श्रीकृष्ण जन्मभूमि कारसेवा का ऐलान आज, 1000 लोगों के जुटने के दावे से मथुरा में हाई अलर्ट
श्रीकृष्ण जन्मभूमि कारसेवा के ऐलान के बाद मथुरा में हाई अलर्ट है। 9 अगस्त को राधाकुंड में हवन-यज्ञ और शिला पूजन होगा। 1000 लोगों के जुटने का दावा है।
Mathura Shri Krishna Janmabhoomi News: श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद के बीच मथुरा में 9 अगस्त को प्रस्तावित कारसेवा कार्यक्रम को लेकर हलचल तेज हो गई है। राधाकुंड स्थित चित्रकूट पीठ में रविवार को हवन-यज्ञ और शिला पूजन का कार्यक्रम प्रस्तावित है। आयोजकों का दावा है कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साधु-संत और हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हो सकते हैं। करीब एक हजार लोगों के जुटने के दावे के बीच प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
चित्रकूट पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन को लेकर 9 अगस्त को कारसेवा का ऐलान किया था। हालांकि, बाद में कार्यक्रम के स्वरूप में बदलाव किया गया। अब सीधे कारसेवा के बजाय राधाकुंड स्थित चित्रकूट पीठ में हवन-यज्ञ और शिला पूजन को प्रमुखता दी जा रही है।
आयोजकों का कहना है कि इन धार्मिक अनुष्ठानों के जरिए श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के अगले चरण की शुरुआत की जाएगी।
1000 से ज्यादा लोगों के पहुंचने का दावा
कारसेवा कार्यक्रम में एक हजार से अधिक लोगों के जुटने का दावा किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, 13 अखाड़ों के साधु-संतों के साथ विभिन्न हिंदू संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता भी कार्यक्रम में पहुंच सकते हैं।
आयोजक इस अभियान को अयोध्या के राम मंदिर आंदोलन की तर्ज पर आगे बढ़ाने की बात कह रहे हैं। हालांकि, इस मुद्दे पर सभी हिंदू संगठनों की एक राय नहीं है।
VHP ने कारसेवा के आह्वान से बनाई दूरी
विश्व हिंदू परिषद (VHP) पहले ही संतों की ओर से किए गए कारसेवा के आह्वान से दूरी बना चुकी है। संगठन ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करने की बात कही थी।
ऐसे में 9 अगस्त के कार्यक्रम को लेकर हिंदू संगठनों के बीच भी रणनीति को लेकर अंतर दिखाई दे रहा है।
राजस्थान से मथुरा पहुंचे गुलाबी पत्थर
कारसेवा की तैयारियों के बीच राजस्थान के भरतपुर से गुलाबी पत्थर मथुरा पहुंचाए गए हैं। आयोजकों के मुताबिक, शिला पूजन के बाद इन पत्थरों पर नक्काशी का काम शुरू किया जाएगा।
इसके लिए ओडिशा से करीब 20 कारीगरों के मथुरा पहुंचने की बात भी कही जा रही है। आयोजकों की योजना इन पत्थरों को प्रस्तावित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण से जोड़ने की है। हालांकि, विवादित परिसर में किसी भी निर्माण या गतिविधि की अनुमति का सवाल न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णय से जुड़ा है।
पहले सीधे कारसेवा का किया गया था ऐलान
स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने जुलाई में 9 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए कारसेवा का आह्वान किया था। इसके बाद प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ाई।
रिपोर्टों के मुताबिक, स्वामी सच्चिदानंद महाराज को प्रशासन की ओर से एक साल के लिए पाबंद किए जाने और जमानती नोटिस दिए जाने की कार्रवाई भी की गई थी। इसके बाद कार्यक्रम के स्वरूप में बदलाव किया गया।
CRPF और कोबरा कमांडो का फ्लैग मार्च
कारसेवा के ऐलान के बाद मथुरा में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। 8 अगस्त को CRPF और कोबरा कमांडो ने संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च किया।
प्रशासन संभावित भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर रहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के साथ अधिकारियों की ओर से संतों और आयोजकों से शांति एवं सौहार्द बनाए रखने की अपील की गई है।
कई संतों को नोटिस, प्रशासन सख्त
कार्यक्रम को लेकर कुछ संतों और धार्मिक हस्तियों को प्रशासन की ओर से नोटिस दिए जाने की भी जानकारी सामने आई है। इनमें साध्वी रत्नप्रभा और कथावाचक देवकीनंदन महाराज समेत कुछ अन्य नाम बताए जा रहे हैं।
प्रशासन का रुख साफ है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद को लेकर किसी भी गतिविधि से कानून-व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
आज क्या होगा?
9 अगस्त को राधाकुंड स्थित चित्रकूट पीठ में हवन-यज्ञ और शिला पूजन प्रस्तावित है। इसके बाद गुलाबी पत्थरों पर नक्काशी शुरू किए जाने की तैयारी है। आयोजकों का दावा है कि बड़ी संख्या में संत और समर्थक कार्यक्रम में पहुंचेंगे।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होता है या भीड़ को देखते हुए प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी करनी पड़ती है।
अदालत में जारी है श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से जुड़े विभिन्न मामले अदालतों में विचाराधीन हैं। ऐसे में धार्मिक आयोजनों और कारसेवा के ऐलान ने मथुरा में प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।
9 अगस्त का कार्यक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक तरफ अदालत में कानूनी प्रक्रिया जारी है, वहीं दूसरी तरफ श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन से जुड़े संगठन जमीन पर अपनी गतिविधियां तेज करने का दावा कर रहे हैं।