेत्रीय वीर सपूत इकट्ठा होने लगे और 16 अगस्त 1942 को धानापुर थाने पर लगभग 10000 लोगों की भीड़ के साथ पहुंच गए वहां तत्कालीन थाना अध्यक्ष अनवारूल हक भीड़ देखकर गोली चलवा दिया।अंग्रेजी गुलामों की गोली से मांगू सिंह, हीरा सिंह और रघुनाथ सिंह शहीद हो गए। यही नहीं कई अन्य घायल भी हो गए। उसके बाद वीर सपूतों का खून खौल गया और आग लगाकर थाना अध्यक्ष सहित गोरे अंग्रेजों की गुलामी करने वाले पुलिसकर्मियों को आग के हवाले करते हुए थाने पर तिरंगा फहरा दिया। 16 अगस्त से 26 अगस्त तक यह तिरंगा शान से फहराता रहा और देश के आजादी के पांच वर्ष पूर्व ही यह क्षेत्र आजाद हो गया।
यह घटना इंग्लैंड के संसद तक पहुंची और फिर अंग्रेज पूरी ताकत लगाकर 27 अगस्त को धानापुर थाने पर कब्जा कर लिया यही नहीं उस समय आसपास के लोगों को गोरे आताताइयों द्वारा बेहद यातनाएं भी दी गई। लेकिन आजादी के मतवाले उन यातनाओं को सहते हुए आखिरकार 1947 में देश को आजाद करवा दिया। 16 अगस्त को धानापुर के शहीद स्मारक पर उन शहीदों को याद करने के लिए सभी लोग श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए पहुंचते हैं।अब तो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी क्षेत्र के रहे नहीं लेकिन उनके द्वारा बताए गए जानकारी के अनुसार 1922 में महात्मा गांधी द्वारा असहयोग आंदोलन के थमने के बाद भी चंदौली के धानापुर में क्रांतिकारियों का उत्साह चरम पर था।
16 अगस्त 1942 को सैकड़ों स्वतंत्रता सेनानी धानापुर थाने को घेरने पहुंच गए, और तिरंगा फहराने की मांग करने लगे। वहां तैनात तत्कालीन अंग्रेज दरोगा अनवारुल हक ने तिरंगा फहराने से इनकार कर दिया, जिसके बाद स्थिति बिगड़ गई।दरोगा ने गोलियां चलवा दी, जिसमें हीरा सिंह की मौके पर ही मृत्यु हो गई और छह लोग घायल हो गए। महंगू सिंह की रास्ते में और रघुनाथ सिंह की अस्पताल में मृत्यु हो गई। तीन अन्य घायल सत्यनारायण, रामसिंह, और सीताराम का भी लंबे समय तक इलाज चला। इसके बावजूद, शिवमंगल यादव ने थाना भवन पर चढ़कर तिरंगा फहरा दिया।