'फंदे पर लटकते देखेंगे तभी…’ मुस्कान-साहिल को सज़ा के बाद भी क्यों संतुष्ट नहीं है सौरभ का परिवार?
Blue Drum Murder: मेरठ के नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा मिली। सौरभ के परिवार ने कहा- असली तसल्ली दोषियों को फंदे पर लटकते देखने के बाद मिलेगी।
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Blue Drum Murder: मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड (Blue Drum Murder Case) में अदालत ने दोषी मुस्कान रस्तोगी (Muskan Rastogi) और साहिल शुक्ला (Sahil Shukla) को मौत की सजा सुनाई है। अदालत के इस फैसले से सौरभ राजपूत (Saurabh Rajput) की मां और भाई संतुष्ट हैं, लेकिन परिवार का कहना है कि उनके लिए असली तसल्ली उस वक्त होगी, जब दोनों दोषियों को फांसी के फंदे पर लटकते देखेंगे। परिजनों ने साफ कर दिया है कि जरूरत पड़ने पर वे इस मामले को लेकर हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।
सौरभ के परिवार के लिए अदालत का फैसला इंसाफ की दिशा में एक बड़ा कदम है, लेकिन बेटे और भाई को खोने का दर्द अब भी उनके साथ है। परिजनों का कहना है कि जब तक अदालत से मिली सजा पर अमल नहीं होता, तब तक उन्हें पूरी संतुष्टि नहीं मिलेगी। परिवार ने यह भी साफ कर दिया है कि आगे कानूनी प्रक्रिया में जिस भी स्तर पर जरूरत होगी, वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
‘अलग हो जाओ, किसी की जान मत लो’
सौरभ की मां ने ‘आजतक’ से बातचीत में अपने दर्द को बयां करते हुए कहा कि अगर किसी को किसी के साथ नहीं रहना है तो वह अलग हो सकता है, लेकिन किसी की जान नहीं लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके लिए सौरभ कहीं गया ही नहीं है। घर का एक-एक कोना उन्हें अपने बेटे की याद दिलाता है और उसकी कमी परिवार को लगातार महसूस होती है।
सौरभ की मां ने लोगों को संदेश देते हुए कहा कि किसी के बच्चे या पति की हत्या नहीं करनी चाहिए। अगर कोई लड़का और लड़की साथ नहीं रहना चाहते हैं तो उन्हें अलग हो जाना चाहिए, लेकिन किसी की जिंदगी खत्म करने का फैसला नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा करने वालों को मुस्कान और साहिल की तरह फांसी की सजा का सामना करना पड़ सकता है।
बेटियों के भविष्य की भी चिंता
सौरभ के परिवार की चिंता सिर्फ अदालत के फैसले तक सीमित नहीं है। परिजन उसकी बेटियों के भविष्य को लेकर भी चिंतित हैं। परिवार का कहना है कि वे बड़ी बेटी को अपने साथ रखने के लिए तैयार हैं और उसकी देखभाल और परवरिश की जिम्मेदारी उठाना चाहते हैं।
परिजनों के मुताबिक, बच्ची को ऐसा माहौल मिलना जरूरी है, जहां उसे परिवार का साथ मिले और वह सही रास्ते पर आगे बढ़ सके। परिवार चाहता है कि उसे उचित संस्कार और बेहतर माहौल मिले, ताकि वह भविष्य में मुस्कान जैसी परिस्थितियों या रास्ते पर न चले।
परिजनों का कहना है कि बच्ची की देखभाल और उसका भविष्य उनके लिए बेहद अहम है। एक तरफ अदालत के फैसले से परिवार को राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ सौरभ की यादें और उसकी बेटियों के भविष्य की चिंता उनके सामने भावनात्मक चुनौती बनी हुई है।
पैरवी से यहां तक पहुंचा मामला
इस चर्चित हत्याकांड (Murder Case) में पुलिस और अभियोजन पक्ष की पैरवी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मेरठ के एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने केस से जुड़े पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार देने की बात कही है। पुलिसकर्मियों को यह सम्मान मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया में उनके योगदान के लिए दिया जाएगा।
पुलिस और अभियोजन पक्ष ने संयुक्त रूप से मामले की पैरवी की, जिसके बाद अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड (Death Penalty) सुनाया। फैसले के बाद सौरभ के परिवार ने संतोष जताया, लेकिन परिजन अब भी यही कह रहे हैं कि दोषियों को फांसी पर लटकते देखने के बाद ही उन्हें वास्तविक संतुष्टि मिलेगी।
HC से SC तक लड़ाई जारी रखने की तैयारी
सौरभ के परिवार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर आगे कानूनी लड़ाई की जरूरत पड़ी तो वे पीछे नहीं हटेंगे। परिवार हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाने के लिए तैयार है। उनका कहना है कि सजा पर अमल होने तक वे कानूनी प्रक्रिया के हर जरूरी चरण में अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
अदालत के फैसले ने सौरभ के परिवार को इंसाफ की दिशा में एक बड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन परिवार के लिए यह कहानी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। एक तरफ वे दोषियों को मिली मौत की सजा के फैसले के साथ खड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ सौरभ की यादें और उसकी बेटियों के भविष्य की जिम्मेदारी उनके सामने है। उनके लिए अब सबसे बड़ा इंतजार उस दिन का है, जब अदालत से मिली सजा पर वास्तव में अमल होगा।