Shamli News: भाई की चाहत में 8 साल की बच्ची को कांवड़ में बिठाकर हरिद्वार से ला रहा परिवार

Shamli News: शामली में करनाल से आई अनोखी कांवड़ चर्चा में है। परिवार 8 साल की बच्ची को कांवड़ में बैठाकर भाई की मनोकामना के लिए हरिद्वार से जल ला रहा है।

Update:2026-08-09 20:32 IST

Shamli Kanwar Yatra

Shamli News: हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर लाखों की संख्या में कांवड़िये और डाक कांवड़िये शामली से होकर अपने-अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। इस दौरान आस्था, विश्वास और अनोखी कांवड़ों की कई तस्वीरें सामने आ रही हैं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी कांवड़ दिखाने जा रहे हैं, जिसमें सिर्फ शिवभक्ति ही नहीं, बल्कि एक मासूम बहन की दिल से निकली इच्छा भी जुड़ी हुई है। हरियाणा के करनाल से आए एक परिवार ने अपनी 8 वर्षीय बेटी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से यात्रा शुरू की है। परिवार का कहना है कि यह कांवड़ भोलेनाथ से एक भाई की कामना के लिए बोली गई थी।

हरियाणा के करनाल निवासी रोहित अपने परिवार के साथ 3 अगस्त को हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर रवाना हुए थे। उनकी कांवड़ आम कांवड़ों से बिल्कुल अलग है। कांवड़ के एक तरफ 8 साल की उनकी भतीजी बैठी है, जबकि दूसरी तरफ लगभग 30 लीटर गंगाजल रखा गया है। इस तरह पूरी कांवड़ का वजन करीब 60 किलो है, जिसे रोहित अपने कंधों पर लेकर लगातार यात्रा कर रहे हैं।

रोहित बताते हैं कि उनकी भतीजी के मन में लंबे समय से एक भाई की इच्छा है। पिछले वर्ष उन्होंने भोलेनाथ से मनौती मांगी थी कि यदि उनकी प्रार्थना स्वीकार हुई तो वह अपनी भतीजी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से जल लेकर आएंगे। उसी संकल्प को पूरा करने के लिए इस बार पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ यह यात्रा की जा रही है।

आज यह परिवार शामली पहुंचा, जहां उनकी अनोखी कांवड़ को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। राहगीर रुक-रुककर इस कांवड़ को देखते रहे और भोलेनाथ के जयकारों के बीच परिवार की श्रद्धा की सराहना करते नजर आए। रोहित के साथ उनके अन्य चाचा और बच्ची के पिता भी यात्रा में शामिल हैं और सभी मिलकर इस कठिन सफर को पूरा कर रहे हैं।

सावन के पावन महीने में हर कोई अपनी-अपनी मनोकामना लेकर भोलेनाथ की शरण में पहुंचता है। कोई स्वास्थ्य की कामना करता है, कोई सुख-समृद्धि की, तो कोई संतान या परिवार की खुशियों के लिए कांवड़ यात्रा करता है। करनाल से आई यह अनोखी कांवड़ भी एक मासूम बहन की उस इच्छा की प्रतीक है, जिसमें वह अपने जीवन में एक भाई का साथ चाहती है। अब परिवार को पूरा विश्वास है कि भोलेनाथ उनकी प्रार्थना अवश्य सुनेंगे और उनकी मनोकामना पूरी करेंगे।

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