टोल पर हाई वोल्टेज ड्रामा! पुलिस से भिड़े चंद्रशेखर आजाद, बोले- क्या छिपाना चाहती है पुलिस?

Chandrashekhar-Police Conflict: मुजफ्फरनगर के रोहाना टोल प्लाजा पर मेरठ जाते समय नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद की पुलिस से तीखी नोकझोंक हो गई। काफिले की गाड़ियां रोके जाने पर उन्होंने पुलिस से सवाल किए और मेरठ एसएसपी व डीएम से मुलाकात कर जवाब मांगने की बात कही।

Update:2026-07-10 13:51 IST

Image Source- Newstrack 

Chandrashekhar-Police Conflict: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद के नगर कोतवाली क्षेत्र स्थित रोहाना टोल प्लाजा पर शुक्रवार को उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) अपने काफिले के साथ सहारनपुर (Saharanpur) से मेरठ (Meerut) की ओर जा रहे थे। इस दौरान उनकी गाड़ी तो टोल पार कर गई, लेकिन उनके काफिले की कुछ गाड़ियों को पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद चंद्रशेखर आजाद खुद गाड़ी से उतरकर पुलिसकर्मियों के पास पहुंचे और दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

हाथ जोड़ते दिखे पुलिस अधिकारी

टोल प्लाजा पर हुए इस घटनाक्रम के दौरान इंस्पेक्टर धर्मवीर सिंह (Dharmveer Singh) चंद्रशेखर आजाद के सामने हाथ जोड़कर खड़े दिखाई दिए। वहीं चंद्रशेखर आजाद उनसे बातचीत करते हुए नजर आए। इस दौरान इंस्पेक्टर यह कहते हुए भी सुनाई पड़े कि वह इंस्पेक्टर हैं और इंस्पेक्टर ही रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कोई गाली नहीं दी और हाथ जोड़कर बात कर रहे हैं।

हंगामे के बाद मेरठ के लिए रवाना हुआ काफिला

टोल प्लाजा पर हुए विवाद के बाद चंद्रशेखर आजाद का काफिला मेरठ के लिए रवाना हो गया। बताया गया कि मेरठ पहुंचकर वह मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (Senior Superintendent of Police-SSP) से मुलाकात करेंगे। उनका कहना है कि प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ हुई कथित बदसलूकी को लेकर वह एसएसपी से जवाब मांगेंगे कि ऐसा क्यों हुआ और इसके पीछे किसका हाथ है।

उन्होंने यह भी कहा कि वह पीड़ित परिवार से भी मुलाकात करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यह देखना होगा कि पुलिस उन्हें मेरठ तक पहुंचने देती है या नहीं।

"कोई निर्दोष जेल न जाए, कोई दोषी बचना नहीं चाहिए"

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उनका स्पष्ट मानना है कि कोई निर्दोष जेल नहीं जाना चाहिए और कोई दोषी बचना भी नहीं चाहिए।

उन्होंने कहा कि पूरे देश को पता है कि मेरठ में क्या हुआ। वह किसी से छिपकर नहीं जा रहे हैं, बल्कि सबको बताकर जा रहे हैं। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक देश में जिस तरह का व्यवहार हुआ, वह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जब इतने बड़े पद पर बैठे अधिकारी इस तरह का व्यवहार करेंगे तो लोगों के मन में डर और चिंता होना स्वाभाविक है।

"अगर पुलिस रोक रही है तो वजह भी बताए"

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि अगर उन्हें रोका जा रहा है तो इसका जवाब पुलिस को देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पुलिस आखिर क्या छिपाना चाहती है और उन्हें रोकने की वजह क्या है। उन्होंने कहा कि इसका जवाब उनसे नहीं बल्कि पुलिस से पूछा जाना चाहिए।

एसएसपी के व्यवहार पर उठाए सवाल

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि संबंधित अधिकारी का व्यवहार गरिमापूर्ण नहीं था। उन्होंने कहा कि अगर कोई अधिकारी सिर्फ नारेबाजी से डर जाता है तो यह चिंता का विषय है। उनका कहना था कि जब किसी के पास हथियार नहीं थे और केवल नारेबाजी हो रही थी, तब इस तरह का व्यवहार उचित नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

संघर्ष का रास्ता अपनाने की अपील

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने लोगों से संघर्ष करने और कानूनी रास्ता अपनाने की अपील करते हुए कहा कि अदालतें खुली हैं और बड़े अधिकारी भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी के साथ अन्याय होता है तो उसे लड़ाई लड़नी चाहिए, क्योंकि अगर पीड़ित ही हार मान लेगा तो उसके लिए न्याय की लड़ाई कौन लड़ेगा।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों के साथ अन्याय हुआ है, उनकी पीड़ा को वह महसूस करते हैं। उनका कहना था कि अगर अधिकारियों ने समय रहते लोगों की बात सुन ली होती तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।

अधिकारियों और पीड़ित परिवार से मिलने की कही बात

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि वह एक संवैधानिक पद पर हैं और अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए अधिकारियों से भी मिलेंगे और पीड़ित परिवार से भी मुलाकात करेंगे।

उन्होंने कहा कि वह पीड़ितों की बात सुनेंगे, बड़े अधिकारियों से चर्चा करेंगे और यदि बातचीत से समाधान नहीं निकला तो आगे की रणनीति बनाई जाएगी

"सड़क किसी के बाप की नहीं"

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि पुलिस की जांच पर सवाल तब खड़े होते हैं जब अधिकारियों का व्यवहार इस तरह का होता है।

उन्होंने कहा कि अगर पीड़ित परिवार को पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं हो रहा है तो इसकी वजह अधिकारियों का आचरण भी है। उन्होंने कहा कि सड़क किसी के बाप की नहीं है जैसी भाषा का इस्तेमाल करने वाले अधिकारी का व्यवहार बेहद चिंताजनक है। उनके मुताबिक जिले के सर्वोच्च पद पर बैठे अधिकारी की ऐसी भाषा पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े करती है।

एसएसपी और डीएम से करेंगे मुलाकात

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि वह मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी दोनों से मुलाकात करेंगे।

उन्होंने कहा कि वह दोनों अधिकारियों से पूछेंगे कि ऐसा व्यवहार क्यों किया गया और यह सब किसके इशारे पर हुआ। उनके मुताबिक यही सवाल लोगों के मन में भय पैदा कर रहे हैं और इन्हीं सवालों का जवाब लेने के लिए वह मेरठ जा रहे हैं।

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