Raebareli News: सादगी की मिसाल: कैबिनेट मंत्री डॉ. मनोज पाण्डेय ने रद्द किया अपना भव्य स्वागत समारोह

Raebareli News: कैबिनेट मंत्री डॉ. मनोज पाण्डेय ने पीएम के ईंधन बचाओ संदेश का पालन करते हुए गृह जनपद में सभी भव्य स्वागत कार्यक्रम रद्द किए।

Update:2026-05-14 18:08 IST

 सादगी की मिसाल: कैबिनेट मंत्री डॉ. मनोज पाण्डेय ने रद्द किया अपना भव्य स्वागत समारोह (Photo- Newstrack)

Raebareli News: ​लखनऊ/जनपद: उत्तर प्रदेश सरकार के नवनियुक्त कैबिनेट मंत्री डॉ. मनोज कुमार पाण्डेय ने राजनीति में सादगी और अनुशासन की एक नई मिसाल पेश की है। 15 मई (शुक्रवार) को मंत्री बनने के बाद पहली बार अपने गृह जनपद आगमन पर होने वाले सभी भव्य स्वागत कार्यक्रमों को उन्होंने जनहित में निरस्त कर दिया है।

​प्रधानमंत्री के आह्वान का सम्मान

​डॉ. पाण्डेय ने सोशल मीडिया के माध्यम से जनता को संबोधित करते हुए कहा कि वे कार्यकर्ताओं के उत्साह और स्नेह से अभिभूत हैं, लेकिन माननीय प्रधानमंत्री जी के 'ईंधन बचाने' के आह्वान और मंत्रियों को 'अनावश्यक काफिले व दिखावे' से दूर रहने के निर्देशों का पालन करना उनका प्राथमिक कर्तव्य है।

​"यह सम्मान मेरा नहीं, बल्कि हम सबके सामूहिक विश्वास का है। लेकिन सादगी और सेवा ही हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। मैं नहीं चाहता कि मेरे स्वागत के कारण जनता को असुविधा हो या संसाधनों का अपव्यय हो।" — डॉ. मनोज कुमार पाण्डेय

​प्रमुख घोषणाएं और संदेश

​दिखावा नहीं, सेवा: मंत्री जी ने समर्थकों से आग्रह किया है कि वे भीड़, वाहनों के काफिले और भव्य आयोजनों की जगह केवल अपना आशीर्वाद और शुभकामनाएँ दें।


​जल्द होगा 'जन आशीर्वाद समारोह': उन्होंने वादा किया कि वे बहुत जल्द एक व्यवस्थित 'जन आशीर्वाद समारोह' के माध्यम से हर गांव और कस्बे में जाकर व्यक्तिगत रूप से जनता से भेंट करेंगे।

​सेवक की भूमिका: उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सत्ता के अहंकार से दूर, सदैव एक सेवक और परिवार के सदस्य के रूप में जनता के बीच उपस्थित रहेंगे।

​जनता में भारी सराहना

​मंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद इस तरह का निर्णय लेना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों और सोशल मीडिया पर लोग उनके इस फैसले को "नई राजनीति की शुरुआत" बता रहे हैं। राज कुमार शर्मा जैसे समर्थकों ने इसे "बेहद सुंदर और अभिनंदनीय कदम" करार दिया है।

​निष्कर्ष: डॉ. मनोज पाण्डेय का यह कदम न केवल पर्यावरण और सरकारी संसाधनों की बचत की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए भी एक बड़ा संदेश है।

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