Chandauli News: किसानों को निर्यात के नए अवसर, काले चावल और सब्जियों के विदेशी बाजार पर मंथन

Chandauli News: चंदौली में आयोजित संगोष्ठी में किसानों को काले चावल, सब्जियों और जीआई टैग उत्पादों के निर्यात की संभावनाओं की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने आधुनिक खेती और विदेशी बाजार पर चर्चा की।

Update:2026-05-11 18:14 IST

Chandauli News(Photo-Social Media)

Chandauli News: उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 11 मई 2026 को आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कृषि उत्पादों की संभावनाओं और निर्यात प्रक्रिया की जानकारी दी। इस संगोष्ठी में कुल 145 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 60 महिला किसान भी शामिल रहीं।

जीआई टैग उत्पादों की ब्रांडिंग पर दिया गया जोर

कार्यक्रम की शुरुआत कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र रघुवंशी ने की। उन्होंने चंदौली जिले के विशेष कृषि उत्पादों पर चर्चा करते हुए बताया कि यहां का प्रसिद्ध ‘काला चावल’ (ब्लैक राइस) और ‘आदम चीनी चावल’ अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से पहचान बना रहे हैं। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि यदि वे खेती के दौरान गुणवत्ता, पैकेजिंग और आधुनिक मार्केटिंग तकनीकों का ध्यान रखें, तो उन्हें स्थानीय मंडियों की तुलना में कहीं बेहतर कीमत मिल सकती है। उन्होंने जीआई टैग उत्पादों की ब्रांडिंग और निर्यात को किसानों के लिए बड़ा अवसर बताया।

स्वरोजगार और महिला समूहों को बढ़ावा

संगोष्ठी के मुख्य अतिथि एपीडा (भारत सरकार) के डीजीएम डॉ. सी.बी. सिंह ने किसानों, युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि लोग केवल नौकरी खोजने वाले न बनें, बल्कि रोजगार देने वाले बनें। उन्होंने किसानों को एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन) और महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से व्यापार को आगे बढ़ाने की सलाह दी। साथ ही कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन (Value Addition) पर भी जोर दिया, ताकि किसानों की आमदनी में वृद्धि हो सके।

आधुनिक तकनीकों से खेती को मिलेगा फायदा

अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विवेक कुमार और डॉ. अभयदीप गौतम ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने DSR तकनीक यानी धान की सीधी बुवाई के फायदे बताए, जिससे पानी और लागत दोनों की बचत होती है। विशेषज्ञों ने बीज और मिट्टी के उपचार की प्रक्रिया पर भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मिट्टी की जांच और बीजों का शोधन करने से फसल को बीमारियों से बचाया जा सकता है और उत्पादन में वृद्धि होती है।

सब्जियों और मिर्च के निर्यात की संभावनाएं

जिला उद्यान अधिकारी डॉ. शैलेंद्र देव दुबे ने किसानों को सब्जी उत्पादन और मिर्च के निर्यात की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यदि किसान आधुनिक तकनीकों के साथ खेती करें और गुणवत्ता बनाए रखें, तो विदेशी बाजार में उनकी उपज की अच्छी मांग हो सकती है। उन्होंने किसानों को निर्यात मानकों और बाजार की आवश्यकताओं के बारे में भी जागरूक किया।

किसानों को मिलेगा बैंक से आर्थिक सहयोग

अग्रणी जिला प्रबंधक (LDM) सुनील कुमार भगत ने किसानों को आश्वासन दिया कि यदि वे नया उद्योग, स्टार्टअप या कृषि आधारित व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, तो बैंकों की ओर से उन्हें पूरा वित्तीय सहयोग और ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। कार्यक्रम के अंत में प्रगतिशील किसान शशिकांत राय और पूजा कुमारी ने अपने अनुभव साझा किए। किसानों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम उन्हें नई जानकारी देने के साथ-साथ वैश्विक बाजार तक पहुंचने का आत्मविश्वास भी देते हैं।

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