Azam Khan की जौहर यूनिवर्सिटी पर ED का शिकंजा! 45 करोड़ या 494 करोड़? ठेके की रकम से जुड़े ‘राज’ की जांच तेज

Jauhar University ED Raid: ईडी सूत्रों के मुताबिक, सरकारी ठेके हासिल करने वाले निजी ठेकेदारों ने अपनी कमाई का एक हिस्सा जौहर ट्रस्ट या यूनिवर्सिटी से जुड़े निर्माण और अन्य कार्यों में खर्च किया।

Update:2026-08-20 12:00 IST

Jauhar University ED Raid: लखनऊ में जौहर यूनिवर्सिटी (Jauhar University) और जौहर ट्रस्ट (Jauhar Trust) से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद मामले में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। सरकारी ठेकों से जुड़ी रकम के कथित डायवर्जन (Fund Diversion) और उसके जौहर ट्रस्ट या यूनिवर्सिटी से जुड़े कार्यों में इस्तेमाल के सबूत मिलने के आधार पर ईडी ने कार्रवाई की है। ईडी सूत्रों के मुताबिक, सरकारी ठेके हासिल करने वाले निजी ठेकेदारों ने अपनी कमाई का एक हिस्सा जौहर ट्रस्ट या यूनिवर्सिटी से जुड़े निर्माण और अन्य कार्यों में खर्च किया।

जांच के दौरान सामने आया है कि कुछ रकम चेक (Cheque) और कुछ रकम आरटीजीएस (RTGS) के जरिए भेजी गई। ठेकेदारों और निर्माण कंपनियों के बैंक खातों के विश्लेषण (Bank Account Analysis), संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल सामग्री की जांच के दौरान ईडी को इन लेनदेन से जुड़े सुराग मिले हैं।

2012 से 2017 के बीच के लेनदेन पर ईडी की नजर

ईडी अब साल 2012 से 2017 के बीच हुए वित्तीय लेनदेन (Financial Transactions) की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। इस दौरान कई सरकारी विभागों के ठेकेदारों, उनके सहयोगियों और जौहर ट्रस्ट तथा यूनिवर्सिटी से जुड़े लोगों के बीच वित्तीय लेनदेन के सुराग मिले हैं।

एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ठेकेदारों ने जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े कार्यों के नाम पर दान, भुगतान या अन्य लेनदेन किस रास्ते से जौहर यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट तक पहुंचाया। अब जांच का फोकस रकम के स्रोत (Source of Funds) और उसकी आखिरी कड़ी (Final Beneficiary) का पता लगाने पर है।

ईडी यह भी जांच रही है कि ठेकेदारों की ओर से ट्रस्ट को किए गए भुगतान वास्तविक कारोबार, कथित दान या धर्मार्थ लेनदेन (Charitable Transactions) थे या फिर अपराध से अर्जित रकम को छिपाने और एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करने के लिए इनका इस्तेमाल किया गया।

494 करोड़ के खर्च पर ईडी को शक

ईडी इस पूरे वित्तीय नेटवर्क (Financial Network) की विस्तृत पड़ताल कर रही है। छापेमारी में मिले दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की जांच के बाद मामले की तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है। सूत्रों के मुताबिक, सरकारी धन के कथित दुरुपयोग (Misuse of Government Funds) और फर्जी दानदाताओं (Fake Donors) से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद कार्रवाई की गई।

ईडी जौहर यूनिवर्सिटी के भवनों के निर्माण में सरकारी विभागों के धन के कथित दुरुपयोग, फर्जी दानदाताओं, डमी ट्रस्टी (Dummy Trustees) और काले धन (Black Money) के इस्तेमाल के आरोपों की जांच कर रही है।

जांच में सामने आया है कि ट्रस्ट ने 59 भवनों के निर्माण में करीब 45 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया। वहीं ईडी की जांच में इन भवनों के निर्माण की वास्तविक लागत करीब 494 करोड़ रुपये होने की बात सामने आई है। इसी अंतर को लेकर एजेंसी रकम के स्रोत और उसके इस्तेमाल का हिसाब खंगाल रही है।

यूनिवर्सिटी निर्माण में 8 सरकारी विभागों का पैसा

जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में आठ सरकारी विभागों (Government Departments) का करीब 110 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है। वहीं ईडी को विभागों से करीब 150 करोड़ रुपये खर्च होने के सबूत भी मिले हैं। एजेंसी अब इन रकमों के इस्तेमाल और उनके अंतिम गंतव्य की जांच कर रही है।

ईडी को शक है कि सरकारी ठेकों से हासिल रकम का एक हिस्सा जौहर ट्रस्ट या यूनिवर्सिटी से जुड़े कार्यों में डायवर्ट किया गया। इसी कथित फंड डायवर्जन (Fund Diversion) और काले धन के इस्तेमाल के शक के चलते एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) का मामला दर्ज किया है।

सांसद और विधायक निधि से भी मिला पैसा

जांच के मुताबिक, आजम खां (Azam Khan) के प्रभाव के चलते जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में सांसद और विधायक निधि (MP and MLA Funds) से करीब 4.57 करोड़ रुपये दिए गए थे। अब ईडी सरकारी विभागों से मिले धन, ठेकेदारों के लेनदेन और ट्रस्ट तथा यूनिवर्सिटी से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड की कड़ियां जोड़ रही है।

फिलहाल एजेंसी का मुख्य फोकस इस बात का पता लगाने पर है कि जौहर यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट के निर्माण कार्यों में इस्तेमाल हुई बड़ी रकम का वास्तविक स्रोत क्या था और सरकारी ठेकों से जुड़े धन का कथित डायवर्जन किस रास्ते से हुआ।

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