संत प्रेमानंद महाराज पर अब क्यों भड़के वृंदावन के संत? इस बात का प्रूफ तक मांग लिया

वृंदावन के कुछ संतों ने प्रेमानंद महाराज की किडनी की स्थिति और डायलिसिस से जुड़ी चर्चाओं पर सवाल उठाए हैं।

Update:2026-10-18 22:49 IST

Premanand Maharaj: वृंदावन के मशहूर संत प्रेमानंद महाराज एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनके प्रवचन नहीं, बल्कि उनकी सेहत को लेकर चल रही चर्चाएं हैं। ब्रजभूमि के कुछ संतों ने महाराज की किडनी की स्थिति और डायलिसिस से जुड़ी खबरों पर सवाल उठाए हैं। उनकी मांग है कि स्वास्थ्य को लेकर सामने आ रही बातों की सच्चाई स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं के बीच किसी तरह का भ्रम न रहे। हालांकि, प्रेमानंद महाराज की वास्तविक मेडिकल स्थिति को लेकर अधिकृत जानकारी सामने आना अभी जरूरी है।

किडनी खराब है या उसका आकार छोटा है? इसी बात पर उठा सवाल

प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य को लेकर चर्चा के बीच कुछ संतों का कहना है कि उनकी किडनी खराब होने और डायलिसिस कराने की बातों की प्रमाणिकता स्पष्ट नहीं है। उनका दावा है कि किडनी का आकार छोटा होना और उसका काम करना बंद कर देना, दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं।

इसी आधार पर संतों ने महाराज की किडनी से जुड़ी मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि स्वास्थ्य को लेकर गंभीर दावे किए जा रहे हैं, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उनके पीछे प्रमाणित जानकारी क्या है। हालांकि, किडनी कितनी अच्छी तरह काम कर रही है और डायलिसिस की जरूरत है या नहीं, इसका पता चिकित्सकीय जांच से ही लगाया जा सकता है।

डायलिसिस को लेकर भी संतों ने उठाए सवाल

प्रेमानंद महाराज के देश-विदेश में बड़ी संख्या में श्रद्धालु हैं। ऐसे में उनकी सेहत से जुड़ी खबरें सामने आने पर भक्तों के बीच चिंता होना स्वाभाविक है। इसी वजह से कुछ संतों ने डायलिसिस को लेकर चल रही चर्चाओं पर सवाल उठाए हैं।

संतों का कहना है कि उन्हें महाराज के डायलिसिस कराए जाने की कोई प्रमाणित जानकारी नहीं मिली है। वे चाहते हैं कि इस विषय पर स्थिति स्पष्ट हो, ताकि बिना पुष्टि के कोई बात आगे न फैले। फिलहाल, डायलिसिस से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

महाराज के सेवकों की कार्यशैली पर भी सवाल

इस मामले में ब्रजभूमि के कुछ संतों ने प्रेमानंद महाराज के सेवकों की कार्यशैली पर भी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि महाराज की सेहत से जुड़ी जानकारी को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं है, जिसके चलते अलग-अलग तरह की चर्चाएं फैल रही हैं।

कुछ संतों ने सेवकों के व्यवहार को अनुशासनहीन बताते हुए व्यवस्था में स्पष्टता लाने की मांग की है। उनका कहना है कि महाराज जैसे प्रतिष्ठित संत के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला संवेदनशील है और इस बारे में श्रद्धालुओं तक केवल प्रमाणित जानकारी ही पहुंचनी चाहिए।

पीआर कंपनियों और बिल्डर समूहों को लेकर भी आरोप

विवाद के बीच कुछ संतों ने पीआर कंपनियों और बिल्डर समूहों की भूमिका को लेकर भी आशंका जताई है। उनका आरोप है कि प्रेमानंद महाराज की किडनी और डायलिसिस को लेकर भ्रामक प्रचार किया जा रहा है।

हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में स्वतंत्र रूप से सत्यापित सबूत सामने आना जरूरी है। फिलहाल किसी कंपनी या समूह की संलिप्तता को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। इस मामले में वास्तविक स्थिति क्या है, यह स्पष्ट होना बाकी है।

मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग, लेकिन निजता भी अहम

संतों की प्रमुख मांग है कि प्रेमानंद महाराज की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चल रही चर्चाओं पर स्पष्टता आए। उनका मानना है कि प्रमाणित जानकारी सामने आने से श्रद्धालुओं की चिंता कम हो सकती है और अपुष्ट दावों पर विराम लग सकता है।

वहीं, मेडिकल रिपोर्ट किसी व्यक्ति की निजी स्वास्थ्य जानकारी होती है। इसे सार्वजनिक करने का फैसला संबंधित व्यक्ति की सहमति और निजता का सम्मान करते हुए ही किया जाना चाहिए।

फिलहाल प्रेमानंद महाराज की किडनी की स्थिति, डायलिसिस से जुड़े दावों और कथित भ्रामक प्रचार को लेकर उठे सवालों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। अधिकृत मेडिकल जानकारी सामने आने पर ही इन चर्चाओं की वास्तविकता को लेकर स्थिति साफ हो सकेगी।

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