सपा ने निर्वाचन आयोग से निष्पक्ष नियुक्तियों की उठाई मांग: जातिवाद-धर्म पर नियुक्तियों का आरोप

समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पोलिंग स्टेशन और अन्य चुनावी पदों पर जाति और धर्म के आधार पर भेदभावपूर्ण नियुक्तियों का आरोप लगाया है।

Update:2025-10-28 20:32 IST

Lucknow News: Photo-Social Media

Uttar Pradesh News: समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पोलिंग स्टेशन और अन्य चुनावी पदों पर जाति और धर्म के आधार पर भेदभावपूर्ण नियुक्तियों का आरोप लगाया है। सपा ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मांग की है कि सभी नियुक्तियां निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाएं, ताकि भारत निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता पर कोई सवाल न उठे।

सपा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि प्रदेश के 403 विधानसभा क्षेत्रों के तहत 1 लाख 62 हजार 486 पोलिंग स्टेशनों पर कार्यरत बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) एडीएम (इलेक्शन) और ईआरओ (इलेक्शन रिटर्निंग ऑफिसर) की नियुक्ति में जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव किया गया है। उनका आरोप है कि ये नियुक्तियां भारतीय जनता पार्टी सरकार के मानसिकता वाले अधिकारियों द्वारा की गई हैं।

2024 उप-चुनावों में जातिवाद का आरोप

समाजवादी पार्टी ने विशेष रूप से 2024 के विधानसभा उप-चुनावों में जातिवाद और धर्म के आधार पर बीएलओ की नियुक्तियों पर चिंता व्यक्त की है। पार्टी ने कानपुर नगर के सीसामऊ और अंबेडकर नगर के कटेहरी विधानसभा उप-चुनावों में बीएलओ की नियुक्तियों को लेकर शिकायत की थी, लेकिन निर्वाचन आयोग ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। शिकायतों के बावजूद, निर्वाचन आयोग मूकदर्शक बना रहा है, जिससे पार्टी का आरोप है कि आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

सपा नेताओं ने त्वरित कार्रवाई की मांग

समाजवादी पार्टी के नेताओं के अनुसार, आगामी चुनावों में यदि निष्पक्षता बनाए रखनी है तो इस तरह की नियुक्तियों की जांच की जानी चाहिए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। ज्ञापन मुख्य निर्वाचन अधिकारी को केके श्रीवास्तव, डॉ. हरिश्चंद्र और राधेश्याम सिंह द्वारा सौंपा गया था, जिसमें उन्होंने त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।

सपा की यह मांग निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार के सामने एक गंभीर चुनौती प्रस्तुत करती है। आगामी विधानसभा चुनावों में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए चुनावी नियुक्तियों में पारदर्शिता और समानता जरूरी है।

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